राजस्थान के झुंझुनूं शहर में एक निजी अस्पताल में हुई सर्जरी के बाद 21 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध हालात में मौत हो जाने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मृतका के परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान महिला को लगातार खून और प्लाज्मा चढ़ाया जाता रहा, लेकिन जब रात को उसकी हालत बिगड़ी तो अस्पताल में कोई डॉक्टर या स्टाफ मौजूद नहीं मिला। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल के बाहर जमकर प्रदर्शन किया और ऑपरेशन करने वाली डॉक्टर समीता सोनी के खिलाफ हत्या जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की। परिवार ने साफ कह दिया है कि जब तक कार्रवाई नहीं होती, वे शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे।
छोटी सी गांठ के इलाज के लिए हुई थी भर्ती
मामला माकड़ो गांव की रहने वाली 21 वर्षीय सुख दिव्या से जुड़ा है, जिसकी शादी योगेश कुमार से हुई थी। परिजनों के मुताबिक दिव्या को गर्भाशय में एक छोटी गांठ की शिकायत थी, जिसके इलाज के लिए 4 जुलाई को उसे झुंझुनूं शहर के एपेक्स स्काई लाइन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद डॉक्टर समीता सोनी ने ऑपरेशन की सलाह दी। भर्ती होने के बाद दिव्या को ग्लूकोज चढ़ाया जाने लगा और उसका खाना-पीना पूरी तरह बंद करवा दिया गया, ताकि सर्जरी की तैयारी की जा सके। अगले दिन यानी 5 जुलाई को दोपहर करीब 2 बजे उसका ऑपरेशन किया गया।
परिजनों का आरोप है कि सर्जरी के दौरान और उसके तुरंत बाद अस्पताल की ओर से बार-बार खून और प्लाज्मा की मांग की गई। कुल मिलाकर दिव्या को चार यूनिट ब्लड और दो यूनिट प्लाज्मा चढ़ाया गया, जो परिवार के लिए ही बड़ी चिंता की बात बन गई थी। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे ऑपरेशन पूरा होने के बाद मरीज को ऑपरेशन थियेटर से बाहर लाया गया। शाम करीब 7 बजे अस्पताल स्टाफ ने परिजनों को यह कहकर आश्वस्त किया कि दिव्या की हालत सामान्य है, उसे जल्द ही वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा और अगली सुबह तक छुट्टी भी मिल जाएगी।
रात होते ही बिगड़ी हालत, कोई डॉक्टर मौके पर नहीं मिला
परिवार को राहत की यह खबर ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई। परिजनों का आरोप है कि रात करीब पौने नौ बजे जब वे दिव्या को देखने अस्पताल पहुंचे तो वहां कोई डॉक्टर या स्टाफ मौजूद नहीं था। उस वक्त दिव्या के मुंह से झाग निकल रहे थे और उसकी हालत काफी गंभीर दिख रही थी। परिजन घबरा गए और स्टाफ को बुलाने के लिए काफी देर तक शोर मचाते रहे। काफी देर बाद रात करीब पौने दस बजे डॉक्टर मौके पर पहुंचीं। जांच करने के बाद बताया गया कि मरीज के फेफड़ों में पानी भर गया है और उसे तुरंत जयपुर रेफर करना होगा।
अस्पताल की एम्बुलेंस नहीं मिली, दूसरी जगह से मंगानी पड़ी
परिजनों का कहना है कि जब डॉक्टरों ने जयपुर रेफर करने का फैसला सुनाया, तब भी परेशानी खत्म नहीं हुई। आरोप है कि अस्पताल की अपनी एम्बुलेंस समय पर उपलब्ध ही नहीं करवाई गई, जिससे कीमती समय बर्बाद हुआ। मजबूरी में परिजनों को खेतान अस्पताल से दूसरी एम्बुलेंस बुलानी पड़ी, तब कहीं जाकर दिव्या को जयपुर भेजा जा सका। लेकिन जयपुर पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का दावा है कि जयपुर के डॉक्टरों ने अत्यधिक ब्लीडिंग को दिव्या की मौत की वजह बताया।
जेठ का आरोप, ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने पलटकर नहीं देखा
दिव्या के जेठ लोकेश ने आरोप लगाया कि सर्जरी करने वाली डॉक्टर समीता सोनी ऑपरेशन के बाद एक बार भी मरीज को देखने नहीं आईं। उनका कहना है कि अगर समय पर सही इलाज मिलता और ब्लीडिंग को काबू में लिया जाता, तो शायद दिव्या की जान बचाई जा सकती थी। लोकेश ने अस्पताल प्रशासन पर भी लापरवाही बरतने और मरीज की गंभीर हालत को परिवार से छिपाने का आरोप लगाया। परिवार का कहना है कि अगर उन्हें समय रहते सही जानकारी दी जाती, तो वे पहले ही किसी दूसरे बड़े अस्पताल का रुख कर सकते थे।
अस्पताल के बाहर प्रदर्शन, FIR और गिरफ्तारी की मांग पर अड़े परिजन
दिव्या की मौत की खबर फैलते ही गुस्साए परिजन और गांव वाले एपेक्स स्काई लाइन अस्पताल के बाहर जमा हो गए और जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने डॉक्टर समीता सोनी के खिलाफ हत्या सहित गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करने और तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। परिजनों का आरोप है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उन्हीं को समझाने और मामला शांत करने का दबाव बनाने की कोशिश की, जिससे परिवार का गुस्सा और बढ़ गया। फिलहाल परिजन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उन्होंने साफ कह दिया है कि जब तक डॉक्टर पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे।
DSP ने की सुलह की कोशिश, बात नहीं बनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए DSP गोपाल सिंह ढाका खुद मौके पर पहुंचे और अस्पताल प्रशासन तथा परिजनों के बीच समझौता कराने की कोशिश की, लेकिन यह बातचीत भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इस बीच दिव्या के पति योगेश कुमार ने कोतवाली थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई और कार्रवाई की मांग की। पूरे मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे परिजनों की नाराजगी और बढ़ गई है।











