अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर दबाव लगातार गहरा रहा है, जिसका सीधा फायदा जापानी येन को मिलता दिख रहा है। यूनाइटेड ओवरसीज बैंक यानी यूओबी के विश्लेषकों क्वेक सेर लियांग और ली सू एन ने मुद्रा विनिमय दरों का विस्तृत तकनीकी अध्ययन प्रस्तुत करते हुए बताया है कि यूएसडी/जेपीवाई विनिमय दर में आई तेज गिरावट ने नीचे की तरफ एक बेहद मजबूत गति पैदा कर दी है। अतिविक्री यानी ओवरसोल्ड स्थितियों के कारण दैनिक स्तर पर भले ही कुछ समय के लिए यह जोड़ी 156.50 और 157.50 के दायरे में सीमित रह सकती है, लेकिन आने वाले एक से तीन हफ्तों के दौरान डॉलर की कमजोरी और येन की मजबूती का रुख हावी रहने की संभावना है। इसमें 156.00 और 155.50 के स्तर प्रमुख समर्थन क्षेत्र बनकर उभर रहे हैं, जबकि मध्यम से लंबी अवधि में इसका जोखिम जनवरी के 152.08 के निचले स्तर तक खिसकने का बना हुआ है।
दैनिक और तीन हफ्तों का तकनीकी परिदृश्य
मुद्रा बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर नजर डालें तो पिछले गुरुवार को अमेरिकी डॉलर में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। शुक्रवार को जब विनिमय दर 156.60 पर थी, तब तकनीकी संकेत स्पष्ट कर रहे थे कि बाजार ओवरसोल्ड स्थिति में होने के बावजूद गिरावट 156.00 तक बढ़ सकती है और 155.50 का निचला स्तर फिलहाल पहुंच से थोड़ा दूर रह सकता है। इसके बाद डॉलर लुढ़ककर 156.06 तक पहुंचा और वहां से हल्का संभलते हुए 156.86 के स्तर पर लगभग सपाट बंद हुआ, जो महज 0.06 प्रतिशत की मामूली बढ़त थी। तात्कालिक रूप से बिकवाली का भारी दबाव कुछ थमता दिखा है, जिससे मौजूदा कारोबारी सत्र में डॉलर 156.50 से 157.50 के बीच कंसोलिडेट करता नजर आ सकता है।
वहीं अगर एक से तीन हफ्तों के व्यापक दायरे की बात करें, तो 23 अक्टूबर को जब यह दर 156.60 पर चल रही थी, तब यह रेखांकित किया गया था कि मंदी की तेज गति डॉलर को और नीचे धकेल सकती है। विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि जब तक डॉलर 157.80 के कड़े रेजिस्टेंस यानी प्रतिरोध स्तर से नीचे बना रहता है, तब तक 156.00 और 155.50 के सपोर्ट स्तरों की तरफ गिरावट का दृष्टिकोण पूरी तरह बरकरार रहेगा। 157.80 का स्तर एक बेहद अहम तकनीकी सीमा बना हुआ है जिसके टूटने के बाद ही डॉलर में किसी नए उछाल की गुंजाइश बनेगी।
एशियाई सत्र में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और केंद्रीय बैंकों की नीतियां
सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी पर नए सिरे से बिकवाली का दबाव देखा गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जारी गिरावट ने शुक्रवार को छुए गए 18 सितंबर के बाद के सबसे निचले स्तर से डॉलर की संभावित रिकवरी को रोक दिया। दूसरी तरफ, बैंक ऑफ जापान के नीतिगत रुख में सख्ती यानी हॉकिश रुख के संकेत मिलने से जापानी मुद्रा को अतिरिक्त सहारा मिल रहा है। हालांकि, फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की आगामी नीतिगत बैठकों के मद्देनजर कारोबारी सतर्क हैं, जिसके चलते गिरावट एक सीमित दायरे में बंधी रह सकती है।
इसी बीच एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर टिका रहा और डॉलर की नई बिकवाली के चलते महीने के उच्चतम स्तर के करीब कारोबार करता दिखा। कच्चे तेल की कीमतों में आई हल्की नरमी और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में गिरावट ने डॉलर की तीन सप्ताह के निचले स्तर से वापसी की कोशिशों पर लगाम लगा दी है। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अटकलों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बल दिया है, हालांकि मंगलवार से शुरू हो रही फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक से पहले बहुत बड़ी तेजी सीमित नजर आ रही है।
कमोडिटी बाजार: सोना संभला, कच्चे तेल में नरमी
बहुमूल्य धातुओं के बाजार में सोना यानी एक्सएयू/यूएसडी पिछले सप्ताह की भारी गिरावट के बाद मामूली बढ़त को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है। बीते हफ्ते सोने के दाम टूटकर 3,975 डॉलर प्रति औंस तक चले गए थे, जो अगस्त के बाद का इसका सबसे निचला स्तर था। मध्य पूर्व में तनाव कम करने के लिए जारी कूटनीतिक प्रयासों से कच्चे तेल के भाव में जो हल्की गिरावट आई है, उसने सोने की कीमतों को आधार प्रदान किया है।
कच्चे तेल के मोर्चे पर वैश्विक स्तर पर भारी उठापटक देखी गई है। ब्रेंट क्रूड करीब 7 प्रतिशत के उछाल के साथ 119.50 अमेरिकी डॉलर के मार्च के उच्चतम स्तर के बेहद करीब पहुंच चुका है। ऊर्जा की इन ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक गतिविधियों के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश और मुद्रास्फीति के रुझानों का बारीकी से आकलन कर रहे हैं।
ट्रेजरी बॉन्ड, टेक शेयर और कार्डानो में गिरावट
अमेरिकी बॉन्ड बाजार में लगातार दूसरे सप्ताह तेजी देखी गई। इस खरीदारी के चलते 10 वर्षीय और 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड क्रमशः 5 प्रतिशत और 5.33 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिससे यील्ड कर्व में फ्लैटनिंग यानी चपटापन दर्ज किया गया। दूसरी तरफ, शेयर बाजारों के लिए समय चुनौतीपूर्ण बना हुआ है और प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों ने लगातार दूसरे हफ्ते नुकसान दर्ज किया है। आगे कई बड़े केंद्रीय बैंकों की बैठकें और प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में कार्डानो पर लगातार बिकवाली हावी है। अक्टूबर की शुरुआत से हर हफ्ते 20 प्रतिशत से अधिक टूटने के बाद यह लगातार तीसरे सप्ताह गिरते हुए 0.202 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है। डेरिवेटिव्स संकेतकों की कमजोरी, बेयरिश ऑन-चेन डेटा और बिगड़ते तकनीकी ढांचे के कारण इसमें और गिरावट का जोखिम बना हुआ है।
3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव और भविष्य की नीतिगत दिशा
अमेरिकी डॉलर के लिए 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव अत्यंत निर्णायक दौर लेकर आ रहे हैं। वित्तीय बाजार यह मानकर चल रहे हैं कि फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसे माहौल में अमेरिकी कांग्रेस के नियंत्रण को लेकर होने वाली राजनीतिक जंग वहां की राजकोषीय प्राथमिकताओं को नया आकार दे सकती है, जिसका परोक्ष असर 2027 में अमेरिकी मौद्रिक नीति की चाल पर भी दिखाई दे सकता है। आगामी दिनों में मुद्रास्फीति, राजनीतिक स्थिरता और केंद्रीय बैंकों के कदम मिलकर विदेशी मुद्रा बाजार की रूपरेखा तय करेंगे।


















