अमेरिका ने महज़ कुछ दिनों के भीतर भारत से जुड़े जहाज़ पर तीसरी बार हमला किया है। इस बार ओमान के बंदरगाह के नज़दीक भारतीय चालक दल वाले एक मर्चेंट जहाज़ को निशाना बनाया गया। FSUI के मुताबिक, गुरुवार को ओमान के तट के पास भारत से ताल्लुक रखने वाले एक और जहाज़ MT जलवीर पर हमला किया गया। जानकारी के अनुसार इस जहाज़ पर 20 से अधिक नाविक मौजूद थे।
ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने भी पुष्टि की कि उसे इस घटना की जानकारी है और वह स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर हालात पर काम कर रहा है। दूतावास ने अपने बयान में कहा, "हमें आज ओमान के शिनास बंदरगाह के पास एक जहाज़ से जुड़ी घटना की सूचना मिली है। हम पूरी स्थिति पर बारीकी से निगरानी रख रहे हैं और आगे की जानकारी जुटाने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं।"
भारतीय जहाज़ों पर अमेरिका ने कब-कब किया हमला?
- कई रिपोर्टों में इस जहाज़ को MT जलवीर के रूप में पहचाना गया है। हालांकि अधिकारियों की ओर से अब तक घटना के स्वरूप, हुए नुकसान की मात्रा या किसी के हताहत होने को लेकर कोई आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया है। बीते तीन दिनों में ओमान के आसपास जहाज़ से जुड़ी यह तीसरी घटना है।
- पहली घटना 8 जून को MT मैरिवेक्स के साथ पेश आई थी, जब समुद्री सुरक्षा सूत्रों के अनुसार एक संदिग्ध हमले के चलते टैंकर में आग भड़क उठी थी। उस जहाज़ पर सवार सभी 24 भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित बताया गया था।
- दूसरी घटना 10 जून को सामने आई, जब ओमान की खाड़ी में टैंकर MT सेटेबेलो को निशाना बनाया गया। इस जहाज़ पर भी 24 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के मुताबिक, 21 लोगों को बचा लिया गया, लेकिन शुरुआत में लापता बताए गए तीन भारतीय नाविकों की मौत की बाद में पुष्टि हो गई।
भारत ने जताया कड़ा विरोध, अमेरिका ने क्या कहा?
सेटेबेलो पर हुए हमले को लेकर नई दिल्ली ने सख़्त राजनयिक रुख अपनाया। भारत ने देश में मौजूद सबसे वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को तलब कर इस हमले पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा करते हुए जहाज़ पर सवार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
बाद में अमेरिका ने दावा किया कि उसके सैनिकों ने टैंकर पर "सटीक" हमला किया, क्योंकि कथित तौर पर उसने अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन नहीं किया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि यह कार्रवाई ईरानी तेल खेप को निशाना बनाने वाले उसके जारी समुद्री अभियानों का हिस्सा थी।













