दफ्तर में साथ काम करते-करते कई बार रिश्ते गहरा जाते हैं और ऐसी कहानियां अक्सर फिल्मी पर्दों पर ही नजर आती हैं। लेकिन महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवाड़ पुलिस कमिश्नरेट से एक ऐसी ही अनूठी असल जिंदगी की कहानी सामने आई है, जिसने हर तरफ सुर्खियां बटोर ली हैं। यहां एक ही पुलिस स्टेशन में अपनी सेवाएं दे रही दो महिला कांस्टेबलों ने जीवन भर एक-दूसरे का साथ निभाने का पक्का इरादा कर लिया है। ये दोनों आगामी 30 अगस्त को पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह के पवित्र बंधन में बंधने की पूरी तैयारी कर चुकी हैं।
छुट्टी के आवेदन के साथ भेजा शादी का कार्ड
इस अनोखे मामले का खुलासा तब हुआ जब दोनों महिला कांस्टेबलों ने अपने इस कदम के लिए पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों के पास आधिकारिक रूप से छुट्टी का आवेदन दिया। अपनी इस अर्जी के साथ उन्होंने विभाग को अपनी शादी का निमंत्रण कार्ड भी भेजा है। जैसे ही अधिकारियों और महकमे के अन्य लोगों को इसकी जानकारी मिली, पुलिस महकमे के भीतर इस रिश्ते और होने जा रहे विवाह को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। हर कोई इस साहसिक फैसले और उनके आपसी प्रेम की चर्चा कर रहा है।
तीन साल की ड्यूटी और फिर गहराया रिश्ता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये दोनों महिला कांस्टेबल महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों से ताल्लुक रखती हैं। अपनी पुलिस ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद दोनों की पहली पोस्टिंग पुलिस मुख्यालय में की गई थी। शुरुआत में वे अन्य महिला कांस्टेबलों के साथ ही आवास साझा करती थीं। इसके बाद दोनों की तैनाती पिंपरी-चिंचवाड़ के एक ही थाने में कर दी गई। पिछले करीब तीन वर्षों से एक ही पुलिस स्टेशन में साथ-साथ ड्यूटी करते हुए दोनों के बीच नजदीकियां काफी बढ़ गईं। समय बीतने के साथ उन्होंने एक ही छत के नीचे साथ रहना भी शुरू कर दिया। उनके बहुत करीबी लोगों को धीरे-धीरे इस रिश्ते की गहराई का पता चला और अब उन्होंने अपने इस बंधन को शादी के पवित्र रिश्ते में बदलने का निर्णय लिया है।
परिवार के विरोध के बाद पुलिस अधिकारियों का रुख
यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब एक कांस्टेबल के परिजनों को उनके इस रिश्ते और विवाह की बात पता चली। परिवार वालों ने इस रिश्ते तथा शादी के फैसले का कड़ा विरोध जताया। विरोध दर्ज कराने के लिए परिवार के सदस्य थाने तक पहुंच गए और पुलिस विभाग से इसमें हस्तक्षेप करने की मांग की। हालांकि इस स्थिति को संभालते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने दोनों महिला कांस्टेबलों को इस पूरी तरह से निजी मामले को लेकर अनावश्यक बातचीत और विवाद से बचने की सलाह दी।
सूत्रों के अनुसार, जब परिजनों ने इस मामले को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के समक्ष उठाया, तो उन्हें स्पष्ट रूप से समझाया गया कि दो वयस्क और अपनी आपसी सहमति से साथ रहने वाले व्यक्तियों को पुलिस विभाग द्वारा विवाह करने से कानूनी तौर पर रोका नहीं जा सकता है। पुलिस का यह रुख उनके लिए एक बड़ा संबल साबित हुआ।
अलंदी में धार्मिक रीति-रिवाजों से होगी शादी
तय कार्यक्रम के अनुसार, दोनों महिला कांस्टेबल अलंदी क्षेत्र में पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अपना विवाह समारोह संपन्न कराने की तैयारी में जुटी हुई हैं। हालांकि, वर्तमान समय में लागू भारतीय कानूनों के अंतर्गत इस विवाह समारोह को आधिकारिक और वैधानिक विवाह का दर्जा मिल पाएगा या नहीं, इसको लेकर स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।
गौरतलाब है कि पिछले साल अक्टूबर 2023 में देश के सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता प्रदान करने से साफ इनकार कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया था कि इस तरह के मामलों में कानून बनाने का अधिकार पूरी तरह से देश की संसद के कार्यक्षेत्र में आता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने उस ऐतिहासिक फैसले में LGBTQIA+ समुदाय के व्यक्तियों को अपना साथी खुद चुनने और अपनी आपसी सहमति से साथ रहने के मौलिक अधिकार को जरूर मान्यता दी थी।
एक कांस्टेबल करा रही है जेंडर चेंज कराने की प्रक्रिया
इस पूरे प्रकरण का एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है कि इन दोनों कांस्टेबलों में से एक अपना लिंग बदलवाने की मेडिकल प्रक्रिया से गुजर रही हैं। इसके लिए वह मुंबई के एक बड़े और प्रतिष्ठित अस्पताल में अपना इलाज करवा रही हैं। बताया जा रहा है कि दोनों इस बात का भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि लिंग परिवर्तन यानी ट्रांजिशन की पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद क्या उनके इस रिश्ते को कानूनी तौर पर रजिस्टर्ड कराया जा सकता है या नहीं। हालांकि, इस पर लागू होने वाली कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह से व्यक्ति के आधिकारिक जेंडर स्टेटस और उस पर लागू होने वाले विवाह कानूनों के दायरे पर निर्भर करेगी।


















