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योगिनी एकादशी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्वधर्म
9 जुल॰ 2026, 10:44 am (45 दिन पहले)· 2

योगिनी एकादशी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व

योगिनी एकादशी कब है, इसको लेकर संशय की स्थिति हो सकती है, लेकिन इस लेख में तिथि, पूजा के समय और व्रत के धार्मिक लाभों की विस्तार से चर्चा की गई है।

योगिनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति का पर्व है। देशभर के श्रद्धालु भगवान विष्णु की कृपा पाने और अपने जीवन में शांति व समृद्धि के लिए इस दिन व्रत रखते हैं। चूंकि एकादशी की तिथि नजदीक आ रही है, ऐसे में इससे जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां जानना जरूरी है।

योगिनी एकादशी की तिथि और मुहूर्त

योगिनी एकादशी का व्रत शुक्रवार, 10 जुलाई को रखा जाएगा। यह पवित्र दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और आषाढ़ या ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष के दौरान पड़ता है। यदि हम पंचांग और समय की बात करें, तो योगिनी एकादशी की तिथि 10 जुलाई को सुबह 8:16 बजे शुरू होगी और 11 जुलाई को सुबह 5:22 बजे समाप्त होगी। व्रत तोड़ने का शुभ समय यानी पारण का समय शनिवार को दोपहर 1:50 बजे से शाम 4:36 बजे के बीच है। हरि वासर का समय सुबह 10:32 बजे समाप्त हो जाएगा।

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व्रत का धार्मिक महत्व

योगिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पुराने पाप धुल जाते हैं, बीमारियों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। यह एकादशी निर्जला एकादशी और देवशयनी एकादशी के बीच आती है, जो हिंदू कैलेंडर में अपना विशिष्ट महत्व रखती है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा अर्चना करते हैं। पूरे दिन का उपवास रखकर शास्त्रों का पाठ करना बहुत फलदायी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य मिलता है। यह व्रत नकारात्मक कर्मों को मिटाने, मानसिक शांति प्रदान करने और आत्मिक अनुशासन को मजबूत करने में मदद करता है।

पौराणिक कथा और व्रत का आधार

योगिनी एकादशी की व्रत कथा राजा कुबेर और उनके सेवक हेममाली के इर्द-गिर्द घूमती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हेममाली भगवान शिव की सेवा में अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहा था क्योंकि वह अपनी पत्नी के प्रति अत्यधिक आसक्त था। अपने कर्तव्य में इस लापरवाही से क्रोधित होकर राजा कुबेर ने उसे एक लाइलाज बीमारी से ग्रसित होने का श्राप दे दिया। कई वर्षों तक कष्ट भोगने के बाद, हेममाली ने ऋषि मार्कंडेय से मार्गदर्शन मांगा। ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। जैसे ही हेममाली ने पूरी निष्ठा के साथ इस व्रत को पूरा किया, उसे श्राप से मुक्ति मिली और उसने अपना खोया हुआ स्वास्थ्य फिर से प्राप्त कर लिया।

सवाल-जवाब

योगिनी एकादशी कब है?
योगिनी एकादशी का व्रत शुक्रवार, 10 जुलाई को रखा जाएगा।
व्रत पारण का समय क्या है?
व्रत पारण का समय शनिवार, 11 जुलाई को दोपहर 1:50 बजे से शाम 4:36 बजे के बीच है।
इस व्रत का महत्व क्या है?
यह व्रत पापों को धोने, बीमारियों को दूर करने और भगवान विष्णु व देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए रखा जाता है।
योगिनी एकादशी की कथा किसके बारे में है?
यह कथा राजा कुबेर और उनके सेवक हेममाली के बारे में है, जिसे ऋषि मार्कंडेय के परामर्श पर इस व्रत से मुक्ति मिली थी।
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