देशभर के कई राज्यों में इस समय मूसलाधार बारिश ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। लगातार हो रही वर्षा के चलते कहीं बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, तो कहीं भूस्खलन ने रास्तों को बाधित कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग ने अनेक राज्यों के लिए चेतावनी जारी की है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में मानसून के धीमा पड़ने के संकेत भी मिल रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में अभी भी बारिश को लेकर सतर्कता बरती जा रही है, और पहाड़ी राज्यों में विशेष रूप से लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
दिल्ली-एनसीआर में अभी और बरसेगा पानी
दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में फिलहाल बारिश से राहत मिलने की उम्मीद कम है। मौसम विभाग ने 11 जुलाई के लिए दिल्ली-एनसीआर में येलो अलर्ट जारी किया है। शनिवार के दिन भी कुछ हिस्सों में तेज आंधी के साथ भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि हवाओं की गति 75 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। बारिश के कारण उमस में भी बढ़ोतरी होगी। शहर का अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश के लिए ऑरेंज अलर्ट
उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता काफी तेज हो गई है। लखनऊ स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 11 जुलाई तक राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। पिछले 24 घंटों का रिकॉर्ड देखें तो मेरठ के मवाना में सबसे अधिक 315 मिमी बारिश हुई, जबकि मुजफ्फरनगर के जानसठ में 270.1 मिमी पानी दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश में बारिश संबंधी घटनाओं में शुक्रवार को दो लोगों की मृत्यु होने की सूचना है।
राजस्थान में मानसून के तेवर ढीले
दूसरी ओर, राजस्थान के लिए मौसम विभाग का आकलन कुछ राहत भरा है। शुक्रवार से राज्य में मानसून के कमजोर पड़ने का अनुमान लगाया गया है, जिससे भारी बारिश के इस दौर में विराम लग सकता है। 10 और 11 जुलाई से मानसून की स्थिति कमजोर होने की संभावना है, जो लगभग एक सप्ताह तक बनी रह सकती है। इस अवधि के दौरान राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा और केवल इक्का-दुक्का स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है।
पश्चिम बंगाल में जनजीवन पर असर
पश्चिम बंगाल में भी शुक्रवार को व्यापक बारिश दर्ज की गई। कोलकाता शहर पूरी तरह बारिश से सराबोर रहा, जिसके कारण दफ्तर और स्कूल जाने वाले लोगों को भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा।
उत्तराखंड के 7 जिलों में अलर्ट
उत्तराखंड के लिए पिछले 24 घंटे चुनौतीपूर्ण रहे हैं। भारी वर्षा के चलते पूरे राज्य में 118 सड़कें बंद हो चुकी हैं और भूस्खलन की घटनाएं आम हैं। शनिवार 11 जुलाई के लिए देहरादून, पौड़ी, पिथौरागढ़, उधम सिंह नगर, चंपावत, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। उत्तरकाशी में यमुनोत्री नेशनल हाईवे का 100 मीटर हिस्सा भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गया है। गंगा, यमुना और अन्य सहायक नदियों का जलस्तर भी लगातार बारिश के कारण बढ़ गया है।
जम्मू-कश्मीर में जलभराव और भूस्खलन
जम्मू-कश्मीर में 11 और 12 जुलाई के लिए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। पुंछ जिले के मेंढर सब-डिविजन में शुक्रवार को हुई भारी बारिश से कई इलाके जलमग्न हो गए। कुछ मकानों को नुकसान पहुंचने के साथ ही दर्जनों लोग पानी में घिर गए थे, जिन्हें पुलिस और स्थानीय लोगों ने बचाव अभियान चलाकर सुरक्षित निकाला। कुल 25 लोगों को बचा लिया गया है। प्रशासन ने नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है।
हिमाचल प्रदेश की स्थिति
हिमाचल प्रदेश के छह जिलों, जिनमें कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, शिमला, सोलन और सिरमौर शामिल हैं, के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। पिछले कुछ दिनों की भारी बारिश ने यहां आधारभूत ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है। सड़कें अवरुद्ध हैं, पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं और पेड़ गिरने की कई घटनाएं हुई हैं। शिमला में 27 लिंक रोड बंद होने से आवाजाही प्रभावित रही है। कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर वाकनाघाट और कंडाघाट के बीच, तथा धर्मपुर और चक्की मोड़ के बीच पत्थर गिरने के कारण मार्ग बाधित हुआ है। किन्नौर जिले में सांगला पुल पर भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
पूर्वोत्तर राज्यों के लिए पूर्वानुमान
मौसम विभाग ने 10 से 16 जुलाई के बीच पूर्वोत्तर के राज्यों, जिनमें अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा शामिल हैं, में व्यापक वर्षा का अनुमान जताया है। साथ ही विभाग ने संकेत दिए हैं कि अगले 6-7 दिनों में मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कम रह सकती हैं।











