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भोजपुर के किसानों के लिए राहत की खबर: देर से मानसून में भी इन पांच धान किस्मों से मिलेगी भरपूर उपजभारत
6 जुल॰ 2026, 12:25 am (45 दिन पहले)· 2

भोजपुर के किसानों के लिए राहत की खबर: देर से मानसून में भी इन पांच धान किस्मों से मिलेगी भरपूर उपज

भोजपुर में मानसून की देरी से परेशान किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों ने राजेन्द्र श्वेता, स्वर्ण श्रेया, स्वर्ण समृद्धि, बी.पी.टी. 5204 और सम्पूर्णा जैसी मध्यम अवधि की धान किस्में सुझाई हैं, जिनकी नर्सरी सिर्फ 70 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है।

भोजपुर में इस बार मानसून के देर से सक्रिय होने ने धान की खेती करने वाले किसानों को चिंता में डाल दिया है, लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि सही समय पर सही किस्म का चुनाव करने से यह मुश्किल आसानी से टल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश की देरी के बावजूद किसान बंपर उत्पादन हासिल कर सकते हैं, बशर्ते वे अभी से नर्सरी और बुवाई की योजना बदल लें।

मानसून लेट है तो बदलनी होगी बुवाई की रणनीति

आमतौर पर मानसून के तय समय पर आने की उम्मीद में किसान लंबी अवधि वाली धान की किस्में बोते हैं, लेकिन बारिश देर से आने पर यही किस्में रोपाई में देरी की वजह बन जाती हैं और आगे चलकर उत्पादन पर असर डालती हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परिस्थिति में किसानों के लिए मध्यम अवधि वाली धान की किस्में कहीं ज्यादा भरोसेमंद विकल्प हैं, क्योंकि ये कम समय में तैयार होकर देर से शुरू हुए मानसून के साथ भी तालमेल बिठा लेती हैं।

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राजेन्द्र श्वेता से लेकर सम्पूर्णा तक, ये पांच किस्में आएंगी काम

कृषि विशेषज्ञों ने जिन किस्मों को सबसे उपयुक्त बताया है, उनमें राजेन्द्र श्वेता, स्वर्ण श्रेया, स्वर्ण समृद्धि, बी.पी.टी. 5204 और सम्पूर्णा शामिल हैं। किसान इन्हीं पांच किस्मों की नर्सरी तैयार रख सकते हैं, ताकि बारिश शुरू होते ही बिना देर किए रोपाई का काम शुरू किया जा सके। इससे मानसून की अनिश्चितता के बावजूद खेत खाली नहीं रहेंगे और बुवाई का पूरा कार्यक्रम पटरी पर बना रहेगा।

महज 70 से 75 दिन में तैयार हो जाती है नर्सरी

इन किस्मों की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इनकी नर्सरी करीब 70 से 75 दिनों में ही तैयार हो जाती है। यानी अगर मानसून सामान्य से कुछ हफ्ते देर से भी दस्तक दे, तब भी किसान समय का गणित बिगड़ने नहीं देंगे और उत्पादन पर पड़ने वाला असर काफी हद तक कम हो जाएगा। कम अवधि में नर्सरी तैयार होने से किसानों को रोपाई की तारीख तय करने में लचीलापन मिलता है, जो अनियमित बारिश के इस दौर में बेहद जरूरी माना जा रहा है।

नर्सरी में बीज उपचार और सिंचाई का रखें खास ख्याल

विशेषज्ञों की सलाह है कि नर्सरी तैयार करते वक्त बीज उपचार जरूर करें, खाद और उर्वरक का इस्तेमाल संतुलित मात्रा में करें, और समय-समय पर सिंचाई के साथ खरपतवार नियंत्रण पर भी ध्यान दें। इन बातों का पालन करने से पौधे शुरू से ही स्वस्थ और मजबूत बनते हैं, जिसका फायदा रोपाई के बाद पूरे खेत में दिखता है और पौधों की बढ़वार बेहतर होती है।

बीज खरीदने से पहले कृषि विज्ञान केंद्र से जरूर करें बात

कृषि विशेषज्ञ किसानों को सुझाव दे रहे हैं कि वे अपने क्षेत्र की मिट्टी और मौसम के हिसाब से नजदीकी कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र के जानकारों से सलाह लेकर ही बीज का चुनाव करें। प्रमाणित बीज खरीदने से फसल की गुणवत्ता और पैदावार, दोनों में सुधार होता है। समय पर खेत तैयार करने, पानी का सही प्रबंधन करने और खेती के वैज्ञानिक तरीके अपनाने से किसान मानसून की देरी के असर को काफी हद तक झेल पाएंगे और अच्छी उपज हासिल कर सकेंगे।

सवाल-जवाब

मानसून में देरी होने पर धान की कौन सी किस्में बोनी चाहिए?
कृषि विशेषज्ञ राजेन्द्र श्वेता, स्वर्ण श्रेया, स्वर्ण समृद्धि, बी.पी.टी. 5204 और सम्पूर्णा जैसी मध्यम अवधि की किस्मों की सलाह दे रहे हैं।
इन किस्मों की नर्सरी तैयार होने में कितना समय लगता है?
इन किस्मों की नर्सरी करीब 70 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है।
नर्सरी तैयार करते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
बीज उपचार, संतुलित उर्वरक का इस्तेमाल, समय पर सिंचाई और खरपतवार प्रबंधन का ध्यान रखना चाहिए।
बीज खरीदने से पहले किससे सलाह लेनी चाहिए?
अपने क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के हिसाब से नजदीकी कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए।
प्रमाणित बीज इस्तेमाल करने का क्या फायदा है?
प्रमाणित बीज इस्तेमाल करने से फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों बेहतर होती हैं।
यह सलाह किस जिले के किसानों को दी गई है?
यह सलाह भोजपुर के किसानों को दी गई है।
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