उत्तर-पूर्वी सीमा पर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए त्रिपुरा ने बांग्लादेश से सटी अपनी 856 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 805.99 किलोमीटर हिस्से में कांटेदार तार की बाड़ लगाने का काम पूरा कर लिया है। राज्य के गृह विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सीमा का अधिकांश हिस्सा सुरक्षित कर लिया गया है, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 50 किलोमीटर हिस्से पर बाड़ लगना अभी बाकी है।
विधानसभा में पेश की गई बाड़बंदी की ताजा रिपोर्ट
सीमा सुरक्षा परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी राज्य विधानसभा में एक लिखित जवाब के दौरान दी गई। टिपरा मोथा विधायक रंजीत देववर्मा ने बाड़बंदी कार्य की प्रगति और उन क्षेत्रों का ब्योरा मांगा था जहां निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इसके जवाब में गृह विभाग ने पांच जिलों के उन मुख्य इलाकों की पहचान की जहां अब तक बाड़ नहीं लगाई जा सकी है।
इन जिलों और इलाकों में अधूरा है काम
विभाग के आधिकारिक जवाब के मुताबिक, अधूरा बाड़बंदी कार्य राज्य के कई महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में फैला हुआ है। दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया क्षेत्र में काम बाकी है, जबकि सिपाहीजाला जिले के सोनामुरा में भी बाड़बंदी रुकी हुई है। खोवाई के पास के सीमावर्ती इलाकों और उत्तर त्रिपुरा के कंचनपुर में भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इसके अलावा ढलाई जिले में लोंगथराई वैली, कमालपुर, अंबासा और गंडाचेरा समेत कई स्थानों पर बाड़ लगाने का काम लंबित है।
निर्माण में देरी के मुख्य कारण और चुनौतियां
कार्य में हो रही देरी की वजहों को स्पष्ट करते हुए गृह विभाग ने बताया कि दुर्गम भौगोलिक स्थिति ने प्रगति को काफी प्रभावित किया है। बाड़बंदी के प्रस्तावित मार्गों पर नदियां, मौसमी नाले और कठिन इलाके सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश की ओर से कुछ सीमा बिंदुओं पर उठाई गई आपत्तियों के कारण भी काम रुका है। निर्माण एजेंसियों की ढिलाई ने भी समयसीमा को बढ़ाया है। इन समस्याओं के समाधान के लिए त्रिपुरा सरकार ने केंद्र सरकार से कई बार संपर्क कर बाकी बचे 50 किलोमीटर क्षेत्र में काम तेजी से पूरा कराने का अनुरोध किया है।
भौगोलिक स्थिति और सीमा सुरक्षा का महत्व
त्रिपुरा तीन तरफ से उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में बांग्लादेश की सीमा से घिरा हुआ है। पूरे 856 किलोमीटर लंबे सीमा क्षेत्र में निर्बाध बाड़बंदी को प्रभावी सीमा प्रबंधन, अवैध घुसपैठ रोकने और सीमा पार अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।



















