कुंचको बोबन और लिजोमोल जोस की रहस्य और रोमांच से भरपूर फिल्म 'उन्मादम' 31 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। बॉक्स ऑफिस पर अपनी छाप छोड़ने के बाद अब यह चर्चित फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दस्तक देने जा रही है। मेकर्स ने इस फिल्म की ओटीटी रिलीज से जुड़ी पुख्ता जानकारी साझा की है, जिससे दर्शकों को यह पता चल गया है कि वे घर बैठे इस सस्पेंस थ्रिलर का लुत्फ कहां और कब उठा सकते हैं। कुंचको बोबन और लिजोमोल जोस के अलावा इस फिल्म में सिद्दीक, कृष्णा प्रभा, विशाक नायर, सुधीश और सबुमोन अब्दुसमद जैसे कई जाने-माने कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। किरण दास के निर्देशन में बनी इस सस्पेंस फिल्म की पटकथा शाही कबीर ने तैयार की है, जो अपनी दमदार कहानी के लिए जाने जाते हैं।
कब और कहां देखें 'उन्मादम'
बहुप्रतीक्षित फिल्म 'उन्मादम' का डिजिटल प्रीमियर सोनी लिव प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा और इसकी स्ट्रीमिंग आधिकारिक तौर पर 4 सितंबर 2026 से शुरू होगी। इस बात की आधिकारिक घोषणा फिल्म की पूरी टीम ने सोशल मीडिया के माध्यम से की है। इस रोमांचक घोषणा के साथ टीम ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि कुछ मामलों को आसानी से सुलझा लिया जाता है, कुछ कभी नहीं सुलझते, लेकिन एक ऐसी केस फाइल भी होती है जिसे छूने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता। मेकर्स द्वारा जारी किए गए इस नए पोस्टर में फिल्म की मुख्य स्टार कास्ट और इसकी खौफनाक कहानी की एक हल्की सी झलक साफ देखने को मिलती है, जिसने फैंस की उत्सुकता को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
खौफनाक रहस्य और एक अनूठी कहानी
'उन्मादम' की पूरी पटकथा शेली नाम के एक पुलिस अफसर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी रोजमर्रा की नौकरी से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है और एक सफल स्क्रीनराइटर बनने का बड़ा सपना देखता है। अपने इसी सपने को हकीकत में बदलने के लिए वह एक साल की लंबी छुट्टी ले लेता है, लेकिन अचानक सामने आई पैसों की भारी तंगी के चलते उसे मजबूर होकर अपने महकमे में वापस लौटना पड़ता है। कार्य के दौरान हुई एक छोटी सी चूक के बाद उसका तबादला एक सुनसान और दूर-दराज के स्टेशन पर कर दिया जाता है। उसी नए स्थान पर उसे एक युवा महिला की संदिग्ध और रहस्यमयी मौत से जुड़ी एक पुरानी, धूल फांकती हुई भूली-बिसरी फाइल हाथ लगती है। हालांकि बाकी लोग इस फाइल को मनहूस मानते हैं, लेकिन शेली सच्चाई की तह तक जाने के अपने पक्के इरादे और इस खौफनाक मामले को फिल्म की स्क्रिप्ट में तब्दील करने की संभावना को देखते हुए इसकी अपने स्तर पर छानबीन करने का फैसला करता है। एक सामान्य सी जांच के रूप में शुरू होने वाली यह प्रक्रिया धीरे-धीरे एक गंभीर मनोवैज्ञानिक मोड़ पर पहुंच जाती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर शेली की मानसिक स्थिरता और उसकी निजी जिंदगी पर गहरा असर डालने लगती है।
अंतिम पल तक रोमांच बनाए रखती है फिल्म
जैसे-जैसे इस मामले की परते खुलती हैं और तहकीकात गहरी होती जाती है, वैसे-वैसे शेली को बेहद परेशान करने वाले अजीब दृश्य और डरावने सपने आने लगते हैं, जिससे हकीकत, उसकी अपनी लिखी जा रही पटकथा और उसकी पुरानी यादों के बीच का अंतर पूरी तरह धुंधला होने लगता है। उसके इस असामान्य और बिगड़ते बर्ताव की वजह से उसकी पत्नी सौम्या के साथ उसके वैवाहिक जीवन में भी गंभीर तनाव पैदा हो जाता है। आखिरकार, उस कथित रूप से शापित माने जाने वाले मामले का रहस्य एक अत्यंत डरावने और चौंकाने वाले सच के करीब पहुंच जाता है। यह बात खुलकर सामने आती है कि जिन अलौकिक घटनाओं का अंदेशा था, वे असल में एक बड़े और छिपे हुए अपराध को छिपाने का नापाक जरिया मात्र थीं, जो शेली को उस निर्दोष युवा महिला की मौत के असली गुनहगारों तक सीधा पहुंचा देती हैं। यह लंबी खोज अंततः एक बेहद निजी और भावनात्मक सफर में बदल जाती है, जहाँ शेली को न केवल उस जटिल मामले के पीछे छिपे भयानक सच का सामना करना पड़ता है, बल्कि उस सच्चाई का उसकी अपनी मानसिक स्थिति पर पड़े गहरे प्रभाव का भी डटकर मुकाबला करना होता है।



















