बिहार में साल 2024 में हुई बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को एक और अहम कड़ी हाथ लगी है। पकड़ा गया शख्स सीलबंद बक्सों को बिना सील तोड़े खोलने और फिर उन्हें दोबारा उसी तरह पैक करने में माहिर बताया जा रहा है। इस आरोपी की पहचान डॉक्टर मनीष के रूप में हुई है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
पेशे से डॉक्टर, चढ़ गया पेपर लीक का चस्का
डॉक्टर मनीष एनएमसीएच पटना से 2021 बैच का एमबीबीएस पास डॉक्टर है। उसे कैमूर के एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की नौकरी मिली हुई थी, लेकिन पेपर लीक के धंधे में ऐसा रम गया कि उसने वह नौकरी छोड़ दी और पटना में रहकर नीट पीजी की तैयारी करने लगा। जांच में यह भी सामने आया कि वह नीट पेपर लीक कांड के मास्टरमाइंड संजीव मुखिया के बेटे डॉक्टर शिव का करीबी दोस्त है। यही दोस्ती उसे बीपीएससी पेपर लीक गिरोह तक ले गई।
हजारीबाग के होटल में पहुंचाए गए 30 छात्र, हर पेपर के 50 हजार रुपये
पुलिस के मुताबिक डॉक्टर मनीष पर आरोप है कि उसने 2024 में परीक्षा से ठीक पहले पटना से 30 छात्रों को हजारीबाग के एक होटल में पहुंचाया था। वहीं उन छात्रों को प्रश्नपत्र मुहैया कराए गए। इस पूरे खेल में हर प्रश्नपत्र के बदले 50 हजार रुपये वसूले गए थे।
अब तक 296 गिरफ्तार, 15 मुख्य आरोपी अब भी फरार
बीपीएससी शिक्षक भर्ती पेपर लीक मामले में बिहार पुलिस अब तक 296 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि 15 मुख्य आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। जांच में पता चला है कि डॉक्टर मनीष ने डॉक्टर शिव और डॉक्टर शुभम के साथ मिलकर पूरे पेपर लीक कांड को अंजाम दिया था। ये तीनों मिलकर एक संगठित तरीके से काम करते थे, जहां हर किसी की अलग जिम्मेदारी तय थी।
सील को छुए बिना नीचे से खोला बक्सा
जांच में सामने आया कि टीआरई-3 परीक्षा के दौरान इस गिरोह ने नगरनौसा के एक हाईवे किनारे स्थित होटल पर प्रश्नपत्र लेकर जा रही पिकअप गाड़ी को रुकवाया था। इसके बाद अत्याधुनिक औजारों की मदद से बक्से को नीचे की तरफ से इस तरह खोला गया कि ऊपर लगी सील को हल्की सी आंच भी नहीं पहुंची। बक्सा खोलते ही प्रश्नपत्रों की तस्वीरें खींची गईं और फिर बक्से को उसी सफाई से वापस पैक कर दिया गया, जिससे परीक्षा केंद्र तक पहुंचने पर किसी अधिकारी को शक तक नहीं हुआ। पेपर लीक की यह साजिश काफी बाद में जाकर उजागर हो पाई।
सीलबंद बक्से खोलने में माहिर पुरानी तिकड़ी
जांच एजेंसियों का कहना है कि डॉक्टर शिव, डॉक्टर शुभम और डॉक्टर मनीष की यह तिकड़ी पेपर लीक की दुनिया में कोई नई खिलाड़ी नहीं है, बल्कि काफी समय से इस धंधे में सक्रिय है। इन तीनों की खासियत यही है कि ये प्रश्नपत्रों वाले सीलबंद बक्सों को बिना किसी नुकसान के खोल लेते हैं, जिससे पकड़े जाने का खतरा काफी कम हो जाता है। डॉक्टर मनीष मूल रूप से जहानाबाद जिले के नेहालपुर गांव का रहने वाला है और एनएमसीएच के 2021 बैच का छात्र रह चुका है।
मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज से खुली पोल
आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू ने जब पीएमसीएच और एनएमसीएच के छात्रों का डेटा खंगालना शुरू किया, तो इसी दौरान डॉक्टर मनीष का मोबाइल नंबर सामने आया। जांच एजेंसी ने उसकी लोकेशन ट्रैक की तो वह डॉक्टर शिव के फ्लैट के साथ-साथ हजारीबाग के उसी होटल में भी मिली, जहां छात्रों को प्रश्नपत्र दिए गए थे। कोहिनूर होटल के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर डॉक्टर मनीष की मौजूदगी की पुष्टि हो गई। पूछताछ में शुरुआत में उसने अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब उसके सामने सबूत रखे गए तो वह टूट गया और सच उगल दिया। फिलहाल उसके बैंक खातों की जांच की जा रही है और अपराध से कमाई गई उसकी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
बिहार से पहले भी जुड़ चुके हैं नीट पेपर लीक के तार
इससे पहले भी बिहार से नीट पेपर लीक के तार जुड़ने की बात सामने आई थी, जब एक अलग मामले में बैग से नोटों के बंडल और फर्जी एडमिट कार्ड बरामद हुए थे और नालंदा से तीन सॉल्वरों को गिरफ्तार किया गया था।



















