तंगहाली में भी फौज पर तिजोरी खाली: पाकिस्तान ने रक्षा बजट 18% बढ़ाकर 3 लाख करोड़ किया, गधे बेचकर इकॉनमी बचाने की कोशिशपाकिस्तान
13 घंटे पहले· 3

तंगहाली में भी फौज पर तिजोरी खाली: पाकिस्तान ने रक्षा बजट 18% बढ़ाकर 3 लाख करोड़ किया, गधे बेचकर इकॉनमी बचाने की कोशिश

भुखमरी और महंगाई से जूझ रहे पाकिस्तान ने 2026-27 के बजट में रक्षा खर्च 18% बढ़ाकर 3 लाख करोड़ रुपए कर दिया, जबकि गिरती अर्थव्यवस्था को चीन को गधों का मांस-खाल बेचकर संभालने की योजना है। बढ़ते टैक्स और कटौती से नाराज जनता POK-बलूचिस्तान के बाद अब इस्लामाबाद की सड़कों पर उतर आई है।

एक ऐसा देश जहां आम आदमी रोटी के लिए तरस रहा हो, वहां की सरकार अगर अपनी फौज की झोली में 3 लाख करोड़ रुपए डाल दे, तो जनता का सब्र टूटना लाजमी है। पाकिस्तान इस वक्त ठीक इसी मोड़ पर खड़ा है। भुखमरी, कंगाली और आसमान छूती महंगाई के बीच शहबाज शरीफ सरकार ने अपने नए बजट में राहत देने के बजाय रक्षा खर्च पर खुलकर पैसा बहाया है, और इसी फैसले ने पहले से सुलग रहे मुल्क में आग और भड़का दी है।

बजट में सेना पर मेहरबानी, जनता पर बोझ

नेशनल असेंबली में पेश किए गए बजट में सरकार ने साल 2026-27 के लिए रक्षा बजट में करीब 18 फीसदी की भारी बढ़ोतरी की है और इसे बढ़ाकर 3 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपए कर दिया है। पिछले साल यह आंकड़ा 2.595 लाख करोड़ रुपए था, यानी इस बार 405 अरब रुपए का इजाफा किया गया है। यह रक्षा बजट देश के कुल बजट का तकरीबन 15% हिस्सा है। साफ संकेत है कि सरकार जनता का पेट काटकर अपनी फौज को पाल रही है।

किसके हिस्से में कितना पैसा

वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब की ओर से पेश इस बजट को टुकड़ों में देखें तो समझ आता है कि अवाम पर टैक्स का बोझ क्यों लादा जा रहा है। बजट दस्तावेजों के मुताबिक सबसे बड़ा हिस्सा सेना के खाते में जा रहा है।

  • पाकिस्तान आर्मी: थलसेना के लिए 1.284 लाख करोड़ रुपए तय किए गए हैं, जो पिछले साल 1.184 लाख करोड़ रुपए थे।
  • पाकिस्तान एयरफोर्स: वायुसेना के हिस्से में 573 अरब रुपए आए हैं।
  • पाकिस्तान नेवी: नौसेना को 293 अरब रुपए दिए जा रहे हैं।

इसके अलावा सैनिकों की मिलिट्री पेंशन के लिए 822 अरब रुपए रखे गए हैं, जो पिछले साल 742 अरब रुपए थे। फौजियों की सैलरी और भत्तों पर 967 अरब रुपए और सेना के ऑपरेशन्स पर 743 अरब रुपए खर्च होंगे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि देश को इस हालत में पहुंचाने के बाद भी विकास कार्यों के बजट को लगभग पूरी तरह दबा दिया गया है।

गधों के भरोसे टिकी अर्थव्यवस्था

एक तरफ हथियारों पर इतना पैसा, दूसरी तरफ इकॉनमी का आलम यह है कि सरकार को गधे बेचकर इज्जत बचानी पड़ रही है। पाकिस्तान सरकार के पेश किए गए 'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' में गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए 'गधों के मांस और खाल के निर्यात' को एक बड़ा जरिया बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार देश में गधों की आबादी बढ़कर 62 लाख तक पहुंच चुकी है, और अब इन्हें चीन को बेचकर डूबती अर्थव्यवस्था को सहारा देने की कोशिश हो रही है।

POK-बलूचिस्तान से होती हुई बगावत इस्लामाबाद तक

जनता का यही सवाल अब सड़कों पर गूंज रहा है कि जिस मुल्क की आवाम पाई-पाई को तरस रही हो, वहां सरकार की प्राथमिकता हथियार कैसे हो सकते हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) और बलूचिस्तान में बिजली, आटे और आजादी को लेकर महीनों से चल रही बगावत की आग अब राजधानी इस्लामाबाद तक पहुंच गई है। संसद के भीतर जैसे ही वित्त मंत्री ने बजट भाषण शुरू किया, विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा और नारेबाजी की।

सड़कों पर फूटा गुस्सा

संसद के बाहर भी हालात बेकाबू दिखे। इस्लामाबाद की सड़कों पर हजारों की तादाद में आम नागरिक, सरकारी कर्मचारी और गरीब तबका उतर आया। मिडिल ईस्ट के संकट के चलते पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहले ही 40% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं और महंगाई दर 10% के पार जा चुकी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार आईएमएफ के कर्ज की शर्तें पूरी करने के लिए उन पर भारी टैक्स लाद रही है, मगर वह सारा पैसा विकास के बजाय सेना और हथियारों पर उड़ाया जा रहा है।

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