जयपुर से धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक बेटे ने अपनी मां की मौत को तीन साल तक कागजों में छिपाए रखा और उनके नाम पर आने वाली पेंशन लगातार निकालता रहा। पुलिस का कहना है कि इस पूरी साजिश में उसकी महिला मित्र के साथ ही बैंक के एक अधिकारी की भी सीधी भूमिका रही।
पेंशन खाते की जांच में खुला राज़
जवाहर नगर थाना पुलिस के मुताबिक एसबीआई की राजा पार्क शाखा में शांति देवी के नाम से एक पेंशन खाता चल रहा था। बैंक ने नियमित जांच के दौरान जब पेंशन खातों के रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए तो शांति देवी के खाते पर शक हुआ। पड़ताल के लिए बैंक ने नगर निगम से मृत्यु प्रमाण पत्र मंगवाया, जिसमें पता चला कि शांति देवी की मौत 2 मई 2021 को ही हो चुकी थी, यानी उनके नाम पर पेंशन करीब तीन साल तक बिना रुके आती रही जबकि वे जीवित नहीं थीं। नगर निगम ने उनकी मौत के छह दिन के भीतर ही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया था, फिर भी परिवार की ओर से यह जानकारी बैंक तक कभी नहीं पहुंचाई गई, जबकि नियम के अनुसार ऐसा करना जरूरी था ताकि पेंशन समय पर बंद हो सके।
फर्जी दस्तावेजों से जिंदा साबित की गई मृत मां
पुलिस जांच में सामने आया कि शांति देवी के बेटे लालचंद ने यह पूरी योजना अकेले नहीं, बल्कि अपनी महिला मित्र खुशबू दीक्षित, जो नेहा नाम से भी जानी जाती है, और बैंक के तत्कालीन मैनेजर सिराज अहमद कुरैशी के साथ मिलकर बनाई। आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर शांति देवी को जीवित दिखाने वाले फर्जी जीवित प्रमाण पत्र और दूसरे दस्तावेज तैयार किए और उन्हें बैंक शाखा में जमा करा दिया। इन्हीं फर्जी कागजों के आधार पर नगर निगम की ओर से जारी होने वाली पेंशन लगातार खाते में जमा होती रही और लंबे समय तक किसी को शक तक नहीं हुआ।
साढ़े छह लाख की निकासी, मैनेजर ने भी मारा हाथ
पुलिस के अनुसार खाते में आने वाली पेंशन की रकम एटीएम और दूसरे तरीकों से लगातार निकाली जाती रही। करीब तीन साल की अवधि में इस तरह लगभग 6.30 लाख रुपए खाते से निकाल लिए गए। जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया। बैंक के तत्कालीन मैनेजर सिराज अहमद कुरैशी पर भी अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगा है। पुलिस का कहना है कि मैनेजर ने मृत महिला के फर्जी हस्ताक्षर करके तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 73,500 रुपए सीधे अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिए। बैंक की आंतरिक विभागीय जांच में जैसे ही उसकी भूमिका उजागर हुई, उसकी सेवानिवृत्ति रोक दी गई और उसे निलंबित कर दिया गया।
बैंक की शिकायत पर केस दर्ज, तीनों गिरफ्तार
पूरे मामले की आंतरिक पड़ताल के बाद बैंक प्रबंधन ने जनवरी 2024 में जवाहर नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया। लंबी जांच के बाद पुलिस ने बेटे लालचंद, उसकी महिला मित्र खुशबू दीक्षित उर्फ नेहा और तत्कालीन बैंक मैनेजर सिराज अहमद कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा चुका है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में और कौन-कौन शामिल था, ताकि इस पूरे फर्जीवाड़े में किसी और की भूमिका की भी पुष्टि की जा सके।











