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आपातकाल को 'सबसे काला दौर' बताते हुए पीएम मोदी ने संविधान की रक्षा का दोहराया संकल्पराजनीति
25 जून 2026, 10:35 am (125 दिन पहले)· 3

आपातकाल को 'सबसे काला दौर' बताते हुए पीएम मोदी ने संविधान की रक्षा का दोहराया संकल्प

संविधान हत्या दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल को लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया और लोकतंत्र, संविधान तथा नागरिक अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प दोहराया।

संविधान हत्या दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल को देश के इतिहास का एक ऐसा दौर बताया जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह कुचल दिया गया था। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें उस अंधेरे वक्त की याद दिलाता है और साथ ही न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुत्व के आदर्शों के प्रति समर्पित भारत बनाने की प्रेरणा देता है।

गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखी अपनी पोस्ट में पीएम मोदी ने उन तमाम लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने भारत के सबसे काले दौरों में से एक यानी आपातकाल के समय भी लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती से बचाए रखा।

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'आपातकाल संविधान पर सीधा हमला था'

प्रधानमंत्री ने इस दौर को संविधान पर सीधा प्रहार करार दिया। उन्होंने लिखा कि उस वक्त नागरिकों की आजादी छीन ली गई, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर ताला जड़ दिया गया, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और समाजसेवियों को जेल में डाल दिया गया और लोकतंत्र की बुनियाद मानी जाने वाली संस्थाओं पर हमला किया गया।

हालांकि, मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि उसी दौर ने अनगिनत आम नागरिकों के असाधारण साहस को सामने ला दिया। ऐसे लोग जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया और संविधान में रचे-बसे आदर्शों को डटकर बनाए रखा।

140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतीक

पीएम मोदी ने अपनी पोस्ट में संविधान को 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराते हैं। उन्होंने आगे लिखा कि संविधान की भावना से प्रेरणा लेकर एक ऐसा भारत गढ़ा जाएगा, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रहे।

विरोध करने वालों को नमन

एक अलग पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान हत्या दिवस हमें उस काले दौर की याद दिलाता है जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह कुचला गया था। उन्होंने इसे लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा डटे रहने की प्रेरणा बताते हुए आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को सादर नमन किया।

स्वतंत्रता पर संस्कृत सुभाषितम्

इस मौके पर पीएम मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया, जिसमें लिखा था, 'स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्याल्लभते परम्। स्वातन्त्र्यान्निर्वृत्तिं गच्छेत् स्वातन्त्र्यात् परमं पदम्।' उन्होंने इसका भाव समझाते हुए बताया कि मनुष्य स्वतंत्रता से ही सुख पाता है, स्वतंत्रता से ही सर्वोच्च उपलब्धि हासिल करता है, स्वतंत्रता से ही शांत अवस्था को प्राप्त होता है और स्वतंत्रता के जरिए ही परम पद तक पहुंचता है।

सवाल-जवाब

संविधान हत्या दिवस किस घटना से जुड़ा है?
यह दिन आपातकाल के उस दौर की याद से जुड़ा है, जब प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह कुचल दिया गया था।
पीएम मोदी ने आपातकाल को क्या बताया?
उन्होंने आपातकाल को भारत के इतिहास के सबसे काले दौरों में से एक और संविधान पर सीधा हमला बताया।
मोदी के अनुसार आपातकाल में क्या-क्या हुआ?
उनके मुताबिक नागरिकों की आजादी छीनी गई, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगी और राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों व समाजसेवियों को गिरफ्तार किया गया।
प्रधानमंत्री ने संविधान को किसका प्रतीक बताया?
उन्होंने संविधान को 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक बताया।
मोदी ने यह बयान कहां और कब दिया?
उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट के जरिए यह बात कही।
पीएम मोदी ने किस संस्कृत श्लोक को साझा किया?
उन्होंने स्वतंत्रता पर आधारित एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें कहा गया है कि मनुष्य स्वतंत्रता से ही सुख और परम पद प्राप्त करता है।
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