कारगिल युद्ध के अमर शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के बलिदान दिवस पर अरविंद केजरीवाल (@ArvindKejriwal) ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक भावुक पोस्ट लिखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। इस पोस्ट के सामने आते ही यूजर्स की तरफ से तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं।
पोस्ट में क्या कहा गया
अरविंद केजरीवाल ने अपनी पोस्ट में कैप्टन विक्रम बत्रा को कारगिल युद्ध का ऐसा जांबाज बताया जिनका नाम सुनते ही दुश्मन थर-थर कांपने लगता था। उन्होंने लिखा कि अदम्य साहस और वीरता की मिसाल रहे कैप्टन विक्रम बत्रा को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था और उनके बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन है। यह पोस्ट सीधे तौर पर देश के इस वीर सपूत के प्रति सम्मान जताने के मकसद से लिखी गई नजर आती है।
कौन थे विक्रम बत्रा
कैप्टन विक्रम बत्रा भारतीय सेना के एक अधिकारी थे, जिन्होंने कारगिल युद्ध में अभूतपूर्व वीरता दिखाते हुए वीरगति प्राप्त की थी। उनकी बहादुरी को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत भारत के सबसे बड़े वीरता सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया था, जो देश के सैन्य इतिहास में सबसे ऊंचे दर्जे का सम्मान माना जाता है। खबरों के मुताबिक कारगिल युद्ध के दौरान उनका कोड नेम शेरशाह रखा गया था और उनकी बहादुरी की कहानियां आज भी देशभर में सुनाई जाती हैं। कारगिल विजय दिवस के मौकों पर आज भी कैप्टन विक्रम बत्रा को उन चंद वीरों में गिना जाता है, जिनके साहस ने पूरे युद्ध की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
कारगिल युद्ध और बलिदान दिवस का महत्व
कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच लद्दाख के कारगिल इलाके की ऊंची और दुर्गम चोटियों पर लड़ा गया था, जहां भारतीय सेना के जवानों को हजारों फीट की ऊंचाई पर विषम हालात में दुश्मन का सामना करना पड़ा था। इस युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा जैसे कई जांबाजों ने अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सरहदों की रक्षा की। यही वजह है कि हर साल कारगिल विजय दिवस और शहीदों के बलिदान दिवस पर देशभर में उन्हें याद किया जाता है और नेता, सेना के अधिकारी व आम नागरिक सोशल मीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
अरविंद केजरीवाल की इस पोस्ट पर एक्स पर काफी संख्या में प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ यूजर्स ने शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा को श्रद्धांजलि देने के इस कदम का समर्थन करते हुए उनकी वीरता को याद किया, वहीं कई यूजर्स ने इसे लेकर सवाल भी उठाए। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि यह पोस्ट राजनीतिक फायदे के लिए लिखी गई है, तो कुछ ने अतीत में सेना से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछे जाने की बात दोहराते हुए तंज कसा। कुल मिलाकर पोस्ट पर समर्थन और आलोचना, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।



















