ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी वायुसेना को मॉडर्न बनाने की रफ्तार तेज कर दी है, और इसी कोशिश के बीच विदेशी रक्षा कंपनियों के बीच भारतीय आसमान का सौदा हासिल करने की होड़ छिड़ गई है. सबसे नया दांव स्वीडन की रक्षा और एयरोस्पेस कंपनी Saab ने चला है, जिसने अपने अत्याधुनिक Gripen E लड़ाकू विमान को सिर्फ बेचने का नहीं, बल्कि पूरी तकनीक भारत को सौंपने का प्रस्ताव रखा है. उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक यह स्वीडिश कंपनी इस सिलसिले में भारत से लगातार बातचीत कर रही है.
भारत को इस वक्त नए फाइटर जेट की जरूरत क्यों
भारत एक साथ कई मोर्चों पर अपनी हवाई ताकत को नया रूप दे रहा है. देसी टेक्नोलॉजी से पांचवीं और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान तैयार करने के लिए AMCA प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. वहीं फौरी जरूरतों को देखते हुए फ्रांस से 114 Rafale फाइटर जेट खरीदने की तैयारी चल रही है. इसके अलावा स्टील्थ फाइटर के मामले में जो खाई बनी हुई है, उसे पाटने पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है. मकसद यह है कि जब तक AMCA के तहत स्वदेशी विमान तैयार न हो जाएं, तब तक भारत के पास पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के कम से कम दो से तीन स्क्वाड्रन मौजूद रहें.
तीन देश, तीन पेशकश
इस गैप को भरने के लिए रूस ने अपना पांचवीं पीढ़ी का Su-57 स्टील्थ फाइटर देने का प्रस्ताव दिया है. खास बात यह है कि रूस को-प्रोडक्शन के साथ-साथ सोर्स कोड साझा करने को भी तैयार है. इसके उलट फ्रांस अब तक Rafale का सोर्स कोड साझा करने पर राजी नहीं हुआ है. ऐसे में स्वीडन की एंट्री मायने रखती है. Saab ने एक बार फिर Gripen E को मजबूती से सामने रखा है और कंपनी का कहना है कि वह सिर्फ विमान नहीं, बल्कि पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण के साथ-साथ भारत में उत्पादन, रखरखाव, डिजाइन और अपग्रेड तक की व्यापक सुविधा देने को तैयार है. दिलचस्प यह है कि सोर्स कोड साझा करने का प्रस्ताव रूस और स्वीडन, दोनों ओर से आया है, जिससे Gripen E और Su-57 के बीच रणनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं.
Rafale: 4.5वीं पीढ़ी का ओम्नीरोल योद्धा
फ्रांस में बना Rafale एक ट्विन-इंजन 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी ओम्नीरोल क्षमता है, यानी यह एक ही मिशन के दौरान एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड और टोही जैसे कई काम एक साथ अंजाम दे सकता है.
इंजन और रफ्तार के मामले में इसमें दो Snecma M88 टर्बोफैन इंजन लगे हैं. यह विमान अधिकतम Mach 1.8 यानी करीब 1,900 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ सकता है और 50,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है.
हथियार ढोने की इसकी क्षमता भी बेजोड़ है. Rafale 9.5 टन तक बाहरी हथियार और पेलोड लेकर उड़ सकता है. इसके 14 हार्डपॉइंट्स पर तरह-तरह की मिसाइलें और बम लगाए जा सकते हैं, जिनमें Meteor, MICA, SCALP क्रूज मिसाइल और HAMMER गाइडेड बम शामिल हैं.
सेंसर और सुरक्षा के मोर्चे पर इसमें Thales RBE2 AESA रडार लगा है, जो लंबी दूरी से एक साथ कई निशानों को ट्रैक करने में सक्षम है. इसके साथ SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम दुश्मन के रडार और मिसाइल खतरों को पहचानकर उनसे बचने में मदद करता है. इसमें 30 मिमी की GIAT 30 कैनन भी लगी है, और Front Sector Optronics (FSO/OSF) इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक सिस्टम बिना रडार चलाए ही दुश्मन के विमानों को पकड़ने और उन पर नजर रखने की ताकत देता है.
Gripen E: हल्का, फुर्तीला और हर मिशन के लिए तैयार
Saab का बनाया JAS 39 Gripen एक हल्का, सिंगल-इंजन मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड और टोही (Reconnaissance) मिशनों को पूरा करने में माहिर है.
रफ्तार और रेंज के मामले में Gripen E दमदार है. इसमें जनरल इलेक्ट्रिक का F414G टर्बोफैन इंजन लगा है, जो 98 kN तक का थ्रस्ट पैदा करता है. यह विमान अधिकतम मैक-2 यानी करीब 2,450 किमी/घंटा की रफ्तार तक पहुंच सकता है और इसकी फेरी रेंज करीब 4,000 किमी है.
इसकी एक बड़ी खूबी यह है कि यह छोटे और सीमित सुविधाओं वाले रनवे से भी उड़ान भर और उतर सकता है. साथ ही इसका टर्नअराउंड टाइम बहुत कम है, जिसकी वजह से युद्ध की परिस्थितियों में इसे बेहद तेजी से दोबारा मैदान में उतारा जा सकता है.
हथियारों के मामले में Gripen E में 10 हार्डपॉइंट्स हैं, जिन पर 7,200 किलोग्राम तक हथियार और दूसरा पेलोड ले जाया जा सकता है. यह Meteor बीवीआर (Beyond Visual Range) मिसाइल, IRIS-T शॉर्ट-रेंज मिसाइल और 27 मिमी Mauser BK27 कैनन से लैस है.
सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिहाज से इसमें ES-05 AESA रडार, आधुनिक IRST (Infrared Search and Track) सिस्टम और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट दिया गया है. ये सिस्टम दुश्मन के विमानों की पहचान, उनकी ट्रैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक खतरों से बचाव में अहम भूमिका निभाते हैं.
Saab का असली ऑफर क्या है
‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, Saab के अधिकारियों का कहना है कि Gripen E दुनिया के सबसे आधुनिक सिंगल इंजन मल्टीरोल लड़ाकू विमानों में गिना जाता है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित क्षमताएं, आधुनिक एवियोनिक्स, एडवांस सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और नेटवर्क सेंट्रिक वॉर ऑपरेशन जैसी खूबियां मौजूद हैं. कंपनी का दावा है कि कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के तीन साल के भीतर पहला विमान भारत को सौंपा जा सकता है.
हालांकि यह समझना जरूरी है कि Gripen E और Su-57 एक ही कैटेगरी के विमान नहीं हैं. Gripen E जहां 4.5 पीढ़ी का हल्का और अपेक्षाकृत कम लागत वाला विकल्प है, वहीं Su-57 पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर है, जिससे दोनों की भूमिका और उनका दायरा एक-दूसरे से अलग बैठता है.













