शिक्षक दिवस के मौके पर योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने संदेश में राधाकृष्णन को प्रखर शिक्षाविद, महान दार्शनिक और भारतीय ज्ञान-परंपरा का सशक्त संवाहक बताते हुए उन्हें नमन किया और साथ ही देशभर के गुरुजनों व प्रदेशवासियों को भी शुभकामनाएं दीं। हर साल की तरह इस बार भी उनकी जयंती के मौके पर देशभर में शिक्षकों के योगदान को याद किया जा रहा है।
पोस्ट में क्या लिखा
अपनी पोस्ट में योगी आदित्यनाथ ने लिखा, "प्रख्यात शिक्षाविद, महान दार्शनिक, भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रखर संवाहक, पूर्व राष्ट्रपति, 'भारत रत्न' डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।" इसके ठीक बाद उन्होंने उन सभी गुरुजनों को नमन किया, जो अपने ज्ञान, संस्कार और चरित्र की रोशनी से देश के भविष्य यानी विद्यार्थियों को गढ़ने का काम करते हैं। उनकी पोस्ट में शिक्षकों की भूमिका को राष्ट्र निर्माण से सीधे जोड़ा गया, जिसमें ज्ञान के साथ-साथ संस्कार और चरित्र निर्माण को भी उतना ही अहम बताया गया। पोस्ट के अंतिम हिस्से में उन्होंने प्रदेशवासियों और शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं भी दीं। इस पोस्ट के साथ एक लिंक भी संलग्न था, जो संभवत: किसी तस्वीर या वीडियो क्लिप से जुड़ा हुआ था।
कौन थे सर्वेपल्लि राधाकृष्णन
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के पहले उप-राष्ट्रपति रहे और इसके बाद वे देश के दूसरे राष्ट्रपति बने। उन्हें भारतीय संस्कृति का सजग वाहक, जाना-माना शिक्षाविद, गहरा दार्शनिक और आस्थावान हिंदू विचारक माना जाता है। शिक्षा और दर्शन के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए साल 1954 में भारत सरकार ने उन्हें देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया था। भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है और यह किसी भी क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाली शख्सियतों को दिया जाता है। उनका जन्मदिन यानी 5 सितंबर हर साल पूरे देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन स्कूल-कॉलेजों से लेकर सार्वजनिक जीवन तक, हर जगह शिक्षकों के योगदान और उनकी भूमिका को याद किया जाता है और उन्हें सम्मानित करने की परंपरा निभाई जाती है।
हर साल दोहराई जाती है यह परंपरा
डॉ. राधाकृष्णन की जयंती पर तमाम नेता, शिक्षाविद और आम नागरिक हर साल सोशल मीडिया पर उन्हें याद करते हैं और शिक्षकों के प्रति आभार जताते हैं। योगी आदित्यनाथ की यह पोस्ट भी इसी सालाना परंपरा की एक कड़ी है, जिसमें उन्होंने शिक्षा, संस्कार और चरित्र निर्माण में गुरुजनों की भूमिका को खास तौर पर रेखांकित किया। इस मौके पर डॉ. राधाकृष्णन के प्रेरक विचार और उद्धरण भी लोगों के बीच बड़े पैमाने पर साझा किए जाते हैं, जिनमें हार के डर पर काबू पाने और सफलता की राह दिखाने से जुड़ी बातें शामिल होती हैं। स्कूलों और कॉलेजों में भी इस दिन को खास अंदाज में मनाया जाता है, जहां विद्यार्थी सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भाषणों के जरिए अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान जताते हैं। कई जगहों पर विद्यार्थी खुद शिक्षक की भूमिका निभाकर कक्षाएं भी लेते हैं, ताकि वे शिक्षकों के काम और जिम्मेदारी को करीब से समझ सकें।
जनता की प्रतिक्रिया
योगी आदित्यनाथ की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। बड़ी संख्या में लोगों ने डॉ. राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि देने और शिक्षकों को शुभकामनाएं देने वाले इस संदेश की सराहना की तथा गुरुजनों के योगदान को याद किया। कुछ यूजर्स ने इसे राज्य में शिक्षा और सुरक्षित विकास से जोड़कर भी देखा। वहीं कुछ अन्य यूजर्स ने इसी पोस्ट के नीचे अपनी स्थानीय समस्याएं भी उठाईं, जिनमें बिजली बिल में गड़बड़ी और लंबे समय से रोजगार न मिलने जैसी शिकायतें शामिल थीं। इस तरह यह पोस्ट श्रद्धांजलि के साथ-साथ आम लोगों की आवाज उठाने का मंच भी बन गई।


























