जर्मनी में मंगलवार देर रात रेलवे की संचार प्रणाली में आई एक बड़ी तकनीकी गड़बड़ी ने पूरे देश में ट्रेनों के पहिए थाम दिए। ड्यूश बान की ट्रेनें स्टेशनों पर ही खड़ी रह गईं और देशभर में यात्री इंतजार करते रह गए। जानकारी पाने के लिए लोग स्टेशनों के इन्फॉर्मेशन डेस्क पर कतारों में लगे नजर आए। रेलवे ने इस रुकावट की वजह GSM-R डिजिटल नेटवर्क को बताया, जिसका इस्तेमाल रेलवे के भीतरी संचार के लिए होता है।
कंपनी के मुताबिक यह दिक्कत पूरे नेटवर्क पर असर डाल रही थी, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से ट्रेनों को रोकना पड़ा। आधी रात को जारी एक बयान में ड्यूश बान ने कहा कि गड़बड़ी की वजह पता चल गई है। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि असल कारण क्या था। ड्यूश बान ने इतना जरूर कहा कि उसके तकनीशियन इसे ठीक करने में पूरी ताकत से जुटे हुए हैं।
आखिर GSM-R है क्या
ड्यूश बान ने बताया कि GSM-R प्रणाली रेल संचालन के लिए जरूरी आवाज और डेटा, दोनों को संभालती है। सफर के दौरान यही सिस्टम ट्रेन ड्राइवरों को कंट्रोल सेंटरों से जोड़े रखता है। GSM-R का पूरा नाम ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस रेलवे है। यूरोपियन यूनियन एजेंसी फॉर रेलवेज के अनुसार यह मानक पूरे यूरोप में साल 2000 से इस्तेमाल हो रहा है।
फंसे यात्रियों के लिए इंतजाम
स्टेशनों पर अटके यात्रियों की मदद के लिए ड्यूश बान ने टैक्सी और होटल के वाउचर देने की बात कही। कंपनी ने यह भी कहा कि वह स्टेशनों पर खड़ी ट्रेनों को खोलने की कोशिश करेगी, ताकि यात्रियों को बैठने की जगह मिल सके। रुकावट से हुई परेशानी के लिए रेलवे ने माफी भी मांगी।
गड़बड़ी की जानकारी मिलने के करीब दो घंटे बाद नेटवर्क के कुछ हिस्सों में ट्रेनें फिर से चलने लगीं। बर्लिन के कम्यूटर नेटवर्क ने बताया कि उनकी ट्रेनें दोबारा पटरी पर लौट आई हैं। लेकिन साथ ही यात्रियों को आगाह किया गया कि दिक्कत अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सेवाएं बहाल होने के बाद भी देरी और ट्रेनों के रद्द होने की आशंका बनी रही।
पश्चिमी जर्मनी में भी बहाली
पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी जर्मनी में क्षेत्रीय सेवाएं चलाने वाली डीबी रेजियो मिटे ने भी सेवाएं दोबारा शुरू होने की जानकारी दी। कंपनी ने कहा कि यात्रियों को अब भी देरी और रद्द होने की आशंका रखनी चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि यह रुकावट बुधवार सुबह कम से कम 6 बजे तक खिंच सकती है। स्टेशनों पर सूचना बोर्ड और अनाउंसमेंट के जरिए यात्रियों को बदलावों की जानकारी लगातार दी जाती रही।
पहले से दबाव में जर्मनी का रेल तंत्र
बीते कुछ सालों में जर्मनी में ट्रेनों के लेट होने और सफर में रुकावट को लेकर शिकायतें बढ़ी हैं। सरकारी कंपनी ड्यूश बान ने अपने अहम रूटों पर बड़े स्तर पर मरम्मत का काम शुरू किया है। इस काम को गहन तो बताया गया है, लेकिन इससे यात्रियों को परेशानी भी हो रही है। ड्यूश बान का कहना है कि सालों तक कम निवेश के बाद अब मकसद सेवाओं को बेहतर बनाना है।
जर्मनी के रेल नेटवर्क में लगभग पूरी तरह ठप होने की घटनाएं बहुत कम देखी गई हैं। पहले जब ऐसा हुआ भी, तो उसकी मुख्य वजह तूफान रहे। इस बार वजह तकनीकी थी और इसका सीधा संबंध GSM-R प्रणाली से था। कुछ इलाकों में ट्रेनें दोबारा चलने के बाद भी रेलवे की ओर से देरी और रद्द होने की चेतावनी जारी रही।










