संसद द्वारा पारित नए कानून के बाद देश में राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि वह अपने संगठनात्मक कार्यक्रमों और कांग्रेस शासित राज्यों में पार्टी के आयोजनों के दौरान वंदे मातरम के पूरे छह पैरा के बजाए केवल शुरुआती दो पैरा ही गाएगी। हालांकि पार्टी नेताओं का कहना है कि वे सरकारी आयोजनों में कानून का पूरी तरह पालन करेंगे, लेकिन पार्टी के अपने मंचों पर 90 साल से चली आ रही व्यवस्था को ही लागू रखा जाएगा। इस घोषणा के बाद से भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है, जबकि कांग्रेस अपनी बात पर कायम रहने की बात कह रही है।
गोवा के कार्यक्रम से भड़का विवाद और नया संसदीय कानून
यह पूरा विवाद उस समय गहराया जब गोवा में आयोजित कांग्रेस पार्टी के एक विशेष कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शामिल हुए थे। इस आयोजन के दौरान राष्ट्रगीत वंदे मातरम के कुल छह पदों में से केवल शुरुआती दो पद ही गाए गए। जैसे ही यह बात सामने आई, भारतीय जनता पार्टी ने इसे राष्ट्रगीत के अनादर से जोड़ते हुए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। इसके तुरंत बाद कांग्रेस नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि वे पार्टी के मंचों से पूरा राष्ट्रगीत नहीं गाएंगे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने इस संबंध में पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकारी कार्यक्रमों के दौरान पार्टी कानून का पूरा सम्मान करेगी और वंदे मातरम के सभी छह पैरा गाए जाएंगे। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पार्टी के अपने निजी आयोजनों में केवल दो ही स्टैंजा गाए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि संसद के पिछले सत्र में ही केंद्र सरकार ने एक नया कानून पारित किया है, जिसके तहत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सभी छह पदों को गाना अनिवार्य बना दिया गया है। इस कानून के प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रगीत का अनादर करने या नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इस कानून के बावजूद कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि सरकार चाहे जो कदम उठाए या जेल भेजे, वे वही दो पैरा गाएंगे जो पिछले 90 वर्षों से गाए जाते रहे हैं।
सोनिया गांधी से जुड़ा वाकया, लाल किला और खरगे का पलटवार
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित मुख्य समारोह में वंदे मातरम के सभी छह पैरा गाए गए थे। हालांकि, उसी दिन कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के दौरान एक अलग दृश्य देखने को मिला। जब वहां वंदे मातरम बज रहा था, तब कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को इसे बीच में ही रुकवाने की कोशिश करते हुए देखा गया था। भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को तुरंत एक बड़ा मुद्दा बनाया था और कांग्रेस की राष्ट्रभक्ति पर सवाल खड़े करते हुए चौतरफा हमला बोला था।
गोवा में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। खरगे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी से राष्ट्रभक्ति का पाठ सीखने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए सवाल उठाया कि महात्मा गांधी से लेकर सरदार वल्लभभाई पटेल तक देश के तमाम महान स्वतंत्रता सेनानियों ने भी वंदे मातरम के केवल दो ही पैरा गाए थे, तो क्या वे सभी लोग भी देशद्रोही थे? खरगे ने जोर देकर कहा कि देशभक्ति किसी पार्टी के सर्टिफिकेट की मोहताज नहीं है।
90 साल पुराना इतिहास, मुस्लिम लीग और बीजेपी-कांग्रेस में जुबानी जंग
इस राजनीतिक टकराव के बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज भी 90 साल पुरानी उसी गलती को दोहरा रही है, जो उसने मुस्लिम लीग के दबाव में की थी। रविशंकर प्रसाद का आरोप है कि कांग्रेस केवल मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में राष्ट्रगीत का पूरा सम्मान करने से कतरा रही है और इसका गंभीर राजनीतिक खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा। दूसरी ओर, महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी उन्हें देशभक्ति न सिखाए। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस कार्यकर्ता वही करेंगे जो पार्टी हाईकमान तय करेगा और सिर्फ कानून बना देने से ऐतिहासिक परंपराएं नहीं बदल जातीं।
ऐतिहासिक रूप से जब बंकिम चंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम की रचना की थी, तब यह भारतीय स्वाधीनता संग्राम का सबसे बड़ा तराना और भारत माता की पावन वंदना था। बंकिम बाबू ने इसे बिना किसी धार्मिक भेदभाव या हिंदू-मुस्लिम फर्क के रचा था। हालांकि, उस दौर में मुस्लिम लीग ने इसके कुछ अंशों पर आपत्ति जताते हुए इसका विरोध किया था, जिसके बाद सर्वसम्मति से इसके केवल दो पैरा गाने की परंपरा शुरू हुई थी। अब जबकि देश की संसद ने कानून बनाकर सभी के लिए पूरा वंदे मातरम गाना अनिवार्य कर दिया है, तब इस पर हो रही राजनीति ने एक बार फिर 90 साल पुराने बहस के पन्नों को पलट दिया है।























