एक समय ऐसा था जब अपने सपनों का पेशा चुनने की भारी कीमत राम कपूर को परिवार के गुस्से और नाराजगी के रूप में चुकानी पड़ी थी। संपन्न परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद अमेरिका में पढ़ाई के दौरान उन्हें घर से मिलने वाली आर्थिक मदद पूरी तरह बंद हो गई थी। इसके बाद राम कपूर ने खुद अपने रहने और खाने का खर्च उठाया तथा अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कई तरह के छोटे-मोटे काम किए। राम कपूर का जन्म 1 सितंबर 1973 को नई दिल्ली में हुआ था और उनके पिता अनिल कपूर विज्ञापन जगत के एक जाने-माने और प्रतिष्ठित व्यक्ति थे।
थिएटर से जुड़ाव और अमेरिका में संघर्ष
राम कपूर का शुरुआती जीवन एक ऐसे माहौल में बीता जहां बेहतरीन शिक्षा और एक सुरक्षित तथा स्थापित करियर को लेकर बहुत उम्मीदें जुड़ी हुई थीं। हालांकि उनका झुकाव बचपन से ही अभिनय की तरफ था और स्कूल के दिनों में ही थिएटर से उनका गहरा जुड़ाव हो गया था। तभी उन्होंने ठान लिया था कि वे अपनी जिंदगी अभिनय की दुनिया को ही समर्पित करेंगे। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने इस बात का जिक्र किया था कि जब उन्होंने अभिनय को करियर के रूप में चुनने का फैसला किया तो उनके पिता बिल्कुल खुश नहीं हुए। उनके पिता चाहते थे कि वे अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दें और एक पारंपरिक तथा सुरक्षित करियर चुनें। इसके बावजूद वे अपने निर्णय पर पूरी तरह डटे रहे और अभिनय का प्रशिक्षण लेने के लिए अमेरिका चले गए। शुरुआत में उनका इरादा फिल्ममेकिंग की पढ़ाई करने का था लेकिन वहां के माहौल और अभिनय के प्रति उनके आकर्षण ने उनका पूरा रास्ता ही बदल दिया।
पिता से दस साल तक की दूरी और सेकेंड हैंड गाड़ियों का कारोबार
अमेरिका में पढ़ाई के दौरान राम कपूर की मुश्किलें उस समय और ज्यादा बढ़ गईं जब उनके पिता ने उन्हें पैसे भेजना पूरी तरह बंद कर दिया। राम कपूर ने साझा किया कि उनके पिता चाहते थे कि वे अपने लिए गए हर फैसले की जिम्मेदारी खुद उठाएं और अपने पैरों पर खड़े हों। ऐसी विकट परिस्थिति में उन्होंने अमेरिका में सेकेंड हैंड गाड़ियां खरीदने और उन्हें बेचने जैसे तमाम काम किए ताकि वे अपना गुजारा कर सकें। इस वैचारिक मतभेद के कारण उनके और उनके पिता के रिश्ते लंबे समय तक काफी तनावपूर्ण रहे। दोनों के बीच लगभग 10 साल तक आपसी दूरी बनी रही और कोई खास बातचीत नहीं हुई। हालांकि वक्त बीतने के साथ-साथ उनके पिता को उनके हुनर और फैसले पर भरोसा होने लगा जिसके बाद उनके रिश्ते सुधर गए और काफी बेहतर हो गए। राम कपूर हमेशा से यही चाहते थे कि वे अपने पिता की लोकप्रियता या पहचान का इस्तेमाल करके इंडस्ट्री में शॉर्टकट न लें बल्कि अपनी मेहनत के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाएं।
बड़े अच्छे लगते हैं शो ने बदली तकदीर
अमेरिका से वापस लौटने के बाद राम कपूर ने सबसे पहले थिएटर और टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा और अपने अभिनय करियर की विधिवत शुरुआत की। शुरुआत के दिनों में उन्हें छोटे-छोटे रोल मिले लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार कड़ी मेहनत करते रहे। टेलीविजन पर ‘न्याय’, ‘घर एक मंदिर’, ‘कविता’ और ‘कसम से’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों ने उन्हें अभिनय की दुनिया में एक खास पहचान दिलाई। हालांकि उनके पूरे करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साल 2011 में आया जब उन्होंने ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ सीरियल में काम किया। इस शो में उन्होंने मुख्य किरदार निभाया और अभिनेत्री साक्षी तंवर के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने देश के हर कोने में बेहद पसंद किया।
इस धारावाहिक ने राम कपूर को भारतीय टेलीविजन के सबसे बड़े और लोकप्रिय सितारों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया। इस बड़ी सफलता के बाद उन्होंने फिल्मों की दुनिया में भी अपने लिए मजबूत जगह बनाई। उन्होंने ‘माय वाइफ्स मर्डर’, ‘उड़ान’, ‘हमशकल्स’, ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’, ‘लव स्टोरी 2050’ समेत कई अन्य फिल्मों में अलग-अलग और दमदार भूमिकाएं अदा कीं। समय के साथ उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया और ‘द फैमिली मैन’, ‘अभय’ तथा ‘सनफ्लावर’ जैसी प्रशंसित वेब सीरीज में एकदम अलग और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाए। राम कपूर को उनके बेहतरीन अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्हें इंडियन टेलीविजन अकादमी अवॉर्ड्स और इंडियन टेली अवॉर्ड्स जैसे कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं, जबकि ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ में उनके शानदार काम के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में कई पुरस्कार प्राप्त हुए।



















