मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज, 09 जुलाई 2026, गुरुवार को तड़के ब्रह्म मुहूर्त में भस्म आरती का दिव्य अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस विशेष पूजा में शामिल होने के लिए देश भर से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी हजारों की तादाद में भक्त उज्जैन पहुंचे। भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर 'जय महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा, जिससे वातावरण में एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। रोजाना की भांति बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया और उन्हें भस्म अर्पित कर विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना की गई।
श्रद्धा का केंद्र और वैदिक मंत्रोच्चार
भक्तों ने भोर होते ही लंबी कतारों में लगकर धैर्यपूर्वक बाबा महाकाल के दर्शन किए और अपने एवं अपने परिवार के लिए सुख, शांति तथा समृद्धि की प्रार्थना की। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भस्म आरती की प्रक्रिया पूरी की, जिससे समूचा परिसर पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्री महाकालेश्वर मंदिर की यह भस्म आरती परंपरा सबसे प्राचीन और विशिष्ट मानी जाती है। ऐसी गहरी धार्मिक मान्यता है कि इस आरती के माध्यम से स्वयं बाबा महाकाल भक्तों को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं और उनके जीवन के समस्त कष्टों का निवारण करते हैं।
अलौकिक श्रृंगार और दिव्य वातावरण
आज की आरती के दौरान श्री महाकालेश्वर जी का मनमोहक स्वरूप देखने लायक था। उन्हें आकर्षक नए वस्त्रों और कीमती आभूषणों से सजाया गया। मंदिर के भीतर जलते हुए दीयों की मंद रोशनी और घंटियों की मधुर गूंज ने माहौल को दिव्य बना दिया। दर्शन करने वाले कई श्रद्धालुओं ने बताया कि इस आरती को देखने से मन को जो असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है, उसे शब्दों में बयां करना कठिन है। भक्तों ने इसे अपने जीवन का सबसे पवित्र और यादगार अनुभव माना। मंदिर प्रशासन ने भीड़ के प्रबंधन और सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि हर कोई बिना किसी बाधा के बाबा के दर्शन कर सके।
दैनिक आरती की परंपरा
श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन कुल 6 बार आरती की जाती है, जिनमें भस्म आरती का महत्व सबसे अधिक है। ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली इस आरती में बाबा महाकाल को 'घटा टोप' स्वरूप में सजाया जाता है। इस प्रक्रिया में एक सूती कपड़े का उपयोग करके भस्म को भगवान पर अर्पित करते हुए आरती का क्रम पूरा किया जाता है। भक्तों के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि श्री महाकाल के दर्शन के उपरांत मंदिर परिसर में स्थित 'जूना महाकाल' के दर्शन करना भी अनिवार्य माना जाता है।











