समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए युवाओं, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर बड़ा बयान दिया है। अपने आधिकारिक हैंडल से लिखी इस पोस्ट में उन्होंने साफ कहा कि पेपर लीक, शिक्षकों और शिक्षार्थियों की समस्याओं तथा अन्य मुद्दों पर आवाज़ उठाने वाले लोगों पर दर्ज मुकदमे तुरंत वापस लिए जाने चाहिए।
पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर मुकदमे वापसी की मांग
अखिलेश यादव के मुताबिक, जिन लोगों ने पेपर लीक की समस्या, शिक्षकों और छात्रों को होने वाली दिक्कतों तथा इससे जुड़े दूसरे मुद्दों पर अपनी बात रखी है, उनके खिलाफ दर्ज कराए गए मुकदमों को खत्म किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जो लोग व्यवस्था की खामियों को उजागर करने के लिए सामने आए, उन्हें इसके बदले कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ना चाहिए। इस मांग के जरिए उन्होंने उन युवाओं और शिक्षकों का मुद्दा उठाया है जो लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और शिक्षा से जुड़ी दिक्कतों को लेकर सड़कों पर उतरते रहे हैं।
2027 में सरकार बनने पर नौकरी कैलेंडर का वादा
पोस्ट में अखिलेश यादव ने आगे लिखा कि 2027 में उनकी पार्टी सरकार में आएगी और उस समय एक नौकरी का कैलेंडर बनाया जाएगा। उनके अनुसार इस कैलेंडर के जरिए बेरोजगारी की समस्या का समयबद्ध और निश्चित समाधान निकाला जाएगा। यानी भर्तियों का एक तय कार्यक्रम सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को पहले से पता रहे कि किस विभाग में कब भर्ती निकलने वाली है और उन्हें अनिश्चितता में इंतजार न करना पड़े।
संविदा भर्ती और पीडीए से जुड़ा जिक्र
अपनी पोस्ट में उन्होंने संविदा यानी ठेके पर होने वाली भर्तियों में कमीशनखोरी का भी मुद्दा उठाया। इसके साथ ही उन्होंने पीडीए से जुड़े विषय की भी बात कही, लेकिन पोस्ट के इस हिस्से के आगे एक लिंक जुड़ा होने की वजह से पूरा वाक्य और उसका पूरा ब्योरा सामने नहीं आ सका।
जनता की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों को उनसे जोड़ते हुए समर्थन जताया, तो वहीं कुछ ने सवाल उठाया कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब भर्तियां और नौकरियां क्यों अटकी रहीं। कुछ यूजर्स ने आरक्षण, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय रखी, जबकि कुछ ने इसे आगामी चुनावों से जोड़कर देखा। इस तरह यह पोस्ट सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गई।





















