पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त नया भूचाल आ गया जब आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने एक विवादित बयान दिया। हुमायूं कबीर, जो हाल ही में पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने की कोशिशों के सिलसिले में चर्चा में आए थे, ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को लेकर एक तीखी टिप्पणी की। कबीर ने खुले तौर पर कहा कि वह जुमे की नमाज के दौरान सुवेंदु अधिकारी की मौत की दुआ मांगेंगे। उन्होंने अपनी इस नाराजगी के पीछे पुलिस की कथित ज्यादतियों को वजह बताया और आरोप लगाया कि अधिकारी की पुलिस उन्हें लगातार परेशान कर रही है।
बयान के तूल पकड़ने के बाद हुमायूं कबीर ने अपने रुख में अचानक बदलाव किया। शुरुआती तीखी टिप्पणियों के उलट उन्होंने अपनी बात बदलते हुए कहा कि वह अब सुवेंदु अधिकारी की लंबी उम्र की कामना करेंगे और चाहते हैं कि वह भविष्य में देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचें। इस यू-टर्न से पहले उन्होंने अपनी बात के समर्थन में कुछ जाने-माने राजनीतिक उदाहरण भी दिए थे। उन्होंने अजित पवार और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसे नेताओं के निधन का हवाला देकर अपनी बात को समझाने की कोशिश की थी, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया था।
पुलिस के रवैये पर निशाना और सफाई
अपने बयानों पर चौतरफा घिरने के बाद हुमायूं कबीर ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनके निशाने पर सीधे तौर पर सुवेंदु अधिकारी नहीं थे, बल्कि पुलिस प्रशासन का रवैया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके और उनके राजनीतिक समर्थकों के खिलाफ प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है और पुलिस का रवैया बेहद मनमाना व दमनकारी बनता जा रहा है। कबीर का दावा था कि पुलिस के इसी अनुचित व्यवहार के कारण उनके भीतर गुस्सा पैदा हुआ था, जिसके आवेश में उन्होंने वह बयान दे दिया था। हालांकि उनके इस शुरुआती बयान और बाद की सफाई ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल को और तेज कर दिया है।
उपचुनाव के बीच विवादों से पुराना नाता
हुमायूं कबीर का पश्चिम बंगाल की राजनीति में विवादों से पुराना नाता रहा है और वह लगातार अपने बयानों के चलते सुर्खियों में बने रहते हैं। रेजीनगर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले भी उन्होंने प्रचार गतिविधियों से खुद को दूर रखने की घोषणा की थी। उस दौरान भी उन्होंने पुलिस प्रशासन पर उनके समर्थकों के उत्पीड़न और भारी दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए थे। प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में उन्होंने प्रचार से हटने का फैसला लिया था। ताजा घटनाक्रम में सुवेंदु अधिकारी को लेकर दिए गए उनके बयान और उसके बाद आए यू-टर्न ने एक बार फिर बंगाल की राजनीति में गर्माहट पैदा कर दी है।



















