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राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को बड़ी बैठक, तोपों से टॉरपीडो तक 1 लाख करोड़ की खरीद पर लग सकती है मुहरसाइबर सुरक्षा
3 घंटे पहले· 3

राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को बड़ी बैठक, तोपों से टॉरपीडो तक 1 लाख करोड़ की खरीद पर लग सकती है मुहर

रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल शुक्रवार को होने वाली बैठक में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के हथियारों की खरीद प्रस्तावों पर विचार करेगी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे।

माइकल एंडरसनमाइकल एंडरसनअमेरिका संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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रक्षा मंत्रालय की सबसे ऊंची फैसला लेने वाली संस्था डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की शुक्रवार को एक बड़ी बैठक होने जा रही है, जिसमें 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के हथियारों और साजो-सामान की खरीद प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे और इसका मकसद भारतीय सशस्त्र बलों की युद्धक तैयारी को और पुख्ता बनाना है। इस दौरान कई बड़े आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल सकती है। ये सभी प्रस्ताव देश की बदलती सुरक्षा चुनौतियों, चाहे वो उत्तरी सीमा हो या पश्चिमी मोर्चा, को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

पहला कदम: आवश्यकता की स्वीकृति

बैठक के एजेंडे में सबसे अहम बिंदु है आवश्यकता की स्वीकृति यानी Acceptance of Necessity (AoN) को मंजूरी देना। किसी भी रक्षा खरीद की प्रक्रिया में यह पहला और सबसे बुनियादी कदम माना जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि तुरंत खरीद आदेश जारी हो जाएगा, बल्कि इससे पूरी प्रक्रिया को आधिकारिक मंजूरी मिलती है और टेंडर जारी करने से लेकर आखिरकार कॉन्ट्रैक्ट साइन होने तक का रास्ता साफ हो जाता है।

थलसेना के लिए K-9 वज्र तोपों की नई खेप

इस बार के प्रस्तावों में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय थलसेना से जुड़ा हुआ है, जो अपनी मारक क्षमता को लगातार बढ़ाने में लगी है। इनमें K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड 155 mm तोपों की अतिरिक्त खरीद का प्रस्ताव भी है। ये तोपें पहले से ही सेना के बेड़े का हिस्सा हैं और लद्दाख जैसी ऊंचाई वाली जगहों से लेकर रेगिस्तानी इलाकों तक अपना दम दिखा चुकी हैं। तेज रफ्तार से मूवमेंट, लंबी दूरी तक सटीक निशाना और दमदार फायरिंग क्षमता इन तोपों की सबसे बड़ी खासियत है।

आसमान से साइलेंट अटैक की तैयारी

बैठक में लोइटरिंग म्यूनिशन यानी कामिकाजे ड्रोन खरीदने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। ये ऐसे हथियार हैं जो हवा में लंबे समय तक चक्कर लगा सकते हैं और सही मौका मिलते ही लक्ष्य पर सीधा और सटीक हमला कर सकते हैं। बदलते हुए युद्धों में इन ड्रोन की भूमिका पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ी है।

इसके साथ ही वर्बा MANPADS यानी मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद पर भी विचार होगा। यह सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन को मार गिराने में सक्षम है। इसके अलावा प्रस्तावों में अतिरिक्त एयर डिफेंस गन और टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम (APS) भी शामिल हैं, जो मिसाइल और रॉकेट हमलों को हवा में ही तबाह कर देते हैं।

नौसेना और वायुसेना के लिए भी बड़े प्रस्ताव

सिर्फ थलसेना ही नहीं, नौसेना और वायुसेना के लिए भी बैठक में अहम प्रस्ताव रखे जाएंगे। नौसेना के लिए नई पीढ़ी के हैवीवेट टॉरपीडो, मानव रहित सतही पोत यानी USVs, पानी के भीतर चलने वाले ऑटोनॉमस व्हीकल यानी UUVs, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और सोनार सिस्टम से जुड़े प्रस्ताव एजेंडे में शामिल हैं। वहीं वायुसेना के लिए लंबी दूरी तक मार करने वाली स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन मिसाइलें, हवा में ही ईंधन भरने वाले रिफ्यूलिंग टैंकर और नए एयर डिफेंस रडार सिस्टम पर भी बात होने की उम्मीद है।

स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बड़ा बूस्ट

अगर इन सभी प्रस्तावों को मंजूरी मिल जाती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा देश के स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षेत्र को होगा। खास तौर पर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) को सबसे ज्यादा ऑर्डर मिलने की संभावना जताई जा रही है। यह पूरा घटनाक्रम भारत की रक्षा आधुनिकीकरण यात्रा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ सेना की मारक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि सीमाओं पर किसी भी तरह के खतरे से निपटने की ताकत भी कई गुना मजबूत हो जाएगी। साफ है कि आने वाले वक्त में भारत की सैन्य रणनीति पहले से कहीं ज्यादा तकनीकी, तेज और घातक होने वाली है।

इसका आप पर असर

  • सीमा सुरक्षा पर असर: तोपों, ड्रोन, टॉरपीडो और मिसाइलों की यह खरीद उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सेना की तैयारी सीधे मजबूत करेगी, जिससे देश की सुरक्षा के लिहाज से आम नागरिकों को फायदा मिलेगा।
  • स्वदेशी उद्योग को बूस्ट: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड जैसी सरकारी कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिलने से घरेलू रक्षा उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।

सवाल-जवाब

डीएसी की यह अहम बैठक कब होगी और इसकी अध्यक्षता कौन करेगा?
यह बैठक शुक्रवार को होगी और इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे।
इस बैठक में कुल कितने की रक्षा खरीद प्रस्तावों पर विचार होगा?
बैठक में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा खरीद प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा।
आवश्यकता की स्वीकृति यानी AoN का क्या मतलब है?
यह किसी भी रक्षा खरीद प्रक्रिया का पहला चरण है, जो सीधे खरीद आदेश नहीं होता लेकिन प्रक्रिया को आधिकारिक मंजूरी देकर टेंडर से कॉन्ट्रैक्ट तक का रास्ता खोलता है।
थलसेना के लिए इस बैठक में किन हथियारों के प्रस्ताव हैं?
K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड 155 mm तोपों की अतिरिक्त खरीद, लोइटरिंग म्यूनिशन यानी कामिकाजे ड्रोन, वर्बा MANPADS, अतिरिक्त एयर डिफेंस गन और टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम (APS) के प्रस्ताव शामिल हैं।
नौसेना और वायुसेना के लिए क्या प्रस्ताव रखे जाएंगे?
नौसेना के लिए हैवीवेट टॉरपीडो, USVs, UUVs, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सोनार सिस्टम के प्रस्ताव हैं, जबकि वायुसेना के लिए स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन मिसाइलें, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर और नए एयर डिफेंस रडार सिस्टम पर चर्चा होगी।
इन प्रस्तावों की मंजूरी से किन कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) को इससे सबसे ज्यादा फायदा मिलने की संभावना है।
माइकल एंडरसन
लेखक के बारे मेंमाइकल एंडरसनअमेरिका संवाददाता सैन फ्रांसिस्को
विशेषज्ञताअमेरिका समाचार, राजनीति, सरकारी नीति, चुनाव, अर्थव्यवस्था, ब्रेकिंग न्यूज़, कांग्रेस, व्हाइट हाउस, सामाजिक मुद्दे, अंतरराष्ट्रीय संबंध

माइकल एंडरसन एक अमेरिका संवाददाता हैं जो अमेरिकी राजनीति, ब्रेकिंग न्यूज़, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। वे पूरे अमेरिका से समय पर अपडेट और स्पष्ट विश्लेषण देते हैं।

माइकल एंडरसन एक अमेरिका संवाददाता हैं जो अमेरिकी राजनीति, सरकारी नीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक मुद्दों और बड़ी ब्रेकिंग ख़बरों की कवरेज में विशेषज्ञता रखते हैं। वे वॉशिंगटन डी.सी. और पूरे अमेरिका के घटनाक्रमों — चुनाव, कांग्रेस की गतिविधियाँ, व्हाइट हाउस के फ़ैसले, आर्थिक रुझान और अहम राष्ट्रीय ख़बरों — पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, गति और संदर्भ-सहित रिपोर्टिंग पर ज़ोर देते हुए माइकल अमेरिका और उसके वैश्विक प्रभाव को आकार देने वाले मुद्दों का गहन विश्लेषण देते हैं। उनकी पत्रकारिता पाठकों को स्पष्ट, तथ्यपरक और संतुलित रिपोर्टिंग के ज़रिए जटिल राजनीतिक व आर्थिक घटनाक्रम समझने में मदद करती है।

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