रक्षा मंत्रालय की सबसे ऊंची फैसला लेने वाली संस्था डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की शुक्रवार को एक बड़ी बैठक होने जा रही है, जिसमें 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के हथियारों और साजो-सामान की खरीद प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे और इसका मकसद भारतीय सशस्त्र बलों की युद्धक तैयारी को और पुख्ता बनाना है। इस दौरान कई बड़े आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल सकती है। ये सभी प्रस्ताव देश की बदलती सुरक्षा चुनौतियों, चाहे वो उत्तरी सीमा हो या पश्चिमी मोर्चा, को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
पहला कदम: आवश्यकता की स्वीकृति
बैठक के एजेंडे में सबसे अहम बिंदु है आवश्यकता की स्वीकृति यानी Acceptance of Necessity (AoN) को मंजूरी देना। किसी भी रक्षा खरीद की प्रक्रिया में यह पहला और सबसे बुनियादी कदम माना जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि तुरंत खरीद आदेश जारी हो जाएगा, बल्कि इससे पूरी प्रक्रिया को आधिकारिक मंजूरी मिलती है और टेंडर जारी करने से लेकर आखिरकार कॉन्ट्रैक्ट साइन होने तक का रास्ता साफ हो जाता है।
थलसेना के लिए K-9 वज्र तोपों की नई खेप
इस बार के प्रस्तावों में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय थलसेना से जुड़ा हुआ है, जो अपनी मारक क्षमता को लगातार बढ़ाने में लगी है। इनमें K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड 155 mm तोपों की अतिरिक्त खरीद का प्रस्ताव भी है। ये तोपें पहले से ही सेना के बेड़े का हिस्सा हैं और लद्दाख जैसी ऊंचाई वाली जगहों से लेकर रेगिस्तानी इलाकों तक अपना दम दिखा चुकी हैं। तेज रफ्तार से मूवमेंट, लंबी दूरी तक सटीक निशाना और दमदार फायरिंग क्षमता इन तोपों की सबसे बड़ी खासियत है।
आसमान से साइलेंट अटैक की तैयारी
बैठक में लोइटरिंग म्यूनिशन यानी कामिकाजे ड्रोन खरीदने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। ये ऐसे हथियार हैं जो हवा में लंबे समय तक चक्कर लगा सकते हैं और सही मौका मिलते ही लक्ष्य पर सीधा और सटीक हमला कर सकते हैं। बदलते हुए युद्धों में इन ड्रोन की भूमिका पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ी है।
इसके साथ ही वर्बा MANPADS यानी मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद पर भी विचार होगा। यह सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन को मार गिराने में सक्षम है। इसके अलावा प्रस्तावों में अतिरिक्त एयर डिफेंस गन और टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम (APS) भी शामिल हैं, जो मिसाइल और रॉकेट हमलों को हवा में ही तबाह कर देते हैं।
नौसेना और वायुसेना के लिए भी बड़े प्रस्ताव
सिर्फ थलसेना ही नहीं, नौसेना और वायुसेना के लिए भी बैठक में अहम प्रस्ताव रखे जाएंगे। नौसेना के लिए नई पीढ़ी के हैवीवेट टॉरपीडो, मानव रहित सतही पोत यानी USVs, पानी के भीतर चलने वाले ऑटोनॉमस व्हीकल यानी UUVs, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और सोनार सिस्टम से जुड़े प्रस्ताव एजेंडे में शामिल हैं। वहीं वायुसेना के लिए लंबी दूरी तक मार करने वाली स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन मिसाइलें, हवा में ही ईंधन भरने वाले रिफ्यूलिंग टैंकर और नए एयर डिफेंस रडार सिस्टम पर भी बात होने की उम्मीद है।
स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बड़ा बूस्ट
अगर इन सभी प्रस्तावों को मंजूरी मिल जाती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा देश के स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षेत्र को होगा। खास तौर पर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) को सबसे ज्यादा ऑर्डर मिलने की संभावना जताई जा रही है। यह पूरा घटनाक्रम भारत की रक्षा आधुनिकीकरण यात्रा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ सेना की मारक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि सीमाओं पर किसी भी तरह के खतरे से निपटने की ताकत भी कई गुना मजबूत हो जाएगी। साफ है कि आने वाले वक्त में भारत की सैन्य रणनीति पहले से कहीं ज्यादा तकनीकी, तेज और घातक होने वाली है।













