राजस्थान की राजधानी जयपुर में उस वक्त भारी राजनीतिक बवाल मच गया, जब कांग्रेस पार्टी के आला नेताओं ने सड़कों पर उतरकर केंद्र की सत्ताधारी सरकार के खिलाफ एक विशाल आंदोलन छेड़ दिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पुलिस कस्टडी में लिए जाने और देश भर में गूंज रहे नीट (NEET) परीक्षा विवाद को लेकर पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं का गुस्सा जयपुर की सड़कों पर फूट पड़ा, जिससे शहर के कई हिस्सों में जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया।
अंबेडकर सर्किल पर जोरदार हंगामा
इस बड़े सियासी संग्राम का मुख्य केंद्र अंबेडकर सर्किल रहा, जहां कांग्रेस कमेटी के सदस्यों और एनएसयूआई (NSUI) के छात्र नेताओं की भारी भीड़ इकट्ठा हुई। प्रदेश इकाई के दिग्गज चेहरों की सीधी भागीदारी ने इस प्रदर्शन को बेहद उग्र बना दिया। हाथों में तख्तियां लिए और झंडे लहराते हुए, प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय नेतृत्व की कथित दमनकारी नीतियों के खिलाफ जोरदार और लगातार नारेबाजी की। हालात की गंभीरता और नेताओं के आक्रोश को भांपते हुए, स्थानीय प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया और वहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
तानाशाही और लोकतंत्र की हत्या के आरोप
धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं के हुजूम को संबोधित करते हुए पीसीसी (PCC) अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने हुकूमत की मंशा पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने तर्क दिया कि आज देश का युवा सड़कों पर है और शिक्षा व्यवस्था में हुई धांधली को लेकर सीधे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है, लेकिन जवाबदेह लोगों पर गाज गिराने के बजाय सरकार सिर्फ विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाने का काम कर रही है। व्यवस्था पर सीधा प्रहार करते हुए डोटासरा ने कहा, "सरकार पूरी तरह तानाशाही रवैये पर उतर आई है।"
इसी मंच से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र पर संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार करने का गंभीर इल्जाम लगाया। गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के मुख्य विपक्षी नेता को इस तरह बलपूर्वक हिरासत में लेना आम नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन है। उन्होंने एक बेहद सनसनीखेज दावा करते हुए बताया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान राहुल गांधी के साथ हाथापाई और मारपीट भी की गई है। इस घटनाक्रम पर भारी नाराजगी जताते हुए पूर्व सीएम ने चेतावनी दी कि कांग्रेस पार्टी इस तरह की बर्बरता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी और पूरे भारत में इसके खिलाफ अपना व्यापक जन-आंदोलन जारी रखेगी।
जनपथ पर जाम और नेताओं की गिरफ्तारी
यह विरोध प्रदर्शन उस समय अपने चरम पर पहुंच गया जब अपना सख्त एतराज जताने के लिए अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा सीधे जनपथ की मुख्य सड़क के बीचों-बीच धरने पर बैठ गए। इस हाई-प्रोफाइल धरने से शहर के एक प्रमुख मार्ग का यातायात ठप हो गया। कानून और व्यवस्था को दोबारा बहाल करने तथा सड़क को खाली कराने के लिए आखिरकार पुलिस महकमे को सख्त कदम उठाने पड़े।
अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस टीम ने धरने को खत्म कराने की कार्रवाई शुरू की। प्रशासन ने मौके से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ डोटासरा, पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, जयपुर जिला अध्यक्ष सुनील शर्मा और मौजूदा विधायक रफ़ीक़ ख़ान समेत कई बड़े चेहरों को अपनी हिरासत में ले लिया। इसके अलावा वहां हंगामा कर रहे एनएसयूआई के दर्जनों कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने पकड़ लिया। इन सभी वीआईपी नेताओं और प्रदर्शनकारियों को तुरंत मौके पर बुलाई गई विशेष पुलिस बसों में भरा गया और इलाके में शांति सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सीधे ज्योति नगर थाने ले जाया गया।



















