गणेश उत्सव के दौरान खैराताबाद के विशाल गणपति के लिए प्रसिद्ध हैदराबाद शहर अब नवरात्रि के अवसर पर भी एक अनूठी मिसाल कायम करने जा रहा है। शहर के चदरघाट इलाके में स्थित विक्टोरिया प्लेग्राउंड में इस बार शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की 72 फीट से भी अधिक ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की जा रही है। धार्मिक आस्था और प्रकृति प्रेम का यह अनूठा संगम पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल तौर-तरीकों से तैयार किया जा रहा है, जो उत्सवों के दौरान बढ़ते प्रदूषण के दौर में पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा संदेश देता है।
प्राकृतिक सामग्री और इको-फ्रेंडली निर्माण की अनूठी मिसाल
आयोजन समिति की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस भव्य प्रतिमा की कुल ऊंचाई 72 फीट से ज्यादा रखी गई है। इसे प्राकृतिक घास और शुद्ध चिकनी मिट्टी से तैयार की जाने वाली देश की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में गिना जा रहा है। इससे पहले भी इसी मैदान पर 65 से लेकर 72 फीट ऊंची विशाल प्रतिमाएं बनाई जा चुकी हैं, जिनके नाम रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो चुके हैं। इस पूरे निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण खासियत यह है कि इसमें प्लास्टर ऑफ पेरिस का कतई इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसके साथ ही थर्माकोल या किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल वाले रंगों से पूरी तरह दूरी बनाई गई है ताकि प्रकृति को कोई नुकसान न पहुंचे।
कोलकाता और स्थानीय कारीगरों का दिन-रात समर्पण
मां दुर्गा के इस दिव्य और विराट स्वरूप को गढ़ने के लिए पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से आए विशेषज्ञ मूर्तिकार और स्थानीय स्तर के कुशल कारीगर लगातार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। प्रतिमा को बेहद सुरक्षित और दृढ़ आधार देने के उद्देश्य से सबसे पहले बांस और मजबूत लकड़ी का ढांचा तैयार किया गया है। इस मुख्य ढांचे के ऊपर प्राकृतिक घास बांधी जा रही है और फिर शुद्ध चिकनी मिट्टी की कई परतें बहुत ही बारीकी के साथ चढ़ाई जा रही हैं। पूरी प्रतिमा के अच्छी तरह सूखने के बाद उस पर केवल पानी में घुलनशील और प्राकृतिक रंगों से रंग-रोगन किया जाएगा। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि विसर्जन के दौरान नदियों, झीलों या अन्य जलस्रोतों के जलीय जीवन और पानी की गुणवत्ता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
वॉटरप्रूफ पंडाल और कड़े सुरक्षा इंतजाम
शारदीय नवरात्रि के उत्सव में अब बेहद कम दिन बचे हैं, जिसके चलते निर्माण कार्य तेजी से अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। चदरघाट के विक्टोरिया प्लेग्राउंड में किसी भी प्रकार की मौसमी रुकावट या अचानक होने वाली बारिश से बचने के लिए एक विशाल वॉटरप्रूफ पंडाल खड़ा किया जा रहा है। दर्शनार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जा रही है ताकि लाखों श्रद्धालुओं की लंबी कतारों को सुचारू रूप से नियंत्रित किया जा सके। आयोजन से जुड़े सदस्य स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय बनाकर सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त सुनिश्चित कर रहे हैं ताकि आयोजन स्थल पर हर आगंतुक सुरक्षित और सहज महसूस करे।
तेलंगाना और पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं का बड़ा केंद्र
आयोजन से जुड़े लोगों का मानना है कि जिस प्रकार खैराताबाद के विशालकाय गणपति के दर्शन के लिए देश भर से लाखों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं, उसी तरह चदरघाट की यह विशाल इको-फ्रेंडली प्रतिमा भी आकर्षण का मुख्य केंद्र बनेगी। न केवल तेलंगाना बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यहां आने की पूरी संभावना है। परंपरा के निर्वहन के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की यह दूरदर्शी पहल समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश करती है।
















