पश्चिम बंगाल में हाल ही में एक 12 साल की बच्ची के साथ हुई गैंगरेप और हत्या की घटना के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था। इस मामले के आरोपी प्रभास मंडल को पुलिस ने एक एनकाउंटर में मार गिराया है। यह वही स्थान था जहाँ मासूम बच्ची की लाश मिली थी। इस घटना के बाद पुलिस ने मामले में शामिल चौथे आरोपी कबीर मोल्लाह को भी गिरफ्तार कर लिया है। इस वीभत्स घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया था, और स्थिति इतनी गंभीर थी कि आरोपी की मां ने तक अपने बेटे की लाश लेने से मना कर दिया, यह कहते हुए कि उसने पूरे परिवार को शर्मसार किया है।
हालांकि, इस एनकाउंटर पर राजनीति भी शुरू हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इसे जंगलराज का उदाहरण बताते हुए निशाना साधा है। महुआ मोइत्रा का कहना है कि राज्य में योगी आदित्यनाथ का मॉडल लागू किया जा रहा है, जिसे लोग स्वीकार नहीं करेंगे। दूसरी तरफ, जब ममता बनर्जी प्रोटेस्ट मार्च में शामिल हुईं, तो जनता ने उनके जुलूस पर अंडे फेंके और चोर-चोर के नारे लगाए। भाजपा नेताओं का तर्क है कि ममता सरकार के कार्यकाल में पुलिस ने अपराधियों को संरक्षण दिया, जैसा कि आर. जी. कर अस्पताल मामले में सबूतों को मिटाने की कोशिश से स्पष्ट हुआ। अब शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पुलिस को खुली छूट मिल रही है, जिससे राज्य में अपराधियों का डर वापस लौट रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना पुलिस के खौफ के न तो निवेश संभव है और न ही विकास।
FBI का ऑपरेशन हार्डबॉल: गैंगस्टर्स पर अंतरराष्ट्रीय नकेल
दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ अमेरिका की Federal Bureau of Investigation यानी FBI ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन हार्डबॉल' का नाम दिया गया है। इसके तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप में 50 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में गैंग के 24 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, साथ ही एक हजार किलो से अधिक नशीले पदार्थ और बड़ी मात्रा में हथियार जब्त किए गए हैं। यह ऑपरेशन कनाडा और यूरोपियन एजेंसियों के सहयोग से चलाया जा रहा है।
FBI ने अपनी जांच में पाया कि जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के इशारे पर उसका गिरोह अमेरिका, मेक्सिको, कनाडा और यूरोप में नशीले पदार्थों की तस्करी, हत्या, वसूली और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम दे रहा था। इस पूरे रैकेट की बागडोर गोल्डी बराड़ के हाथों में थी। छापेमारी के दौरान गोल्डी बराड़ नहीं मिला, जिसके बाद FBI ने उसे मोस्ट वांटेड घोषित कर 50 हजार डॉलर का इनाम रखा है। कुल 34 गुर्गों के खिलाफ अमेरिका में कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
इस मामले ने पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। FBI ने पंजाब पुलिस के इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा को इस नेटवर्क का हिस्सा बताया है और उनके प्रत्यर्पण की मांग की है। आरोप है कि होशियारपुर के टांडा थाने में तैनात यह अधिकारी जग्गू भगवानपुरिया गैंग से जुड़ा था और उसने एक अमेरिकी परिवार से 4 लाख डॉलर की वसूली कराई थी। इस खुलासे के बाद पंजाब पुलिस ने नागरा को लाइन हाजिर कर दिया है और जालंधर रेंज के DIG स्तर पर जांच के आदेश दिए गए हैं। यह पूरा घटनाक्रम भारत की जेलों में मौजूद सुरक्षा खामियों को उजागर करता है, जहाँ से अपराधी आसानी से न केवल अपना नेटवर्क चला रहे हैं, बल्कि वीडियो पोस्ट कर धमकियां भी दे रहे हैं। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दबाव बढ़ रहा है कि जेल के भीतर से होने वाली इस आपराधिक गतिविधियों को पूरी तरह बंद किया जाए।











