तेजस शिर्से ने 110 मीटर बाधा दौड़ में रचा इतिहास, 13.27 सेकंड में तोड़ा अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्डखेल
3 घंटे पहले· 0

तेजस शिर्से ने 110 मीटर बाधा दौड़ में रचा इतिहास, 13.27 सेकंड में तोड़ा अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड

इंडियन एथलेटिक्स सीरीज-9 में तेजस शिर्से ने 110 मीटर बाधा दौड़ 13.27 सेकंड में पूरी कर अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर किया और राष्ट्रमंडल खेलों का क्वालिफाइंग मार्क भी पार कर लिया।

भारतीय एथलेटिक्स को शनिवार को एक यादगार पल मिला, जब 24 वर्षीय तेजस शिर्से ने पुरुषों की 110 मीटर बाधा दौड़ में अपनी ही पुरानी सर्वश्रेष्ठ टाइमिंग को पीछे छोड़ दिया। इंडियन एथलेटिक्स सीरीज-9 में रिलायंस फाउंडेशन की ओर से उतरे इस धावक ने महज 13.27 सेकंड में रेस पूरी कर देश का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

अपने ही रिकॉर्ड को बेहतर बनाया

खास बात यह रही कि शिर्से ने जिस रिकॉर्ड को तोड़ा, वह भी उन्हीं का था। साल 2024 में उन्होंने 13.41 सेकंड का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया था। अब उसी प्रदर्शन को और निखारते हुए उन्होंने टाइमिंग को घटाकर 13.27 सेकंड तक पहुंचा दिया, यानी अपने पिछले बेहतरीन प्रयास में 0.14 सेकंड का सीधा सुधार।

राष्ट्रमंडल खेलों का दरवाजा खुला

इस दौड़ का असली महत्व राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी से जुड़ा है। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इन खेलों के लिए 13.39 सेकंड का क्वालिफिकेशन मानक तय किया था। शिर्से ने अपनी रिकॉर्ड-तोड़ दौड़ से इस मानक को बड़े आराम से पार कर लिया। इससे पहले पिछले महीने रांची में हुए फेडरेशन कप में उन्होंने 13.50 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था, और अब उससे भी आगे निकल आए हैं। इस साल के अंत में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में अब भारत को इस स्पर्धा में पदक की उम्मीद बंध गई है।

एशिया में टॉप-6 में शुमार

शिर्से का यह 13.27 सेकंड का प्रदर्शन केवल घरेलू स्तर पर ही नहीं चमका, बल्कि महाद्वीप के नक्शे पर भी छाप छोड़ गया। यह समय इस सत्र में एशिया का छठा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। यही वजह है कि इसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता में बड़ी छलांग के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इससे भारत और एशिया के अग्रणी बाधा दौड़ देशों के बीच की खाई कम हुई है।

एशियाई मुकाबले में बड़ी पहचान

इस टाइमिंग ने शिर्से को 2026 में महाद्वीप के शीर्ष धावकों की पंक्ति में ला खड़ा किया है। एशियाई बाधा दौड़ में जिस स्तर की प्रतिस्पर्धा रहती है, उसे देखते हुए इस सूची में जगह बनाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। खासकर जापान और चीन जैसे देश इस स्पर्धा में लगातार विश्व स्तरीय एथलीट तैयार करते रहे हैं, ऐसे में किसी भारतीय धावक का इस मुकाम तक पहुंचना खास मायने रखता है।

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