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झारखंड में फँसे हेमंत सोरेन: नियुक्तियाँ रद होने से दोतरफा नाराजगी, सीबीआई जाँच की जिद पर अड़े छात्रराजनीति
24 अग॰ 2026, 2:47 pm (64 दिन पहले)· 3

झारखंड में फँसे हेमंत सोरेन: नियुक्तियाँ रद होने से दोतरफा नाराजगी, सीबीआई जाँच की जिद पर अड़े छात्र

झारखंड में सरकारी नौकरियों की नियुक्तियाँ रद होने और सीबीआई जाँच की माँग को लेकर उपजे विवाद में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चारों तरफ से घिर गए हैं।

रांची में सरकारी नौकरियों की नियुक्ति और बरखास्तगी को लेकर एक गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया है। सरकार ने जेपीएससी, जेएससी और अन्य परीक्षाओं के माध्यम से चयनित करीब 2000 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के बाद 30 दिसंबर 2025 को अपनी पीठ थपथपाई थी, लेकिन इन भर्तियों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर छात्रों ने तीन सप्ताह से अधिक समय तक तीव्र आंदोलन छेड़ दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य रूप से दो प्रमुख माँगे थीं कि इन नियुक्ति परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई से जाँच कराई जाए। सरकार ने दबाव में आकर परीक्षाएँ तो रद कर दीं और नियुक्ति पा चुके लोगों को बर्खास्त करने का आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया, परंतु इसके तुरंत बाद झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के इस आदेश पर रोक लगा दी। दूसरी ओर, सरकार इस पूरे प्रकरण की जाँच सीआईडी से कराने पर अड़ी हुई है, जबकि छात्रों का सीआईडी पर बिल्कुल भरोसा नहीं है, हालाँकि वे जजों की एक विशेष कमेटी से जाँच कराने के विकल्प पर अपनी सहमति जताने के लिए तैयार जरूर दिखे हैं।

जाँच की जिद और सड़कों पर बढ़ता टकराव

सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच जाँच एजेंसी को लेकर ठन गई है। जहाँ सरकार सीआईडी की जाँच को ही पर्याप्त और उचित मानती है, वहीं छात्र सीबीआई से कम पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं। इस असंतोष के चलते राज्यभर में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जिलावार पुतले फूँके जा रहे हैं, जिसके जवाब में पुलिस प्रशासन और गठबंधन सरकार की प्रमुख पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्थक आक्रामक रुख अपनाते हुए आंदोलनकारियों को सबक सिखाने में जुटे हैं। गिरिडीह जिले में जेएमएम समर्थकों ने न केवल पुतला दहन का पुरजोर विरोध किया, बल्कि प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ा कर डंडे भी बरसाए। इसी तरह की कड़ाई रांची में भी देखने को मिली जहाँ पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए पुतला जलाने के लिए एकत्र हुए आंदोलनकारियों को खदेड़ दिया। छात्रों का साफ तौर पर मानना चूँकि सीआईडी सीधे तौर पर राज्य सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन आती है, इसलिए उससे किसी निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच की उम्मीद नहीं की जा सकती है, और यही वजह है कि वे सीबीआई जाँच की अपनी माँग पर आज भी डटे हुए हैं।

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दोतरफा विरोध और अदालती झटके से बढ़ीं मुश्किलें

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कई मोर्चों पर बुरी तरह फँसते चले गए हैं। उन्होंने जिन लोगों की नौकरी नियुक्ति के बाद छीनने का प्रयास किया, वे सरकार के धुर विरोधी बन चुके हैं, जबकि परीक्षाएँ रद कराने की माँग को लेकर लगातार 25 दिनों तक चले आंदोलन का परिणाम यह निकला कि सरकार को अंततः छात्रों के आगे झुकना पड़ा और साल 2014 से लेकर अब तक जेपीएससी तथा जेएससी जैसी संस्थाओं द्वारा आयोजित 22 परीक्षाओं को रद करना पड़ा। इसके लिए आनन-फानन में आदेश भी जारी कर दिए गए, लेकिन अदालत में सरकार अपना पक्ष मजबूत तरीके से नहीं रख पाई, जिसके कारण उसे एक बड़ा झटका लगा और हाईकोर्ट ने अंतिम फैसला आने तक सरकार के इन आदेशों पर स्थगन आदेश दे दिया। आंदोलनकारी छात्रों के बीच अब यह संदेश जोर-शोर से प्रसारित हो रहा है कि सरकार ने जानबूझकर अपना पक्ष कमजोर रखा और हेमंत सोरेन की नीयत बिल्कुल साफ नहीं है, बल्कि वे आंदोलनकारियों के साथ छल कर रहे हैं। यदि उनकी नीयत वास्तव में सही होती, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के सीबीआई जाँच की शर्त स्वीकार कर लेते और अदालत में पूरी मजबूती से पैरवी करते। इस प्रकार, हेमंत सोरेन ने अपने लिए दोहरे दुश्मन खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जिनकी नौकरी जाने वाली है वे भी नाराज हैं और जिनकी नौकरी खत्म करने के लिए छात्र सड़कों पर उतरे हैं, उनका गुस्सा भी सरकार पर फूट रहा है।

राजनीतिक हलचल और विपक्ष की पैनी नजर

झारखंड की इस राजनीतिक उठापटक का पूरा फायदा भारतीय जनता पार्टी उठा रही है। हेमंत सोरेन आंदोलनकारियों के सामने एक बार पहले भी झुक चुके हैं, और यदि वे अब सीबीआई जाँच की माँग भी मान लेते हैं, तो उन्हें एक बार फिर जनता के आगे नतमस्तक होना पड़ेगा। जिस आयोग का गठन उन्होंने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करके किया था, वह अब पूरी तरह से भंग हो चुका है, जिसके अध्यक्ष को सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया है और बाकी सदस्यों ने भविष्य के खतरे को भांपते हुए खुद ही अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा ने भी इस छात्र आंदोलन को अंदरखाने हवा देना शुरू कर दिया है। भले ही भाजपा प्रत्यक्ष रूप से इस आंदोलन में सीधे तौर पर शामिल न हो, लेकिन इसे तूल देने में वह पीछे नहीं हट रही है।

गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश और सियासी रणनीति

हाल ही में झारखंड भाजपा के प्रदेश स्तर के आठ बड़े नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से एक अहम मुलाकात की थी, जिसमें चार नेता ऐसे थे जो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य संदेश यह था कि पार्टी के तमाम नेता अपने आपसी भेद-भाव को भुलाकर हेमंत सोरेन की सरकार पर चौतरफा हमले तेज कर दें। राजनीति के हाशिए पर चल रहे रघुवर दास भी इस पूरे आंदोलन के दौरान काफी सक्रिय नजर आए हैं, हालांकि यह दीगर बात है कि उनके कार्यकाल के दौरान आयोजित की गई परीक्षाएँ भी इस लपेटे में आकर रद हुई हैं। बहरहाल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि भाजपा को इस छात्र आंदोलन को एक मजबूत सियासी टूल के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। उनका यह भी मानना था कि यह पूरा मामला आज की जनरेशन जेड से जुड़ा हुआ है, जिसे पार्टी को एक बड़े राजनीतिक अवसर के रूप में भुनाना चाहिए। इसके बाद से ही भाजपा ने हेमंत सोरेन के पुतला दहन के कार्यक्रम तैयार किए और अब तो पार्टी ने सीधे तौर पर जनरेशन जेड से संवाद स्थापित करने की एक व्यापक रणनीति भी बना ली है।

हाईकोर्ट के रुख पर टिकी सबकी निगाहें

चूँकि पूरा मामला इस समय हाईकोर्ट के विचाराधीन है, इसलिए यदि सरकार खुद इस मामले की सीबीआई जाँच का आदेश नहीं देती है, तो न्याय की उम्मीद अदालत से ही लगाई जा रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि जिन लोगों की नौकरी समाप्त करने का आदेश जारी किया गया है, उनमें कई ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हो सकते हैं जो पूरी तरह से योग्य और ईमानदार थे। कौन सा उम्मीदवार वास्तव में योग्य है और किसने पैसे या सिफारिश के बल पर नौकरी हासिल की है, इसकी गहराई से पड़ताल किए बिना नैसर्गिक न्याय की कल्पना नहीं की जा सकती है। इसलिए इस संभावना से बिल्कुल भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि हाईकोर्ट स्वयं इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दे। यदि ऐसा होता है, तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं, क्योंकि राज्य की सीआईडी ने जिस तरह से धड़पकड़ शुरू की है और गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ में पैसों के लेन-देन तथा परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों की गंभीर गड़बड़ियाँ खुलकर सामने आ रही हैं, उससे यह बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि दाल में कुछ तो काला है।

सवाल-जवाब

झारखंड सरकार ने कितनी परीक्षाएँ रद की हैं?
सरकार ने साल 2014 से अब तक जेपीएससी और जेएससी जैसी संस्थाओं द्वारा ली गई 22 परीक्षाएँ रद कर दी हैं।
छात्रों की मुख्य माँगे क्या थीं?
छात्रों की दो प्रमुख माँगे थीं कि नियुक्ति परीक्षाओं को तत्काल रद किया जाए और पूरे मामले की सीबीआई से जाँच कराई जाए।
झारखंड हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया है?
हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा नियुक्तियाँ रद करने और बर्खास्तगी के आदेश पर अंतिम फैसला आने तक रोक लगा दी है।
जाँच एजेंसी को लेकर क्या विवाद है?
सरकार इस मामले की जाँच सीआईडी से कराना चाहती है, जबकि छात्र सीआईडी पर भरोसा न करते हुए केवल सीबीआई जाँच की माँग पर अड़े हुए हैं।
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