राजनेता अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर एक पोस्ट करते हुए एक वृक्षारोपण अभियान पर तीखा तंज कसा है। अपने पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि करोड़ों पौधे लगाने के दावे वाले इस अभियान में हकीकत में सिर्फ एक पेड़ लगाया गया, वह भी मंच पर, जबकि बाकी सारे पेड़ सिर्फ कागज़ी फाइलों में ही लगते नजर आएंगे। उनका यह पोस्ट हैंडल @yadavakhilesh से किया गया और देखते ही देखते इस पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
पोस्ट में क्या लिखा अखिलेश यादव ने
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट की शुरुआत तंज भरे अंदाज़ में की और लिखा कि अब वृक्षारोपण का भी एनकाउंटर कर दिया गया है। उन्होंने आगे लिखा कि इतना शुक्र मनाना चाहिए कि कम से कम एक पेड़ तो लगा, भले ही वह मंच पर लगाया गया हो, बाकी 34,99,99,999 पेड़ केवल कागज़ी फाइल में ही लगाए जाएंगे। इस आंकड़े के जरिए उन्होंने सीधा सवाल खड़ा किया कि जब अभियान का लक्ष्य ही करोड़ों में है, तो जमीन पर इतनी बड़ी संख्या में असल में वृक्षारोपण होना कैसे संभव होगा। उनके मुताबिक मंच पर सिर्फ एक पेड़ लगाकर पूरे अभियान की औपचारिकता निभा दी गई, जबकि बाकी आंकड़े सिर्फ रिकॉर्ड में दर्ज होकर रह जाएंगे।
भ्रष्टारोपण और चुनावी फंड का आरोप
पोस्ट में अखिलेश यादव ने इस पूरे अभियान को वृक्षारोपण नहीं बल्कि भ्रष्टारोपण करार दिया। उनका आरोप है कि पौधे लगाने के नाम पर असल में एक ऐसी व्यवस्था खड़ी की जा रही है जो चुनावी फंड जुटाने के समानांतर काम करती है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए कहा कि यह पूरा आयोजन दिखावे और कागजी खानापूर्ति तक सीमित है। पोस्ट के आखिरी हिस्से में उन्होंने इसे डबल इंजन सरकार से भी जोड़ने की कोशिश की, हालांकि यह वाक्य पूरा होने से पहले ही एक लिंक के साथ पोस्ट खत्म हो जाता है, जिसमें संभवतः कोई वीडियो या अन्य सामग्री जुड़ी हुई थी। भारतीय राजनीति में डबल इंजन सरकार शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर तब किया जाता है जब केंद्र और किसी राज्य में एक ही पार्टी की सरकार हो, हालांकि पोस्ट में यह वाक्य अधूरा होने की वजह से इसका सीधा संदर्भ स्पष्ट नहीं हो पाता।
सांकेतिक आयोजनों पर उठे सवाल
अखिलेश यादव के इस पोस्ट ने एक बार फिर उस बहस को हवा दे दी है जो अक्सर बड़े पैमाने के सरकारी वृक्षारोपण अभियानों को लेकर उठती रही है, जहां मंच पर या किसी एक जगह पर प्रतीकात्मक रूप से एक-दो पौधे लगाकर पूरे अभियान की तस्वीरें और सुर्खियां बना ली जाती हैं। उनका आरोप है कि असल जमीनी स्तर पर उतने पौधे न तो लगाए जाते हैं और न ही उनकी देखभाल हो पाती है, जिससे सरकारी आंकड़े और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा फासला बना रहता है। इसी आधार पर उन्होंने पूरे आयोजन को कागज़ी खानापूर्ति और चुनावी फंड जुटाने के एक जरिए के तौर पर पेश किया।
जनता की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने उनके आरोपों से सहमति जताते हुए इसे सरकारी योजनाओं में दिखावे और कागजी आंकड़ों की राजनीति बताया। वहीं एक बड़े तबके ने उन पर बिना तथ्य जांचे आलोचना करने का आरोप लगाया और सुझाव दिया कि उनकी सोशल मीडिया टीम को पोस्ट करने से पहले तथ्यों की पड़ताल करनी चाहिए। कुछ यूजर्स ने व्यंग्यात्मक लहजे में सवाल उठाया कि मंच पर लगाए गए पेड़ या आयोजन में लगाए गए पौधे आने वाले महीनों में जीवित बचते हैं या नहीं, यह भी सामने आना चाहिए। कुछ प्रतिक्रियाएं हल्के-फुल्के मजाकिया अंदाज़ में भी आईं, तो कुछ ने कविता जैसे अंदाज़ में अखिलेश यादव के आरोपों का समर्थन किया। कुल मिलाकर इस पोस्ट ने सरकारी वृक्षारोपण अभियानों की जमीनी सच्चाई को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।


















