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गोंडा के कृषि विशेषज्ञ की सलाह: धान रोपाई में जरा सी चूक पूरी उपज पर भारी पड़ सकती हैभारत
2 जुल॰ 2026, 10:01 am (45 दिन पहले)· 3

गोंडा के कृषि विशेषज्ञ की सलाह: धान रोपाई में जरा सी चूक पूरी उपज पर भारी पड़ सकती है

गोंडा के कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम के विशेषज्ञ डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि धान की रोपाई से पहले खेत की जुताई, पानी की सही मात्रा और सही समय जैसी बातों का ध्यान रखना क्यों जरूरी है.

गोंडा जिले में खरीफ सीजन शुरू होते ही किसान धान की रोपाई की तैयारी में जुट गए हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि रोपाई का यह काम जितना जरूरी है, उतना ही नाजुक भी है. सही समय और सही तरीके से रोपाई करने पर फसल की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन में इजाफा होता है, लेकिन जरा सी चूक पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है. यही वजह है कि रोपाई शुरू करने से पहले किसानों को कुछ बुनियादी बातों पर खास ध्यान देना चाहिए.

खेत की तैयारी सबसे पहला कदम

कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम के कृषि विशेषज्ञ डॉ. हरपाल सिंह के मुताबिक, रोपाई से पहले खेत की गहरी जुताई और समतलीकरण करना सबसे जरूरी काम है. जब खेत पूरी तरह समतल होता है, तभी उसमें पानी बराबर मात्रा में टिकता है. असमतल खेत में कहीं पानी जमा हो जाता है तो कहीं जमीन सूखी रह जाती है, जिसका सीधा असर पौधों की बढ़वार पर पड़ता है. इसलिए रोपाई से पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करना नींव रखने जैसा है.

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पानी की मात्रा का संतुलन जरूरी

डॉ. हरपाल सिंह बताते हैं कि रोपाई के वक्त खेत में पानी की मात्रा का सही होना बेहद जरूरी है. न तो खेत में पानी बहुत ज्यादा भरा होना चाहिए और न ही खेत बिल्कुल सूखा रहना चाहिए. जरूरत से ज्यादा पानी भरने से पौधों की जड़ें कमजोर पड़ सकती हैं, वहीं कम पानी में पौधे ठीक से जड़ नहीं पकड़ पाते. दोनों ही स्थितियां धान की फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं, इसलिए पानी का संतुलन बनाए रखना जरूरी है.

सही समय पर रोपाई क्यों जरूरी

डॉ. हरपाल सिंह के अनुसार नर्सरी से पौधे निकालकर सही समय पर रोपाई करना सबसे अहम बात है. उनका सुझाव है कि धान की जिस किस्म को तैयार होने में जितने महीने लगते हैं, उतने ही सप्ताह बाद उसकी रोपाई कर देनी चाहिए. जैसे अगर कोई किस्म 3 महीने में तैयार होती है, तो नर्सरी लगाने के करीब 3 सप्ताह बाद ही उसकी रोपाई कर लेनी चाहिए. इस तरीके से पौधे जल्दी जमीन पकड़ लेते हैं, उनकी बढ़वार तेज होती है और आखिर में पैदावार भी ज्यादा मिलती है.

पौध चयन में सावधानी बरतें

डॉ. हरपाल सिंह किसानों को सलाह देते हैं कि रोपाई के लिए हमेशा स्वस्थ और हरे-भरे पौधे ही चुनें. कमजोर या पीले पड़ चुके पौधों की रोपाई करने से पूरी फसल पर बुरा असर पड़ता है, क्योंकि ऐसे पौधे न तो ठीक से बढ़ते हैं और न ही अच्छी उपज दे पाते हैं. इसलिए नर्सरी से पौधे चुनते वक्त उनकी सेहत को परखना जरूरी है.

रोपाई के बाद की देखभाल भी उतनी ही जरूरी

डॉ. हरपाल सिंह के मुताबिक रोपाई पूरी होने के बाद भी काम खत्म नहीं होता. खेत में पानी का सही प्रबंधन बनाए रखना और समय-समय पर खरपतवार नियंत्रण करना जरूरी है, वरना खरपतवार धान के पौधों से पोषक तत्व छीन सकते हैं. डॉ. हरपाल सिंह का कहना है कि अगर किसान इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें तो धान की फसल मजबूत बनेगी, रोगों का खतरा कम होगा और उत्पादन में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.

सवाल-जवाब

धान की रोपाई से पहले सबसे जरूरी काम क्या है?
खेत की गहरी जुताई करके उसे अच्छी तरह समतल करना सबसे पहला और जरूरी काम है, ताकि खेत में पानी बराबर मात्रा में टिका रहे.
रोपाई के समय खेत में पानी कितना होना चाहिए?
पानी न तो बहुत ज्यादा होना चाहिए और न ही खेत बिल्कुल सूखा होना चाहिए, दोनों ही स्थितियां धान की फसल के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं.
नर्सरी से पौधों की रोपाई कब करनी चाहिए?
धान की किस्म जितने महीने में तैयार होती है, उतने ही सप्ताह बाद उसकी रोपाई कर देनी चाहिए, जैसे 3 महीने की किस्म की रोपाई करीब 3 सप्ताह बाद कर देनी चाहिए.
रोपाई के लिए कैसे पौधे चुनने चाहिए?
हमेशा स्वस्थ और हरे-भरे पौधे ही चुनने चाहिए, कमजोर या पीले पौधे लगाने से पूरी फसल पर बुरा असर पड़ता है.
रोपाई के बाद किसानों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
खेत में पानी का सही प्रबंधन बनाए रखना और समय-समय पर खरपतवार नियंत्रण करना जरूरी है.
यह सलाह किसने दी है?
गोंडा के कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम के कृषि विशेषज्ञ डॉ. हरपाल सिंह ने यह जानकारी दी है.
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