उत्तराखंड की हसीन वादियों में स्थित कैंची धाम को लेकर नीम करोली बाबा ने मंदिर निर्माण के शुरुआती दौर में ही कह दिया था कि एक समय ऐसा आएगा जब पूरी दुनिया इस पावन स्थल को पहचानेगी। वर्तमान समय में उनका यह कथन बिल्कुल सच साबित हो रहा है। वीकेंड के मौकों पर कैंची धाम में उमड़ने वाली हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और 2 करोड़ रुपये की लागत में बनी फिल्म हनुमान अंश की 400 करोड़ रुपये की कमाई इसका प्रत्यक्ष प्रमाण बनकर सामने आई है। भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर मौजूद कैंची धाम आश्रम में बाबा ने अपनी साधना का एक लंबा वक्त बिताया, जहां लाखों भक्तों की समस्याएं उनके आशीर्वाद से सुलझीं।
भीड़भाड़ से दूर बाबा की उपस्थिति महसूस करने के दो प्रमुख केंद्र
कैंची धाम आश्रम की अपार लोकप्रियता के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि यहां स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग, विराट कोहली, अनुष्का शर्मा और मनोज वाजपेयी जैसे नामी दिग्गजों ने पहुंचकर मार्गदर्शन प्राप्त किया है। लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या की वजह से वहां काफी भीड़ देखने को मिलती है। ऐसे में यदि कोई भक्त नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक ऊर्जा और उपस्थिति को बेहद करीब से अनुभव करना चाहता है, तो उसके लिए भूमियाधार का हनुमान मंदिर और वृंदावन स्थित बाबा का समाधि आश्रम बेहतरीन विकल्प साबित होते हैं। इन दोनों स्थलों पर कैंची धाम की तरह अत्यधिक भीड़ या लंबी कतारों का सामना नहीं करना पड़ता।
भूमियाधार में पहाड़ों के बीच स्थित हनुमान मंदिर
कैंची धाम से करीब 1 से 2 घंटे के फासले पर मुख्य सड़क से लगा हुआ भूमियाधार का हनुमान मंदिर स्थित है। इस पावन धाम के बाहरी हिस्से में स्थापित भगवान हनुमान जी की पावन मूर्ति के दर्शन करने और हनुमान चालीसा का पाठ पूरा करने के बाद श्रद्धालुओं को विशेष अवसर मिलता है। मंदिर के पुजारी की अनुमति लेकर भक्त बाबा के कक्ष में कुछ समय शांतिपूर्वक बैठकर ध्यान लगा सकते हैं। चारों तरफ हरी-भरी पहाड़ियों से घिरे इस परिसर का शांत माहौल मन के तमाम भटकाव और विचारों को शांत कर देता है। अधिकांश लोगों को इस मंदिर की जानकारी न होने के चलते यहां बहुत ज्यादा भीड़ जमा नहीं होती।
वृंदावन स्थित पावन समाधि स्थल और यात्रा की योजना
नीम करोली बाबा ने अपने पार्थिव जीवन की अंतिम सांस वृंदावन की पवित्र भूमि पर ली थी। वृंदावन में भी बाबा का आश्रम बना हुआ है, जहां उनकी पावन समाधि स्थापित है। इस आश्रम की खासियत यह है कि यहां हर किसी को बाबा के निजी कक्ष में जाकर बैठने और शांति से ध्यान लगाने की पूरी अनुमति दी जाती है। दिल्ली से वृंदावन का सफर तय करके श्रद्धालु बेहद सरलता से इस समाधि आश्रम में दर्शन लाभ ले सकते हैं। यहां दर्शन के लिए लंबी कतारों में समय नहीं गंवाना पड़ता। केवल एक दिन की फुर्सत निकालकर भी इस धाम की यात्रा पूरी की जा सकती है, जबकि ठाकुर जी के दर्शन साथ में शामिल करने पर 2 दिन का समय पर्याप्त रहता है।



















