जौनपुर में खत्म हुई ब्रिटिश काल की पुरानी प्रथा, अब रात में भी हो सकेगा हादसों का शिकार हुए लोगों का पोस्टमार्टमभारत
1 दिन पहले· 2

जौनपुर में खत्म हुई ब्रिटिश काल की पुरानी प्रथा, अब रात में भी हो सकेगा हादसों का शिकार हुए लोगों का पोस्टमार्टम

उत्तरप्रदेश के जौनपुर में स्वास्थ्य विभाग ने अंग्रेजों के समय से चली आ रही पोस्टमार्टम व्यवस्था को बदल दिया है, जिससे अब रात में भी शवों का पोस्टमार्टम किया जा सकेगा।

उत्तरप्रदेश के जौनपुर जिले के स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लेते हुए सालों पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव किया है। अब जिले में दुर्घटनाओं का शिकार होने वाले लोगों के शवों का पोस्टमार्टम रात के समय भी किया जा सकेगा। इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब मृतकों के परिजनों को अपने प्रियजनों के शव के पोस्टमार्टम के लिए अगली सुबह तक का लंबा और दर्दनाक इंतजार नहीं करना होगा। यह कदम उस ब्रिटिशकालीन जटिल नियम को समाप्त करता है जो दशकों से आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ था।

औपनिवेशिक काल के पुराने नियम से मिली मुक्ति

आमतौर पर यह देखा जाता था कि शाम ढलने या रात के समय होने वाले सड़क हादसों या अन्य प्रकार की अनहोनी में जान गंवाने वाले लोगों के शवों का पोस्टमार्टम उसी दिन नहीं हो पाता था। यह पाबंदी अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही एक व्यवस्था का हिस्सा थी, जिसके तहत सूर्यास्त के बाद शवों का परीक्षण करने पर पूरी तरह से रोक थी। इस नियम के कारण अपनों को खोने वाले शोकाकुल परिवारों को पूरी-पूरी रात मोर्चरी के बाहर बैठकर काटनी पड़ती थी। इस दौरान परिजनों को अत्यधिक मानसिक प्रताड़ना और भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

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इस पुरानी व्यवस्था को खत्म करने के लिए स्थानीय स्तर पर लंबे समय से बदलाव की उम्मीद की जा रही थी, क्योंकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग हादसे के बाद शवों को लेकर रातभर परेशान होते थे। जौनपुर प्रशासन ने इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अब इस पुरानी और रूढ़िवादी व्यवस्था को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है।

CMO स्तर से तत्काल मिलेगी मंजूरी

जौनपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गंगाराम गौतम ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग अब पीड़ितों और उनके तीमारदारों की सहायता के लिए हर समय तैयार है। नई व्यवस्था के तहत रात के समय भी पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को बिना किसी व्यवधान के पूरा किया जाएगा। जैसे ही रात के समय कोई दुर्घटना का मामला स्वास्थ्य विभाग के सामने आएगा, CMO स्तर से तुरंत पोस्टमार्टम की अनुमति जारी कर दी जाएगी।

दिन के समय ड्यूटी करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों और सहायक स्टाफ की टीम ही इस पूरी व्यवस्था को बिना किसी अड़चन के सुचारू रूप से संचालित करेगी। डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों की टीम को इसके लिए विशेष निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि रात में भी आपातकालीन परिस्थितियों में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके और स्टाफ की उपलब्धता हमेशा बनी रहे।

परिजनों को मानसिक कष्ट से मिलेगी राहत

इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद अब जौनपुर के स्थानीय निवासियों को कानूनी और चिकित्सीय औपचारिकताओं के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा। अंग्रेजों के जमाने की इस पुरानी व्यवस्था में बदलाव होने से न सिर्फ मृतकों के परिवारों को सही समय पर उनके प्रियजनों का शव मिल सकेगा, बल्कि वे बिना किसी देरी के समय रहते उनका अंतिम संस्कार भी कर सकेंगे। दुख की इस घड़ी में शव के लिए अस्पताल में रातभर इंतजार करना परिजनों की मानसिक पीड़ा को दोगुना कर देता था, जिससे अब उन्हें हमेशा के लिए राहत मिल जाएगी।

सवाल-जवाब

जौनपुर में पोस्टमार्टम नियमों में क्या बड़ा बदलाव किया गया है?
जौनपुर में अब सड़क हादसों या अन्य दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के शवों का पोस्टमार्टम रात के समय भी किया जा सकेगा।
पहले रात में पोस्टमार्टम क्यों नहीं किया जाता था?
पहले ब्रिटिश काल से चली आ रही एक पुरानी व्यवस्था लागू थी, जिसके तहत सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध था।
रात में पोस्टमार्टम कराने की मंजूरी कौन देगा और इसकी क्या प्रक्रिया है?
रात के समय मामला आते ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) स्तर से तत्काल पोस्टमार्टम की अनुमति जारी की जाएगी।
इस नई व्यवस्था को संचालित करने के लिए किस स्टाफ की तैनाती की जाएगी?
दिन के समय कार्य करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों और सहायक स्टाफ की टीम ही इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करेगी।
इस बदलाव से आम जनता और पीड़ित परिवारों को क्या लाभ होगा?
इससे परिजनों को मोर्चरी के बाहर पूरी रात इंतजार करने की मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति मिलेगी और वे अपने प्रियजनों का समय पर अंतिम संस्कार कर सकेंगे।

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