गुरुग्राम के सुशांत लोक इलाके में हाल ही में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए दीपक नांदल गैंग के चार शूटरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है। मेडिकल बोर्ड द्वारा शुक्रवार दोपहर बाद की गई जांच के अनुसार, चारों बदमाशों के शरीर पर कुल 21 गोलियां लगी थीं। पोस्टमार्टम से पूर्व सभी शवों का एक्सरे भी करवाया गया। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शव से कोई गोली बरामद नहीं हुई है, क्योंकि सभी गोलियां शरीर के आर-पार हो गई थीं। इन गोलियों के निशान सिर, गले, सीने, पेट, पैरों और हाथों पर पाए गए हैं।
पोस्टमार्टम बोर्ड का विवरण
इस पूरी प्रक्रिया के लिए डॉ. दीपक माथुर और डॉ. ललित चोपड़ा के नेतृत्व में दो अलग-अलग मेडिकल बोर्ड गठित किए गए थे। प्रत्येक बोर्ड ने दो-दो शवों का पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट के अनुसार, अंकित नाम के बदमाश को सबसे अधिक गोलियां लगीं, जिसकी संख्या सात है; ये गोलियां उसके गले, सीने, पेट और पैरों में धंसी थीं। संदीप को चार गोलियां लगीं, जो उसके सीने, गले, बाएं हाथ और बाएं जांघ में पाई गईं। वहीं, आर्यन और नितिन के शरीर पर छह-छह गोलियां मिलीं, जो उनके सिर, सीने, पेट और जांघों के हिस्सों में लगी थीं।
घटनाक्रम और पुलिसिया कार्रवाई
यह मुठभेड़ 9 जुलाई की रात को गुरुग्राम के सुशांत लोक में हुई थी। गुरुग्राम पुलिस और गैंगस्टर दीपक नांदल के गुर्गों के बीच हुई इस गोलीबारी में चार बदमाशों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक घायल बदमाश अभी भी उपचार के अधीन है। पुलिस की इस कार्यवाही पर अब मारे गए युवकों के परिवारों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों के दावे और अंकित का मामला
अंकित के पिता अनिल ने बताया कि वे एको कंपनी में एक ठेकेदार के साथ काम करते हैं। चार बहनों के बीच इकलौता भाई अंकित बुधवार को घर से कांवड़ लेने जाने की बात कहकर निकला था। पिता के अनुसार, 17 वर्षीय अंकित ने आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। परिवार को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि वह गुरुग्राम तक कैसे पहुंचा। उन्हें घटना की जानकारी शुक्रवार को गांव के चौकीदार से मिली।
आर्यन और नितिन के परिजनों का पक्ष
आर्यन के पिता प्रदीप ने जानकारी दी कि उनका बेटा 11वीं कक्षा का छात्र था और पिछले दो वर्षों से जैवलिन थ्रो का अभ्यास कर रहा था। बुधवार को वह प्रैक्टिस के बाद घर लौटा और बाइक ठीक कराने के नाम पर नितिन के पास गया, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटा। आर्यन का फोन बंद आने पर परिवार ने गुमशुदगी दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। आर्यन का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। दूसरी ओर, नितिन के पिता संजय ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके बेटे को पहले भी झूठे मामलों में फंसाया था। नितिन करीब पांच महीने पहले ही हाईकोर्ट से जमानत पर जेल से बाहर आया था और चार महीने से बाइक रिपेयरिंग की दुकान पर काम कर रहा था। परिजनों का कहना है कि पुलिस को उन गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो युवाओं को गुमराह कर रहे हैं।











