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त्रिपुरा में बीएल संतोष के दौरे पर टिपरा मोथा के साथ गठबंधन को मिल सकती है अंतिम रूपत्रिपुरा
1 सित॰ 2026, 12:24 pm (57 मिनट पहले)· 2

त्रिपुरा में बीएल संतोष के दौरे पर टिपरा मोथा के साथ गठबंधन को मिल सकती है अंतिम रूप

त्रिपुरा में आगामी जिला परिषद के अंतर्गत आने वाली ग्राम समितियों के चुनावों को लेकर बीजेपी और टिपरा मोथा पार्टी के बीच गठबंधन पर फैसला होने की उम्मीद है।

अगरतला में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष मंगलवार को राज्य के दौरे पर पहुंच रहे हैं। उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के आगामी ग्राम समिति चुनावों के मद्देनजर चल रही सीटों के बंटवारे की चर्चाओं को अंजाम तक पहुंचाना है। इस संबंध में मुख्यमंत्री माणिक साहा ने विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उनके आगमन पर एनडीए समर्थित गठबंधन समन्वय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें साझीदारी को लेकर अंतिम मोहर लग सकती है।

गठबंधन को लेकर बातचीत जारी

राज्य के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल को लेकर पिछले कुछ समय से बातचीत चल रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि सत्तारूढ़ दल इस बार भी अपने पुराने और नए सहयोगियों के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेगा। हालांकि, अभी तक सीट बंटवारे का पूरा ढांचा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि बीएल संतोष की मौजूदगी से तमाम गतिरोध दूर हो जाएंगे।

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ग्राम समिति चुनावों की तारीख और चुनौतियां

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के तहत आने वाली 587 ग्राम समितियों के लिए आगामी 28 सितंबर को मतदान होना है। इससे पहले नई दिल्ली में दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ सका था। क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राजनीतिक समीकरणों के बीच सीटों का यह तालमेल दोनों पक्षों के लिए काफी अहम माना जा रहा है।

टिपरा मोथा की सख्त शर्तें

दूसरी तरफ, टिपरा मोथा पार्टी के प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने अपनी पुरानी शर्तों पर अडिग रहते हुए साफ कर दिया है कि जब तक संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा नहीं सुलझता, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है। उन्होंने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा कि टिपरासा अकार्ड के तहत किए गए वादों को पूरा किए बिना चुनावी गठबंधन नहीं किया जाएगा।

त्रिपक्षीय समझौते का इतिहास

उल्लेखनीय है कि टिपरा मोथा ने वर्ष 2022 में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुए इस समझौते का मुख्य उद्देश्य राज्य के मूल निवासियों के कल्याण और सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना था। पार्टी इसी समझौते के प्रावधानों के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग कर रही है।

लिखित आश्वासन की मांग

प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने दो टूक शब्दों में दोहराया है कि बिना लिखित गारंटी या वादों के अमलीजामा पहनाने के वे किसी भी चुनावी समझौते का हिस्सा नहीं बनेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय जनता के अधिकारों की रक्षा पार्टी की पहली प्राथमिकता है और स्थानीय निकायों के इन चुनावों में किसी भी प्रकार का समझौता केवल तभी संभव है जब ठोस कदम उठाए जाएं।

सवाल-जवाब

त्रिपुरा में बीजेपी के कौन से राष्ट्रीय नेता आ रहे हैं?
बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष त्रिपुरा दौरे पर आ रहे हैं।
ग्राम समिति के चुनाव कब आयोजित होने हैं?
त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के तहत 587 ग्राम समितियों के चुनाव 28 सितंबर को तय किए गए हैं।
टिपरा मोथा पार्टी प्रमुख का क्या नाम है?
टिपरा मोथा पार्टी के प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा हैं।
टिपरा मोथा की मुख्य शर्त क्या है?
पार्टी ने टिपरासा अकार्ड के तहत वादे पूरे करने या लिखित आश्वासन मिलने तक गठबंधन से इनकार किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·46 मिनट पहले

बीएल संतोष का यह दौरा पूर्वोत्तर की राजनीति में केंद्रीय नेतृत्व के सीधे हस्तक्षेप की रणनीति को दर्शाता है, जहाँ टिपरा मोथा की क्षेत्रीय आकांक्षाएं और संवैधानिक अधिकारों की मांगें एनडीए के लिए स्थानीय निकाय चुनावों में एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गई हैं। यदि लिखित आश्वासन या त्रिपक्षीय समझौते के मुद्दों का समाधान नहीं होता है, तो जमीनी स्तर पर सीटों का समीकरण प्रभावित हो सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·45 मिनट पहले

बीएल संतोष का यह हस्तक्षेप यह रेखांकित करता है कि भाजपा राष्ट्रीय स्तर के एजेंडे को क्षेत्रीय दलों के साथ संतुलित करने में कितनी सतर्क है। आगामी 28 सितंबर को होने वाले 587 ग्राम समिति चुनावों से पहले यदि टिपरा मोथा के साथ सहमति नहीं बनती है, तो यह केवल स्थानीय निकाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में एनडीए के दीर्घकालिक राजनीतिक प्रभुत्व और संदेश पर भी सीधा असर पड़ेगा।

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