बिहार की राजनीति में एक नया विवाद तब खड़ा हो गया, जब राजधानी पटना की दीवारों पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह के खिलाफ तीखे पोस्टर नजर आए। विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया के बीच लगे इन पोस्टरों ने न सिर्फ सुनील सिंह, बल्कि उनके पूरे परिवार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।
पोस्टर में क्या लिखा है
पोस्टरों में सुनील सिंह को 'बिहार का नटवरलाल' कहकर संबोधित किया गया है। एक पोस्टर पर तंज भरे अंदाज में लिखा गया — 'बिहार के नटवरलाल को MLC बनने पर बधाई'। इतना ही नहीं, एक अन्य पोस्टर में उन्हें 'धोखाधड़ी और लूट-खसोट करने के मुखिया' तक बताया गया और लिखा गया कि महागठबंधन की ओर से उन्हें एमएलसी बनने पर बधाई। पोस्टरों का पूरा फोकस सुनील सिंह और उनके परिजनों पर धोखाधड़ी तथा गबन के आरोप मढ़ने पर रहा।
लाखों रुपये के गबन का दावा
पोस्टर लगाने वालों ने अपने आरोपों को आंकड़ों के साथ पेश किया है। दावा किया गया है कि सुनील सिंह के विरुद्ध दर्ज एक एफआईआर में यादव समाज की एक महिला से 16.5 लाख रुपये के कथित गबन का मामला दर्ज है। आरोपों का दायरा यहीं नहीं रुकता — उनकी पत्नी के नाम पर 23.5 लाख रुपये और बेटे यशस्वी के नाम पर 3.75 लाख रुपये के कथित गबन का जिक्र भी पोस्टरों में किया गया है। इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर पूरे परिवार को निशाने पर लिया गया है। फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है कि ये पोस्टर किसने और किसके इशारे पर लगवाए।
उम्मीदवारी पर पार्टी के भीतर भी उठे थे सवाल
सुनील सिंह को लेकर विवाद नया नहीं है। हाल ही में जब RJD ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए विधान परिषद चुनाव के लिए मैदान में उतारा, तो पार्टी के भीतर से ही असहमति के सुर उठे। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस फैसले पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने तेजस्वी यादव और सुनील सिंह का नाम लिए बिना एक पोस्ट के जरिये पार्टी के इस निर्णय की आलोचना की थी। हालांकि इन सबके बावजूद सुनील सिंह तीसरी बार RJD के टिकट पर एमएलसी चुने जाने में सफल रहे।
नौ सीटों पर बिना मतदान चुने गए सभी प्रत्याशी
बिहार विधान परिषद की 9 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया 11 जून को पूरी हुई, मगर इस बार मतपेटी तक नौबत ही नहीं आई। जितनी सीटें खाली थीं, ठीक उतने ही प्रत्याशी मैदान में थे और किसी ने भी अपना नामांकन वापस नहीं लिया। नतीजतन सभी 9 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
इन 9 में से 8 सीटें सत्तारूढ़ एनडीए के खाते में गईं, जबकि एक सीट RJD को मिली। सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को हुआ, जिसके हिस्से में 4 सीटें आईं। भाजपा की ओर से भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह, राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी संजय मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पांडे निर्विरोध एमएलसी चुने गए।













