अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा है कि उसके लिए पूरा देश एक प्रयोगशाला बन गया है, और इसकी ताज़ा मिसाल के तौर पर उन्होंने E20 पेट्रोल को लागू किए जाने का ज़िक्र किया है।
गाड़ियां बंद, पुर्जे खराब, माइलेज कम
अपने हैंडल @ArvindKejriwal से किए गए पोस्ट में केजरीवाल ने लिखा कि इथेनॉल मिलाकर बनाया गया E20 पेट्रोल लोगों पर बिना उनकी सहमति के जबरदस्ती थोपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस इथेनॉल मिश्रण की वजह से लोगों की गाड़ियां बीच में ही बंद पड़ रही हैं, गाड़ियों के पुर्जे खराब हो रहे हैं और माइलेज सीधे तौर पर गिर रहा है। उनके मुताबिक बंद पड़ती गाड़ियों, खराब होते पुर्जों और घटते माइलेज की इस मार से लोगों में बहुत ज़्यादा गुस्सा है।
प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने का ऐलान
इसी पोस्ट में केजरीवाल ने ऐलान किया कि वे इस विषय पर प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने जा रहे हैं। उन्होंने पोस्ट में चिट्ठी की विस्तृत सामग्री का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन इस ऐलान से साफ है कि वे E20 पेट्रोल को लेकर अपनी शिकायत सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित न रखकर सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचाना चाहते हैं।
पोस्ट पर उमड़ीं ढेरों प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिक्रिया दी। कई यूज़र्स ने केजरीवाल की बातों से सहमति जताते हुए बताया कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी अपनी गाड़ियां भी खराब हुई हैं, माइलेज साफ तौर पर घटा है और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है। कई लोगों ने केजरीवाल से कहा कि वे प्रधानमंत्री को लिखी जाने वाली चिट्ठी में नरम नहीं बल्कि सख्त भाषा का इस्तेमाल करें, जिससे यूज़र्स की नाराज़गी का स्तर भी झलकता है। कुछ लोगों ने सीधा सवाल पूछा कि इथेनॉल मिले पेट्रोल की वजह से उनकी गाड़ियों को हुए नुकसान की भरपाई आखिर कौन करेगा। वहीं कुछ प्रतिक्रियाएं E20 पेट्रोल के मुद्दे से बिल्कुल अलग विषयों पर थीं, और कुछ यूज़र्स ने नीति पर बात करने की बजाय सीधे केजरीवाल पर ही तंज कसा।
जनता की प्रतिक्रिया
कुल मिलाकर देखा जाए तो इस पोस्ट पर आई प्रतिक्रियाओं का बड़ा हिस्सा केजरीवाल की शिकायत के पक्ष में झुका हुआ नज़र आया। बहुत से लोगों ने E20 पेट्रोल को लेकर उनके रुख का समर्थन किया और साथ ही अपनी गाड़ियों को हुए नुकसान, गिरते माइलेज और बढ़ते मरम्मत खर्च पर अपनी नाराज़गी भी जताई, कई ने प्रधानमंत्री को सख्त चिट्ठी लिखने की मांग की, जबकि एक छोटा हिस्सा या तो मुद्दे से इतर था या नीति की बजाय सीधे केजरीवाल को निशाना बनाने वाला था।





















