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सांकेतिक किराए पर जमीन देना क्या उचित है? ईशा फाउंडेशन वाले लीज सौदे पर बिहार में राजनीतिक उबालबिहार
26 जून 2026, 4:05 pm (46 दिन पहले)· 5

सांकेतिक किराए पर जमीन देना क्या उचित है? ईशा फाउंडेशन वाले लीज सौदे पर बिहार में राजनीतिक उबाल

बिहार सरकार ने मुंगेर के तेलडीहा में ईशा फाउंडेशन को 99 साल के लिए करीब 15 एकड़ जमीन मात्र 1 रुपये प्रति एकड़ सालाना दर पर लीज पर देने का फैसला किया है. इस फैसले पर आरजेडी ने तीखा विरोध जताते हुए इसे सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग बताया है.

बिहार सरकार ने मुंगेर जिले के तेलडीहा इलाके में स्थित करीब 15 एकड़ सरकारी जमीन ईशा फाउंडेशन को 99 साल की लीज पर देने का फैसला किया है. इस जमीन का सालाना किराया सिर्फ 1 रुपये प्रति एकड़ रखा गया है, यानी यह पट्टा पूरी तरह प्रतीकात्मक शुल्क पर दिया जा रहा है. सरकार की दलील है कि इस परियोजना से मुंगेर क्षेत्र में पर्यटन, योग, आध्यात्मिक गतिविधियों और स्थानीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी. लेकिन इस एक फैसले ने बिहार की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है.

आरजेडी ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इस मुद्दे पर भाजपा-जदयू सरकार को सीधे निशाने पर लिया है. पार्टी का आरोप है कि सरकार राज्य की सार्वजनिक संपत्ति को एक निजी संस्था के हाथ सौंप रही है और इससे बिहार के हित प्रभावित होंगे. आरजेडी ने पूछा कि सरकार ने जिस जमीन को हासिल करने में करोड़ों रुपये खर्च किए, उसे इतनी मामूली दर पर एक निजी संस्था को देने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी.

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पार्टी ने यह भी कहा कि बिहार जैसे घनी आबादी वाले राज्य में जमीन एक बेहद अहम और सीमित संसाधन है. ऐसे में इस तरह के बड़े फैसले लेने से पहले व्यापक सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए. आरजेडी का यह भी कहना है कि राज्य की संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी साफ दिख रही है और इस पर सरकार को जवाब देना होगा.

बिहार योग विद्यालय को नजरअंदाज क्यों?

आरजेडी ने अपने बयान में एक और अहम बात उठाई. पार्टी ने याद दिलाया कि मुंगेर शहर योग की दुनिया में अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता है और यहां का बिहार योग विद्यालय पूरी दुनिया में एक प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में जाना जाता है. पार्टी का सवाल है कि अगर सरकार वाकई योग और पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है, तो मुंगेर में पहले से मौजूद इन संस्थानों और स्थानीय विरासत के विकास पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया. नई निजी परियोजना लाने के बजाय पुरानी पहचान को और मजबूत करना अधिक तर्कसंगत होता.

सरकार का रुख और बढ़ता राजनीतिक दबाव

सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया जा चुका है कि ईशा फाउंडेशन की यह परियोजना तेलडीहा और आसपास के इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देगी, नए रोजगार के अवसर पैदा करेगी और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को मजबूती देगी. सरकार का दावा है कि यह फैसला सार्वजनिक हित को सामने रखकर लिया गया है और इसमें कोई अनियमितता नहीं है.

आरजेडी ने भाजपा और जदयू पर आरोप लगाया है कि ये दोनों दल मिलकर राज्य की संपत्तियां निजी संस्थाओं को सौंपने का काम कर रहे हैं. पार्टी ने इस पूरे मामले को बिहार के संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ा एक गंभीर मामला बताया है और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है. फिलहाल एक तरफ सरकार इस लीज सौदे को विकास और पर्यटन की दिशा में सकारात्मक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे जनता की संपत्ति के गलत इस्तेमाल का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाए हुए है. बिहार में इस विवाद पर राजनीतिक तनाव अभी जारी है.

सवाल-जवाब

ईशा फाउंडेशन को बिहार में कितनी जमीन और किस दर पर लीज पर दी जा रही है?
मुंगेर जिले के तेलडीहा में करीब 15 एकड़ सरकारी जमीन 1 रुपये प्रति एकड़ सालाना की प्रतीकात्मक दर पर लीज पर दी जा रही है.
इस लीज की अवधि कितनी है?
यह पट्टा 99 साल के लिए दिया जा रहा है.
बिहार सरकार ने इस परियोजना का क्या उद्देश्य बताया है?
सरकार का कहना है कि इस परियोजना से पर्यटन, योग, आध्यात्मिक गतिविधियां और स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.
आरजेडी ने इस फैसले पर क्या आपत्ति जताई है?
आरजेडी का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च कर अर्जित सार्वजनिक भूमि को एक निजी संस्था को प्रतीकात्मक दर पर देना राज्य की संपत्ति का दुरुपयोग है.
आरजेडी ने बिहार योग विद्यालय का जिक्र क्यों किया?
आरजेडी ने कहा कि मुंगेर में पहले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय मौजूद है, इसलिए सरकार को नई निजी परियोजना लाने के बजाय उसे और मजबूत करना चाहिए था.
आरजेडी ने सरकार से क्या मांग की है?
आरजेडी ने इस लीज फैसले पर पुनर्विचार करने और राज्य की संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने की मांग की है.
क्या सरकार ने इस फैसले का बचाव किया है?
हां, सरकार का कहना है कि यह फैसला सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर लिया गया है और इससे रोजगार व पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.
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