लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग संस्थान की इमारत में लगी भीषण आग, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई, अब पूरे उत्तर प्रदेश में सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई की वजह बन गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे को प्रदेश के लिए एक बड़ा सबक करार दिया है और अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि आगे ऐसी कोई घटना दोबारा न होने पाए।
मंगलवार को वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमवार का यह दर्दनाक हादसा पूरे प्रदेश के लिए सीख है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब शासन, प्रशासन और आम लोगों को मिलकर अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दुख न झेलना पड़े।
पूरे प्रदेश में मिशन मोड पर ऑडिट
मुख्यमंत्री ने प्रदेश भर में अग्निशमन उपायों का व्यापक ऑडिट मिशन मोड में चलाने के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हर जिले में अस्पतालों, नर्सिंग होम, मेडिकल कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, शॉपिंग मॉल, सरकारी इमारतों और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच होनी चाहिए और यह पक्का किया जाए कि सभी ज़रूरी सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है।
कोचिंग संस्थानों पर महाअभियान, 100 से ज़्यादा सील
मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे राज्य में कोचिंग संस्थानों की जांच का महाअभियान शुरू कर दिया गया। प्रशासन, विकास प्राधिकरणों और अग्निशमन सेवाओं की संयुक्त टीमों ने मिलकर निरीक्षण किया और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाए जाने पर 100 से अधिक संस्थानों को सील कर दिया।
राज्य सरकार के बयान के मुताबिक इन संयुक्त टीमों ने कोचिंग सेंटरों में नियमों और सुरक्षा इंतज़ामों की बारीकी से पड़ताल की। यह कार्रवाई लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ और आगरा समेत कई शहरों में चलाई गई। जहां-जहां अनियमितताएं मिलीं, वहां 100 से ज़्यादा कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कदम उठाए गए।
हादसे वाली इमारत पर ध्वस्तीकरण का नोटिस
उधर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने जिस इमारत में आग लगी थी, उस पर नोटिस चस्पा कर दिया है। नोटिस में दो टूक लिखा गया है कि अगर खामियों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो बुलडोज़र चलाकर इमारत गिराई जाएगी। नोटिस के शब्दों में, “अगर LDA को संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो बुलडोज़र का इस्तेमाल करके इमारत को गिराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।”
22 जून को अलीगंज स्थित इसी कोचिंग इंस्टीट्यूट में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत हुई थी। LDA ने इमारत के मालिकों से 15 दिन के भीतर जवाब देने को कहा है।
आवासीय नक्शा, व्यावसायिक इस्तेमाल
नोटिस में LDA ने सवाल उठाया है कि संबंधित भवन का नक्शा आवासीय इस्तेमाल के लिए स्वीकृत था, लेकिन मौके पर इसका व्यावसायिक उपयोग हो रहा था। इसके साथ ही स्वीकृत नक्शे के उलट निर्माण में कई विचलन भी पाए गए हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 27(1) के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।
LDA ने भवन स्वामियों को निर्देश दिया है कि वे 15 दिन के अंदर सक्षम प्राधिकारी के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखें। अगर संतोषजनक जवाब और सबूत नहीं दिए गए तो नियमों के मुताबिक ध्वस्तीकरण समेत सख्त कार्रवाई की जाएगी।













