त्रिपुरा में अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते होने वाली अवैध घुसपैठ को लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा में आंकड़े साझा किए हैं। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सदन में एक सवाल के जवाब में बताया कि साल 2023 से 2025 के बीच विभिन्न पुलिस थानों में अवैध घुसपैठ से जुड़े कुल 446 मामले दर्ज किए गए हैं।
कांग्रेस विधायक के सवाल पर सामने आए आंकड़े
यह जानकारी मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कांग्रेस विधायक सुदीप सरकार द्वारा पूछे गए एक सवाल के लिखित उत्तर में दी। विधायक ने राज्य में अवैध घुसपैठ की घटनाओं और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी मांगी थी। मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग का जिम्मा भी है, इसलिए उन्होंने सुरक्षा से जुड़े इन आंकड़ों को सदन के सामने रखा।
सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय
मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार घुसपैठ को रोकने और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। सीमाई क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए राज्य पुलिस, बीएसएफ, स्पेशल ब्रांच, खुफिया इकाइयों और जिला प्रशासन के बीच लगातार खुफिया जानकारी साझा की जा रही है और संयुक्त रूप से अभियान चलाए जा रहे हैं।
नियमित गश्त और निगरानी अभियान
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले रास्तों और सीमाई इलाकों में नियमित गश्त की जा रही है। इसके अलावा नाका चेकिंग, वाहनों की सघन तलाशी और संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए विशेष निगरानी अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।
सीमा सुरक्षा की समीक्षा और फेंसिंग के उपाय
सुरक्षा इंतजामों को और पुख्ता बनाने के लिए नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों में घुसपैठ से जुड़े खुफिया इनपुट का आकलन किया जाता है, संवेदनशील स्थानों की पहचान की जाती है, गिरफ्तारियों पर नजर रखी जाती है और सीमा पर फेंसिंग के काम में आ रही बाधाओं को दूर करने पर विचार किया जाता है। इसके अलावा, सीमावर्ती इलाकों में पुलों और पुलियाओं जैसे कमजोर बिंदुओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कॉन्सर्टिना कॉइल्स और कांटेदार तारों का इस्तेमाल करके अस्थायी बाड़ भी लगाई गई है।





















