बिहार के भोजपुर में भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर की घटना ने राज्य की सियासत में एक नई हलचल पैदा कर दी है। सरकार ने इस मामले में न्यायिक जांच बैठाने और चार पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई करने का फैसला लिया है, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष लगातार सरकार को घेरे हुए है। यह घटना अब मात्र एक एनकाउंटर नहीं, बल्कि राज्य में कानून व्यवस्था और प्रशासन की जवाबदेही का एक बड़ा सियासी मुद्दा बन चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के लिए यह स्थिति चुनौती भरी है, क्योंकि एनडीए खेमे के भीतर से ही संजय झा और अश्विनी चौबे जैसे नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, आरजेडी के लिए यह पूरा घटनाक्रम तेजस्वी यादव के राजनीतिक कद को बढ़ाने का एक रणनीतिक अवसर साबित हो सकता है।
राजनीतिक समीकरण और तेजस्वी यादव
वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा के विश्लेषण के मुताबिक, तेजस्वी यादव के लिए यह घटनाक्रम 'A to Z' यानी समावेशी राजनीति को मूर्त रूप देने का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट हो सकता है। आरजेडी के पास पहले से ही 30 से 32 प्रतिशत का एक मजबूत कोर वोट बैंक है। राज्य की सत्ता पर पूरी तरह काबिज होने के लिए उन्हें अतिरिक्त 5 से 10 प्रतिशत वोटों की दरकार है। यदि तेजस्वी यादव इस मुद्दे को केवल विरोध तक सीमित न रखकर न्याय और कानून के शासन के व्यापक मंच पर ले जाते हैं, तो वह उन वर्गों के बीच अपनी पैठ बना सकते हैं जो अब तक आरजेडी से दूर रहे हैं। भरत तिवारी ब्राह्मण समाज से आते थे, ऐसे में इस मुद्दे का लाभ तेजस्वी को सवर्ण समाज में भी अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने में मिल सकता है।
बिहार का जातीय गणित और चुनौतियां
बिहार के 2023 के जातीय सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य में अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36.01 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग 27.12 प्रतिशत, अनुसूचित जाति 19.65 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति 1.68 प्रतिशत और सामान्य वर्ग 15.52 प्रतिशत है। सामान्य वर्ग में राजपूत, भूमिहार, कायस्थ और ब्राह्मण जैसी सवर्ण जातियां 10.56 प्रतिशत हैं, जबकि यादव समुदाय 14.27 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 17.7 प्रतिशत है। तेजस्वी यादव के लिए असली चुनौती अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव आधार को बचाते हुए सवर्णों और अन्य वंचित वर्गों के भरोसे को जीतना है। वरिष्ठ पत्रकार प्रेम कुमार का मानना है कि यदि इस मामले को जातीय चश्मे के बजाय नागरिक अधिकारों के मुद्दे के रूप में उठाया जाता है, तो यह आरजेडी के लिए एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है।
सरकार के सामने अग्निपरीक्षा
सम्राट चौधरी सरकार ने न्यायिक जांच का आदेश देकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है, लेकिन मामले की निष्पक्षता और जांच की गति पर सबकी निगाहें टिकी हैं। आरजेडी का प्रतिनिधिमंडल पहले ही पीड़ित परिवार से मिल चुका है और उदय नारायण चौधरी जैसे नेता सरकार पर तीखे हमले कर रहे हैं। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि क्या सरकार इस जनाक्रोश को शांत कर पाएगी या यह घटना तेजस्वी यादव के लिए बिहार की सत्ता का रास्ता आसान कर देगी।













