सीकर जिले की प्रसिद्ध धार्मिक नगरी खाटूश्यामजी नगर पालिका चुनाव के नतीजों ने एक बेहद रोचक मोड़ ला दिया है, जहाँ किसी भी मुख्य राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हो सका है। कुल 20 वार्डों वाली इस नगर पालिका में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दल 8-8 वार्डों पर जीत दर्ज कर बराबरी पर सिमट गए हैं। बिना स्पष्ट बहुमत के किसी भी पार्टी के लिए सीधे तौर पर बोर्ड बनाना संभव नहीं दिख रहा है, जिससे अब पूरी चुनावी तस्वीर बाकी बची 4 सीटों पर सिमट गई है। इस धार्मिक क्षेत्र की स्थानीय सत्ता पर कौन काबिज होगा, इसका फैसला अब इन अन्य विजयी पार्षदों के रुख पर निर्भर करेगा।
वार्ड वार नतीजे और बोर्ड गठन की नई अंकगणित
खाटूश्यामजी नगर पालिका के सभी 20 वार्डों के घोषित परिणामों के अनुसार, मुकाबला बेहद कड़ा रहा। बीजेपी ने 8 वार्डों में सफलता पाई, वहीं कांग्रेस ने भी 8 वार्ड जीतकर बराबरी का मुकाबला कायम रखा। इस बीच, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के खाते में 1 वार्ड की सीट आई, जबकि 3 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने परचम लहराया। 8-8 सीटों के इस टाई के बाद अब RLP का 1 पार्षद और 3 निर्दलीय पार्षद किंगमेकर की भूमिका में आ गए हैं। खाटूश्यामजी नगर पालिका का नया चेयरमैन कौन बनेगा, यह तय करने के लिए दोनों ही प्रमुख दल अब इन 4 पार्षदों को अपने पाले में लाने की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
मतदान प्रतिशत का आंकड़ा और पिछले चुनाव से तुलना
इस निकाय चुनाव के दौरान खाटूश्यामजी के नागरिकों ने मतदान प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। नगर पालिका क्षेत्र में कुल 11,550 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से 9,865 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस तरह यहाँ कुल 85.41% मतदान दर्ज किया गया। यद्यपि 85 फीसदी से अधिक का मतदान काफ़ी ऊँचा माना जाता है, लेकिन अगर साल 2019 के निकाय चुनावों से तुलना करें तो इस बार वोटिंग में गिरावट देखी गई। 2019 के चुनावों में यहाँ 87.31% मतदान हुआ था, जिसका अर्थ है कि इस बार मतदान प्रतिशत में लगभग 1.90% की कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद मतदाताओं की यह सक्रियता स्थानीय मुद्दों के प्रति उनकी जागरूकता को दर्शाती है।
खाटूश्यामजी का राजनीतिक महत्व और पुराना इतिहास
खाटूश्यामजी केवल एक सामान्य नगर पालिका नहीं है, बल्कि देशभर में विख्यात एक प्रमुख आस्था केंद्र है। इसी वजह से इस निकाय चुनाव के परिणामों को राजनीतिक दल काफी गंभीरता से लेते हैं। साल 2019 के पिछले चुनाव में बीजेपी ने यहाँ शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना बोर्ड बनाया था। उस समय वार्ड नंबर 6 से पार्षद निर्वाचित हुईं ममता देवी बाद में खाटूश्यामजी नगर पालिका की सभापति चुनी गई थीं। इस बार कांग्रेस के लिए 8 सीटें जीतना एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि उसने बीजेपी के गढ़ में उसे बराबरी की चुनौती दी है। हालांकि, बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल करने की चुनौती दोनों ही दलों के सामने समान रूप से खड़ी है।
पड़ोसी श्रीमाधोपुर नगर पालिका में बीजेपी की एकतरफा जीत
खाटूश्यामजी में बने इस सस्पेंस के विपरीत, पास की श्रीमाधोपुर नगर पालिका के 35 वार्डों के परिणामों में स्पष्ट जनादेश देखने को मिला है। श्रीमाधोपुर में बीजेपी ने 19 वार्डों में जीत हासिल करके पूर्ण बहुमत दर्ज कर लिया है। यहाँ कांग्रेस को केवल 9 वार्डों से संतोष करना पड़ा, जबकि 7 वार्डों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। श्रीमाधोपुर में जहाँ बीजेपी बिना किसी संशय के अपना बोर्ड बनाने जा रही है, वहीं खाटूश्यामजी में कांटे की टक्कर के कारण राजनीतिक सरगर्मियां और गुटबाजी तेज़ हो गई हैं।


















