दक्षिण भारत में रेल यात्रा का अनुभव जल्द ही पूरी तरह बदलने वाला है। भारतीय रेलवे, तिरुपति समेत दक्षिण भारत के कई प्रमुख शहरों को हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद से तिरुपति के लिए बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने की दिशा में अहम कदम उठाए जा रहे हैं और रूट तथा स्टेशन लगभग तय हो चुके हैं।
760 किलोमीटर का विशाल हाई-स्पीड कॉरिडोर
हैदराबाद, अमरावती और चेन्नई को आपस में जोड़ने वाला 760.09 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी एनएचएसआरसीएल ने राज्य सरकार के इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाया है। पूरे कॉरिडोर में सबसे लंबा हिस्सा आंध्र प्रदेश से गुजरेगा। राज्य में लगभग 518.54 किलोमीटर लंबा रूट प्रस्तावित है, जबकि बाकी हिस्सा तेलंगाना और तमिलनाडु में होगा। इस परियोजना के पूरा होने पर आंध्र प्रदेश दक्षिण भारत के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का एक अहम केंद्र बन जाएगा।
18 स्टेशन, तिरुपति भी सूची में
प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के तहत कुल 18 स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें आंध्र प्रदेश के प्रमुख शहर जैसे अमरावती, गुंटूर, नेल्लोर और तिरुपति शामिल हैं। इन स्टेशनों के बनने से यात्रियों को तेज और आधुनिक परिवहन सुविधा मिलेगी। राज्य के विभिन्न शहरों के बीच कनेक्टिविटी पहले की तुलना में काफी बेहतर होगी और लोगों के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाना पहले के मुकाबले बहुत आसान हो जाएगा।
चित्तूर और तिरुपति के बीच खास लिंक कॉरिडोर
राज्य सरकार के अनुरोध पर चित्तूर और तिरुपति के बीच लगभग 65 किलोमीटर लंबा एक विशेष हाई-स्पीड लिंक कॉरिडोर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एनएचएसआरसीएल ने इसके लिए सर्वे और डीपीआर तैयार करने की मंजूरी दे दी है। डीपीआर पूरी हो जाने के बाद यह रिपोर्ट अंतिम मंजूरी के लिए रेल मंत्रालय के पास भेजी जाएगी।
बेंगलुरु से सीधे तिरुपति की बुलेट ट्रेन सेवा संभव होगी
चित्तूर-तिरुपति हाई-स्पीड लिंक तैयार होने के बाद बेंगलुरु, चित्तूर, तिरुपति और अमरावती के बीच सीधी बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करना संभव हो जाएगा। यात्रियों को लंबी दूरी कम समय में पूरी करने का एक बेहतरीन विकल्प मिलेगा। इन शहरों के बीच आवागमन पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक और तेज हो जाएगा।
पर्यटन, व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का असर सिर्फ यात्रा पर नहीं पड़ेगा। तिरुपति और तिरुमाला आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का समय कम हो जाएगा, जिससे उनका पूरा अनुभव और बेहतर बनेगा। इसके अलावा, इस नेटवर्क से औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार और पर्यटन सभी क्षेत्रों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी की वजह से निवेश बढ़ेगा और दक्षिण भारत के इन इलाकों में आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी।
सर्वे और डीपीआर जल्द तैयार करने के निर्देश
परियोजना को समय पर आगे बढ़ाने के लिए अधिकारियों को सर्वे और डीपीआर जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जमीन अधिग्रहण और तकनीकी मंजूरी से जुड़े सभी काम तय समय पर पूरे हों। रिपोर्ट मिलने के बाद अगले चरण की मंजूरी और निर्माण कार्य का रास्ता खुलेगा। इस पूरी परियोजना का मकसद आंध्र प्रदेश में एक आधुनिक और उन्नत परिवहन ढांचा तैयार करना है, जो दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों को एक सूत्र में पिरोए और आंध्र प्रदेश को पूरे नेटवर्क के केंद्र के रूप में स्थापित करे।













