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राज्यसभा की हार के बाद हेमंत सोरेन की खामोशी ने झारखंड में खड़े किए कई सवाल, क्या टूट जाएगा इंडिया गठबंधन?राजनीति
24 जून 2026, 8:58 am (47 दिन पहले)· 2

राज्यसभा की हार के बाद हेमंत सोरेन की खामोशी ने झारखंड में खड़े किए कई सवाल, क्या टूट जाएगा इंडिया गठबंधन?

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद झारखंड का सत्ताधारी इंडिया ब्लॉक आपस में उलझ गया है, और हेमंत सोरेन की चुप्पी से गठबंधन के भीतर नए समीकरण की अटकलें तेज हैं।

झारखंड की सियासत इन दिनों किसी पहेली से कम नहीं है। राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से पूरी तस्वीर धुंधली पड़ी हुई है। सत्ता संभाल रहे इंडिया ब्लॉक की चारों पार्टियों, यानी कांग्रेस, राजद, सीपीआई (एमएल) और जेएमएम के दूसरी कतार के नेता तो खूब बोल रहे हैं, लेकिन जिस चेहरे पर पूरे गठबंधन का दारोमदार टिका है, वही चुप हैं। जेएमएम प्रमुख और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार पर एक शब्द नहीं कहा है, और यही खामोशी सबको खटक रही है।

घटक दलों को यह हार हजम नहीं हो रही। कांग्रेस के प्रदेश स्तर के नेता हार का ठीकरा राजद और माले के सिर फोड़ रहे हैं। दूसरी तरफ जेएमएम के राष्ट्रीय महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य कह रहे हैं कि हेमंत सोरेन की सरकार अब 56 नहीं, बल्कि सिर्फ 50 विधायकों के समर्थन पर टिकी है। मतलब साफ है, कांग्रेस की तरह जेएमएम भी मान रहा है कि राजद और माले के जिन 6 विधायकों ने इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार को वोट नहीं दिया, वे अघोषित रूप से अब गठबंधन का हिस्सा नहीं रहे। इन सबके बीच सोरेन की चुप्पी ने सबको सकते में डाल दिया है।

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क्या बदलने वाला है सरकार का स्वरूप

अब धीरे-धीरे यह तस्वीर साफ होने लगी है कि झारखंड में सरकार का स्वरूप बदल सकता है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान इंडिया ब्लॉक के भीतर जो खींचतान शुरू हुई थी, वह अब रिश्ता टूटने की कगार तक पहुंच चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि इस हालत के लिए गठबंधन की पार्टियां खुद ही कसूरवार हैं। एक साथ रहते हुए भी ये आपस में भिड़ रही हैं, और भाजपा तमाशबीन बनकर इसका लुत्फ उठा रही है।

इस कलह की जड़ें पुरानी हैं। बिहार में राजद और कांग्रेस ने झारखंड मुक्ति मोर्चा को कोई खास तवज्जो नहीं दी। जवाब में जेएमएम ने भी असम में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाई। बची-खुची कसर राज्यसभा चुनाव ने पूरी कर दी। एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की जीत पक्की कर इंडिया ब्लॉक की पार्टियों ने यह जता दिया कि उनकी एकता बस सरकार चलाने तक सीमित है, बाकी फैसलों में हर कोई अपनी मर्जी का मालिक है।

आंकड़ों का खेल और उलझी हुई गिनती

झारखंड में जेएमएम के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन की सरकार है। सबसे ज्यादा सीटें होने की वजह से हेमंत सोरेन इसके मुखिया हैं। जेएमएम के पास 34 विधायक हैं। इसके साथ कांग्रेस के 16, राजद के 4 और वाम दलों के 2 विधायक सोरेन के समर्थन में खड़े हैं, यानी इंडिया ब्लॉक के कुल 56 विधायक बनते हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 विधायकों के वोट जरूरी थे। 81 सीटों वाली इस विधानसभा में 56 विधायक एकजुट होते तो दोनों सीटें इंडिया ब्लॉक के खाते में जाना तय था।

लेकिन हुआ कुछ और। जेएमएम उम्मीदवार बैद्यनाथ राम को 30 वोट मिले, जबकि महागठबंधन समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार के हिस्से सिर्फ 20 वोट आए। मतदान से पहले मॉक पोलिंग होने के बावजूद गठबंधन के 3 वोट निरस्त हो गए। बड़ा सवाल यही है कि जब जेएमएम को 28 वोट ही चाहिए थे, तो उसे 30 वोट क्यों और कैसे मिले, और कांग्रेस को सिर्फ 20 पर क्यों रुकना पड़ा। जाहिर है, इंडिया ब्लॉक में एकता बची ही नहीं। इसी का सीधा फायदा निर्दलीय नाथवानी को मिला और वे जीत गए, जबकि पर्याप्त वोट होते हुए भी कांग्रेस का उम्मीदवार हार गया।

नतीजे के बाद शुरू हुई आरोप-प्रत्यारोप की जंग

नतीजे घोषित होते ही इंडिया ब्लॉक में सिर-फुटव्वल मच गया। कांग्रेस ने इसके लिए राजद और वाम दलों के विधायकों को जिम्मेदार बताया। राजद ने उल्टा कांग्रेस पर ही बिकाऊ होने का आरोप जड़ दिया, जिससे तल्खी और बढ़ गई। वाम दलों की ओर से सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने भी कांग्रेस के आरोप को सिरे से नकार दिया। इस पूरे शोर में जेएमएम चुप्पी साधे बैठा है।

हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस तक जेएमएम की भूमिका पर सवाल नहीं उठा रही, जबकि गणित साफ है। जब जेएमएम कैंडिडेट को 28 की जगह 30 वोट चले गए, तो 2 वोट यूं ही कांग्रेस के हिस्से से कट गए। इस तरह कांग्रेस के पास 28 की जगह सिर्फ 26 वोट बचे, जो हार के लिए काफी थे। इसके बाद कौन बिका और कौन बिकने से बचा, यह बहस अब बेमतलब है।

दोनों हाथ में लड्डू और भाजपा का इशारा

कांग्रेस इस हार पर मंथन जरूर करेगी। राजद और वाम दल भी तीखे तेवर अपना चुके हैं। जेएमएम का कुछ न बोलना कांग्रेस को और भड़का सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस अपमान और धोखे के बाद कांग्रेस सरकार में बनी रहती है या अलग होने की राह पकड़ती है। फिलहाल जेएमएम के दोनों हाथ में लड्डू हैं। भाजपा भी इशारों-इशारों में हेमंत को अपने साथ आने का न्योता दे चुकी है। नतीजे आते ही हेमंत की दिल्ली यात्रा भी अपने आप में बहुत कुछ कह जाती है। दिल्ली में वे किसके साथ क्या खिचड़ी पका रहे हैं, यह जल्द सामने आ सकता है। गठबंधन में हालात ऐसे बनाए जा रहे हैं कि कांग्रेस आलाकमान खुद ही अलग होने का फैसला ले ले।

सरयू राय का फॉर्मूला

इसी बीच जेडीयू के इकलौते विधायक सरयू राय ने हेमंत सोरेन को एक बार फिर सलाह दी है कि वे भाजपा और कांग्रेस दोनों को छोड़कर सरकार बनाएं। उन्होंने इसका फॉर्मूला भी सुझाया है। उनके मुताबिक जेएमएम के 34, राजद और वाम दलों के 6 और जेडीयू के 1 विधायक को मिलाकर 41 का बहुमत आसानी से बन जाएगा, और हेमंत चाहें तो इसी आधार पर सरकार चला सकते हैं। यह सुझाव वे पहले भी हेमंत को दे चुके हैं। हालांकि बात यह भी है कि जेडीयू बिहार और केंद्र में एनडीए का हिस्सा है। राज्यसभा चुनाव में सरयू राय ने खुद एनडीए समर्थित उम्मीदवार को वोट देने की बात कही थी, तो वोट किया भी होगा।

क्यों उठ रही भाजपा के करीब जाने की चर्चा

अभी तक यह सिर्फ चर्चा का विषय है कि हेमंत भाजपा के करीब जा सकते हैं, और इसके कई कारण गिनाए जा रहे हैं। सबसे पहला कारण यह कि वे सीबीआई और ईडी के कई कानूनी मामलों में उलझे हुए हैं, और भाजपा के साथ रहने पर उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है। दूसरा बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि जिस तरह विपक्षी पार्टियों के सांसद और विधायक भाजपा के आगे झुकते जा रहे हैं, वह जेएमएम के लिए भी खतरे का संकेत है।

सवाल-जवाब

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार क्यों हार गया?
जेएमएम उम्मीदवार बैद्यनाथ राम को जरूरी 28 के बजाय 30 वोट मिल गए, जिससे कांग्रेस के हिस्से में 28 के बजाय सिर्फ 26 वोट बचे और उसकी हार हो गई।
इंडिया ब्लॉक में किन चार पार्टियों का गठबंधन है?
कांग्रेस, राजद, सीपीआई (एमएल) और जेएमएम मिलकर झारखंड में इंडिया ब्लॉक बनाते हैं।
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कितने वोट चाहिए थे?
एक सीट जीतने के लिए 28 विधायकों के वोट जरूरी थे।
राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय सीट किसने जीती?
एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने जीत हासिल की।
सुप्रीयो भट्टाचार्य ने सरकार के समर्थन को लेकर क्या कहा?
जेएमएम के राष्ट्रीय महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य ने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार अब 56 के बजाय सिर्फ 50 विधायकों के समर्थन पर टिकी है।
सरयू राय ने हेमंत सोरेन को क्या फॉर्मूला सुझाया है?
जेडीयू विधायक सरयू राय का कहना है कि जेएमएम के 34, राजद और वाम दलों के 6 तथा जेडीयू के 1 विधायक को मिलाकर 41 का बहुमत बन जाएगा, जिससे हेमंत बिना भाजपा और कांग्रेस के सरकार बना सकते हैं।
हेमंत सोरेन के भाजपा के करीब जाने की चर्चा क्यों है?
एक वजह यह है कि वे सीबीआई और ईडी के कई कानूनी मामलों में उलझे हैं और भाजपा के साथ रहने पर राहत की उम्मीद है, दूसरी वजह विपक्षी नेताओं का भाजपा के आगे झुकना बताया जा रहा है।
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