अक्सर घरों में ताजी सब्जियां और नियमित सामग्री मौजूद होने के बावजूद पकी हुई थाली में वह मनपसंद स्वाद नहीं उभर पाता जिसकी उम्मीद की जाती है। भोजन के असली स्वाद का आधार उसके मसालों के सही संतुलन और उनकी ताजगी पर टिका होता है। बाजार के पैकेटबंद मिश्रणों पर निर्भर रहने के बजाय जब रसोई में उपलब्ध साबुत मसालों को करीने से भूनकर तैयार किया जाता है, तो सब्जी की महक और स्वाद दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलता है। इस खास घरेलू मिश्रण में खड़ा धनिया, जीरा और सौंफ मिलकर एक संतुलित खुशबू पैदा करते हैं, जबकि अमचूर की मौजूदगी भोजन में हल्का सा खट्टापन घोल देती है।
मसाला मिश्रण तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री
इस स्वादिष्ट चूर्ण को बनाने के लिए किसी दुर्लभ वस्तु की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि रोजमर्रा के डिब्बों में रखी चीजें ही काम आ जाती हैं। आवश्यक अनुपात कुछ इस प्रकार है
- साबुत धनिया के बीज: चार बड़े चम्मच
- जीरा: दो बड़े चम्मच
- सौंफ: एक बड़ा चम्मच
- काली मिर्च: एक छोटा चम्मच
- अजवाइन: एक छोटा चम्मच
- सूखी लाल मिर्च: दो से तीन नग (अपनी तीखेपन की पसंद अनुसार इसे कम भी कर सकते हैं)
- हल्दी पाउडर: एक छोटा चम्मच
- अमचूर पाउडर: एक छोटा चम्मच
- गरम मसाला: एक छोटा चम्मच
- हींग: आधा छोटा चम्मच
- नमक: स्वादानुसार
भूनने और पीसने की सही विधि
सबसे पहले किसी भारी तले वाली कड़ाही को गैस चूल्हे पर मध्यम आंच पर गर्म होने के लिए रखें। बर्तन हल्का गर्म होने पर उसमें धनिया के बीज, जीरा, सौंफ, अजवाइन, साबुत काली मिर्च और सूखी लाल मिर्च एक साथ डाल दें। करछुल की मदद से इन साबुत दानों को लगातार चलाते रहें ताकि आंच सभी दानों पर बराबर लगे। इन्हें बहुत ज्यादा देर तक या तेज आंच पर नहीं पकाना है। जैसे ही कड़ाही से भीनी-भीनी सौंधी महक उठने लगे, तुरंत आंच बंद कर दें।
मसालों को भूनते समय सतर्कता बेहद जरूरी है, क्योंकि यदि दाने कड़ाही के तले में चिपककर जल गए या अत्यधिक गहरे रंग के हो गए, तो पूरे मिश्रण का स्वाद कड़वा हो जाएगा। भुने हुए गर्म मसालों को कड़ाही में छोड़ने के बजाय फौरन किसी फैली हुई प्लेट में पलट लें और सामान्य कमरे के तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने का इंतजार करें।
जब भुनी हुई सामग्री पूरी तरह ठंडी हो जाए, तब उसे मिक्सी के सूखे जार में पलट लें। अपनी पसंद के मुताबिक आप इसे महीन पीस सकते हैं या फिर थोड़ा दरदरा टेक्सचर भी रख सकते हैं। इसके बाद पिसे हुए मिश्रण को किसी सूखे कटोरे में निकालें। अब इसमें पहले से तय मात्रा के अनुसार हल्दी, अमचूर, गरम मसाला, हींग और नमक मिला दें। चम्मच की सहायता से सभी पाउडरों को तब तक फेंटें जब तक कि सारा मिश्रण एकसमान रंग और बनावट का न दिखने लगे।
किन सब्जियों में करें प्रयोग और कब डालें
यह बहुउपयोगी सूखा मसाला कई प्रकार के भारतीय व्यंजनों के साथ बेहतरीन तालमेल बिठाता है। आलू, फूलगोभी, हरी मटर, भिंडी, बैंगन और शिमला मिर्च जैसी आम सब्जियों में इसका उपयोग बेहद असरदार साबित होता है। इसके अलावा मिक्स वेज की तैयारी में भी यह ग्रेवी और सूखी भुजिया दोनों को गहरा स्वाद देता है।
साधारणतया तीन से चार व्यक्तियों के लिए तैयार की जाने वाली सब्जी में एक से दो चम्मच चूर्ण का इस्तेमाल पर्याप्त माना जाता है। हालांकि प्रत्येक परिवार अपनी व्यक्तिगत पसंद के आधार पर इस मात्रा को थोड़ा घटा या बढ़ा सकता है। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि यह मसाला सब्जी पकाने के शुरुआती चरण में न डाला जाए। जब प्याज, टमाटर या बुनियादी मसाले अच्छी तरह तेल छोड़ दें और भुन जाएं, तब इस तैयार मिश्रण को कढ़ाई में मिलाएं। ऐसा करने से इसकी प्राकृतिक महक और तेल भाप में उड़ने के बजाय ग्रेवी में अच्छी तरह रच-बस जाते हैं।
लंबे समय तक सुरक्षित रखने के जरूरी नियम
ताजे बने मसाले को कभी भी तुरंत किसी जार में बंद नहीं करना चाहिए। पीसने और मिलाने के दौरान पैदा हुई गर्मी जब पूरी तरह शांत हो जाए, तभी इसे भंडारण के लिए आगे बढ़ाएं। भंडारण हेतु कांच का ऐसा जार चुनें जो पूरी तरह साफ, सूखा और एयरटाइट ढक्कन वाला हो। जार से मसाला निकालते वक्त हमेशा साफ और सूखे चम्मच का ही प्रयोग करें। पानी की एक भी बूंद या हल्की सी सीलन मसाले के कुरकुरेपन, महक और समग्र गुणवत्ता को बिगाड़ सकती है।



















