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संसदीय कानून के बावजूद पार्टी मंचों पर वंदे मातरम के केवल 2 पद गाने पर अड़ी कांग्रेस, बीजेपी का तीखा हमलाराजनीति
19 अग॰ 2026, 1:51 am (1 दिन पहले)· 2

संसदीय कानून के बावजूद पार्टी मंचों पर वंदे मातरम के केवल 2 पद गाने पर अड़ी कांग्रेस, बीजेपी का तीखा हमला

संसद से पारित नए कानून के बावजूद कांग्रेस ने अपनी बैठकों और कांग्रेस शासित राज्यों के पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सिर्फ दो ही पैरा गाने का फैसला किया है, जिस पर बीजेपी ने हमला बोला है।

संसद द्वारा पारित नए कानून के बाद देश में राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि वह अपने संगठनात्मक कार्यक्रमों और कांग्रेस शासित राज्यों में पार्टी के आयोजनों के दौरान वंदे मातरम के पूरे छह पैरा के बजाए केवल शुरुआती दो पैरा ही गाएगी। हालांकि पार्टी नेताओं का कहना है कि वे सरकारी आयोजनों में कानून का पूरी तरह पालन करेंगे, लेकिन पार्टी के अपने मंचों पर 90 साल से चली आ रही व्यवस्था को ही लागू रखा जाएगा। इस घोषणा के बाद से भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है, जबकि कांग्रेस अपनी बात पर कायम रहने की बात कह रही है।

गोवा के कार्यक्रम से भड़का विवाद और नया संसदीय कानून

यह पूरा विवाद उस समय गहराया जब गोवा में आयोजित कांग्रेस पार्टी के एक विशेष कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शामिल हुए थे। इस आयोजन के दौरान राष्ट्रगीत वंदे मातरम के कुल छह पदों में से केवल शुरुआती दो पद ही गाए गए। जैसे ही यह बात सामने आई, भारतीय जनता पार्टी ने इसे राष्ट्रगीत के अनादर से जोड़ते हुए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। इसके तुरंत बाद कांग्रेस नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि वे पार्टी के मंचों से पूरा राष्ट्रगीत नहीं गाएंगे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने इस संबंध में पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकारी कार्यक्रमों के दौरान पार्टी कानून का पूरा सम्मान करेगी और वंदे मातरम के सभी छह पैरा गाए जाएंगे। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पार्टी के अपने निजी आयोजनों में केवल दो ही स्टैंजा गाए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि संसद के पिछले सत्र में ही केंद्र सरकार ने एक नया कानून पारित किया है, जिसके तहत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सभी छह पदों को गाना अनिवार्य बना दिया गया है। इस कानून के प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रगीत का अनादर करने या नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इस कानून के बावजूद कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि सरकार चाहे जो कदम उठाए या जेल भेजे, वे वही दो पैरा गाएंगे जो पिछले 90 वर्षों से गाए जाते रहे हैं।

सोनिया गांधी से जुड़ा वाकया, लाल किला और खरगे का पलटवार

इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित मुख्य समारोह में वंदे मातरम के सभी छह पैरा गाए गए थे। हालांकि, उसी दिन कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के दौरान एक अलग दृश्य देखने को मिला। जब वहां वंदे मातरम बज रहा था, तब कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को इसे बीच में ही रुकवाने की कोशिश करते हुए देखा गया था। भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को तुरंत एक बड़ा मुद्दा बनाया था और कांग्रेस की राष्ट्रभक्ति पर सवाल खड़े करते हुए चौतरफा हमला बोला था।

गोवा में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। खरगे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी से राष्ट्रभक्ति का पाठ सीखने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए सवाल उठाया कि महात्मा गांधी से लेकर सरदार वल्लभभाई पटेल तक देश के तमाम महान स्वतंत्रता सेनानियों ने भी वंदे मातरम के केवल दो ही पैरा गाए थे, तो क्या वे सभी लोग भी देशद्रोही थे? खरगे ने जोर देकर कहा कि देशभक्ति किसी पार्टी के सर्टिफिकेट की मोहताज नहीं है।

90 साल पुराना इतिहास, मुस्लिम लीग और बीजेपी-कांग्रेस में जुबानी जंग

इस राजनीतिक टकराव के बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज भी 90 साल पुरानी उसी गलती को दोहरा रही है, जो उसने मुस्लिम लीग के दबाव में की थी। रविशंकर प्रसाद का आरोप है कि कांग्रेस केवल मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में राष्ट्रगीत का पूरा सम्मान करने से कतरा रही है और इसका गंभीर राजनीतिक खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा। दूसरी ओर, महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी उन्हें देशभक्ति न सिखाए। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस कार्यकर्ता वही करेंगे जो पार्टी हाईकमान तय करेगा और सिर्फ कानून बना देने से ऐतिहासिक परंपराएं नहीं बदल जातीं।

ऐतिहासिक रूप से जब बंकिम चंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम की रचना की थी, तब यह भारतीय स्वाधीनता संग्राम का सबसे बड़ा तराना और भारत माता की पावन वंदना था। बंकिम बाबू ने इसे बिना किसी धार्मिक भेदभाव या हिंदू-मुस्लिम फर्क के रचा था। हालांकि, उस दौर में मुस्लिम लीग ने इसके कुछ अंशों पर आपत्ति जताते हुए इसका विरोध किया था, जिसके बाद सर्वसम्मति से इसके केवल दो पैरा गाने की परंपरा शुरू हुई थी। अब जबकि देश की संसद ने कानून बनाकर सभी के लिए पूरा वंदे मातरम गाना अनिवार्य कर दिया है, तब इस पर हो रही राजनीति ने एक बार फिर 90 साल पुराने बहस के पन्नों को पलट दिया है।

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सवाल-जवाब

वंदे मातरम गाने को लेकर विवाद क्यों खड़ा हुआ है?
संसद द्वारा राष्ट्रगीत के सभी छह पैरा गाना अनिवार्य करने का कानून बनाए जाने के बावजूद कांग्रेस ने अपने पार्टी कार्यक्रमों में केवल शुरुआती दो पैरा ही गाने का फैसला किया है।
राष्ट्रगीत से जुड़े नए संसदीय कानून में उल्लंघन पर क्या सजा तय की गई है?
नए कानून के तहत राष्ट्रगीत का अनादर करने या इससे जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर दोषी व्यक्ति को तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
सरकारी और पार्टी कार्यक्रमों को लेकर कांग्रेस का क्या रुख है?
कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद के अनुसार, सरकारी कार्यक्रमों में कानून का पालन करते हुए पूरा वंदे मातरम गाया जाएगा, लेकिन पार्टी के अपने आयोजनों में 90 साल पुरानी परंपरा के तहत दो ही पैरा गाए जाएंगे।
मल्लिकार्जुन खरगे ने गोवा के कार्यक्रम में बीजेपी के आरोपों पर क्या कहा?
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस को बीजेपी से देशभक्ति का पाठ सीखने की जरूरत नहीं है और उन्होंने सवाल किया कि दो पैरा गाने वाले महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे सेनानी क्या देशद्रोही थे।
कांग्रेस के फैसले पर बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद की क्या प्रतिक्रिया रही?
रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी मुस्लिम वोट बैंक की खातिर मुस्लिम लीग के दबाव में 90 साल पहले की गई गलती को दोहरा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·1 दिन पहले

यह विवाद सांस्कृतिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण को गहराता है, जिसका असर पर्यटन और देश की सांस्कृतिक छवि पर भी पड़ सकता है। वैश्विक पर्यटकों और सांस्कृतिक उत्सवों में एकरूपता की उम्मीद की जाती है, लेकिन घरेलू मंचों पर ऐसे मतभेद सांस्कृतिक नीतियों में अनिश्चितता का संदेश देते हैं, जो वैश्विक स्तर पर देश की ब्रांडिंग को प्रभावित कर सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

संसद द्वारा पारित नए कानून में वंदे मातरम के सभी छह पदों को अनिवार्य करना और नियमों के उल्लंघन पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान करना एक बड़ा विधिक मोड़ है। एक तरफ जहां सरकार इस विधायी प्रावधान के तहत कानूनी सख्ती की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का जेल जाने की चेतावनी के बावजूद अपने 90 पुराने संगठनात्मक नियमों पर अड़े रहना सीधे तौर पर एक कानूनी टकराव को जन्म दे रहा है। यदि यह गतिरोध अदालतों तक पहुंचता है, तो यह कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्वतंत्रता के बीच एक अहम न्यायिक दृष्टांत बन सकता है।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·1 दिन पहले

यह विधायी गतिरोध राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकता है। यदि यह मामला अदालतों में उलझता है, तो इससे केंद्र-राज्य संबंधों और दलीय स्वतंत्रता पर दूरगामी संवैधानिक प्रभाव पड़ सकते हैं, खासकर जब विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में इसके क्रियान्वयन पर संशय बना हुआ है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

वंदे मातरम पर बने नए संसदीय कानून और कांग्रेस के रुख से उपजा यह विवाद अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर कॉर्पोरेट गवर्नेंस, बाजार की स्थिरता और निवेशकों के सेंटीमेंट पर मनोवैज्ञानिक असर डाल सकता है। जब देश की मुख्य राजनीतिक पार्टियां तीन साल तक की जेल वाले वैधानिक प्रावधानों के आमने-सामने खड़ी होती हैं, तो इससे नीतिगत अनिश्चितता का संदेश जाता है। यदि यह टकराव लंबा खिंचा, तो यह नीतिगत सुधारों की गति को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर मैक्रो-इकोनॉमिक रुझानों और कारोबारी माहौल पर पड़ना तय है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

वरिष्ठ संवाददाता होने के नाते मेरा आकलन है कि इस वैधानिक टकराव का सबसे गहरा असर आगामी विधानसभा चुनावों की ज़मीनी राजनीति और ध्रुवीकरण पर पड़ेगा। जब कांग्रेस पार्टी तीन साल की तक की सज़ा वाले प्रावधानों और 90 साल पुरानी परंपरा का हवाला देकर अपने मंचों पर दो ही पद गाने पर अड़ी है, तो इससे वैचारिक मतभेद तीव्र होंगे। उत्तर प्रदेश और अन्य चुनावी राज्यों के स्थानीय संगठन इसे अपनी राजनीतिक पहचान से जोड़कर धरातल पर भुनाने की कोशिश करेंगे, जिससे प्रशासनिक तंत्र और कानून-व्यवस्था के बीच एक नया वैचारिक संघर्ष तय माना जा रहा है।

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