अजमेर नगर निगम के सभी 80 वार्डों के चुनाव परिणाम पूरी तरह स्पष्ट हो चुके हैं, लेकिन नतीजों ने शहर की स्थानीय राजनीति को एक बेहद ही दिलचस्प मोड़ पर ला खड़ा किया है। मतों की पूर्ण गणना के बाद सामने आए आंकड़ों के अनुसार किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हो सका है। भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस शहर में पार्टी को करारा झटका लगा है और कांग्रेस 37 सीटें हासिल करके सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है। इसके बावजूद, बहुमत के लिए आवश्यक आंकड़े तक न पहुंच पाने के कारण अब नगर निगम का अगला मेयर कौन होगा और बोर्ड किस पार्टी का बनेगा, इसका अंतिम निर्णय 11 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन पर टिक गया है।
वार्ड वार परिणाम और सीटों का गणित
नगर निगम के कुल 80 वार्डों में हुए मुकाबले में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत यानी 41 सीटों का आंकड़ा नसीब नहीं हुआ। कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 37 वार्डों में जीत दर्ज की, जो कि बहुमत से केवल 4 सीटें दूर है। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी 32 सीटों पर ही सिमट कर रह गई। इस त्रिशंकु स्थिति में 11 निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने पूरे सियासी समीकरण को बदल दिया है। बिना इन निर्दलीयों के सहयोग के न तो कांग्रेस अपना मेयर बना सकती है और न ही भाजपा। यही कारण है कि दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल अब इन गैर-दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की सेंधमारी
अजमेर लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का एक अभेद्य दुर्ग माना जाता रहा है, जहां पार्टी के वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल जैसे कद्दावर नेताओं का गहरा प्रभाव है। इसके बावजूद भाजपा केवल 32 सीटों तक ही पहुंच सकी। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने बेहतर जमीनी रणनीति और स्थानीय नेताओं की सक्रियता के बल पर बड़ी बढ़त हासिल की। कांग्रेस पार्टी की इस सफलता में राजकुमार जयपाल, विकास चौधरी, रघु शर्मा और रामचंद्र चौधरी जैसे स्थानीय दिग्गजों की मेहनत मुख्य भूमिका में रही। इन नेताओं की रणनीति की बदौलत कांग्रेस 37 वार्डों पर विजय प्राप्त कर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
राजस्थान भर के निकायों का राज्य स्तरीय लेखा-जोखा
पूरे राजस्थान में कुल 309 नगर निकायों के परिणाम सामने आए हैं, जिनकी तुलना में अजमेर का मुकाबला सबसे अधिक रोमांचक रहा है। प्रदेश स्तर पर आए नतीजों के मुताबिक कांग्रेस के खाते में कुल 2 नगर निगम आए हैं। वहीं नगर परिषदों की बात करें तो कुल मुकाबलों में से भारतीय जनता पार्टी ने 21 नगर परिषदों पर जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस को 16 में सफलता मिली है। इसके अलावा छोटी नगर पालिकाओं में भाजपा ने 110 स्थानों पर जीत दर्ज की है, कांग्रेस 95 नगर पालिकाओं में विजयी रही है और निर्दलीय प्रत्याशियों ने 20 नगर पालिकाओं में बाजी मारी है।
वार्ड 80 में बना नया रिकॉर्ड और बाड़ेबंदी की राजनीति
इस चुनाव में वार्ड नंबर 80 से एक नया कीर्तिमान भी स्थापित हुआ। भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रेश साखला की 21 वर्षीया बेटी ने 1,275 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज कर इस पूरे चुनाव की सबसे कम उम्र की पार्षद बनने का गौरव हासिल किया। उधर, नतीजे घोषित होते ही क्रॉस वोटिंग और पार्षदों के टूट जाने की आशंका को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों ने अपने-अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। हालांकि कई निर्दलीय विजेता फिलहाल किसी भी पक्ष को तुरंत समर्थन देने से बच रहे हैं और अपने समर्थकों तथा स्थानीय जनता से सलाह-मशविरा करने के बाद ही कोई अंतिम कदम उठाने की बात कह रहे हैं। भाजपा का दावा है कि कई निर्दलीय मूल रूप से उनकी विचारधारा से जुड़े हैं, जबकि कांग्रेस अपनी बढ़त के आधार पर मेयर की कुर्सी हासिल करने की कोशिश में जुटी है।


















