उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो गरीब और लाचार परिवारों की बेटियों को शादी का झांसा देकर राजस्थान और हरियाणा ले जाता था और वहां उन्हें 2-2 लाख रुपये में बेचकर जबरन वेश्यावृत्ति में धकेल देता था। कोतवाली अकबरपुर पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), स्वाट और सर्विलांस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के 7 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 2 महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक अपहृत युवती को भी सकुशल छुड़ा लिया है।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग एक युवती को शादी का झांसा देकर राजस्थान और हरियाणा ले जाने की फिराक में हैं और बसखारी मार्ग पर खिद्दिरपुर, टाटा मोटर्स शोरूम के पास किसी गाड़ी के इंतजार में खड़े हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने देर नहीं की और तुरंत मौके की घेराबंदी कर दबिश दी। इसी दबिश में पूरा गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ गया और साथ मौजूद युवती को भी बचा लिया गया।
कौन-कौन गिरफ्तार हुआ
गिरफ्तार आरोपियों में राजस्थान के पाली जिले के सुमेरपुर निवासी बाबूलाल पुत्र छोगाराम, सिरोही जिले के रामपुरा थाना क्षेत्र निवासी मोहनलाल पुत्र सुरताजी, सुमेरपुर पाली निवासी नरेन्द्र कुमार पुत्र बाबूलाल, पाली जिले के सुमेरपुर थाना क्षेत्र स्थित कोलीबाड़ा निवासी बीराराम पुत्र स्वर्गीय धर्माराम, आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थाना क्षेत्र के मखनहा गांव निवासी नसरूद्दीन पुत्र तौफीक, कोलीबाड़ा (सुमेरपुर, पाली) निवासी बीराराम की पत्नी चन्द्रकला उर्फ पूनम तथा अंबेडकरनगर जिले के जलालपुर थाना क्षेत्र के भाऊकुआं गांव निवासी वेदप्रकाश की पत्नी ऊषा शामिल हैं।
गरीब और लाचार परिवारों की बेटियां निशाने पर
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उनका पूरा गिरोह जानबूझकर आर्थिक रूप से कमजोर, लाचार और अनाथ परिवारों की युवतियों को निशाना बनाता है। गिरोह के स्थानीय सदस्य पहले ऐसे परिवारों की तलाश करते हैं जिनके पास इतनी हैसियत ही नहीं होती कि वे विरोध कर सकें या कानूनी लड़ाई लड़ सकें। इसके बाद इन परिवारों को भरोसे में लेकर बताया जाता है कि उनकी बेटी की शादी किसी संपन्न और अच्छे घर में तय करा दी जाएगी। गरीबी और मजबूरी में फंसे परिवार इस झांसे में आसानी से आ जाते हैं।
दूल्हा-बाराती बनकर करते थे फर्जी शादी
भरोसा जीतने के बाद गिरोह पूरी योजना के साथ आगे बढ़ता है। सबसे पहले युवती का नाम बदलकर उसके नाम पर फर्जी पहचान पत्र तैयार कराए जाते हैं। इसके बाद एक बाकायदा शादी समारोह रचाया जाता है, जिसमें गिरोह के ही सदस्य दूल्हा, बाराती और रिश्तेदार बनकर शामिल होते हैं, ताकि किसी को इस साजिश की भनक तक न लगे। शादी की रस्में पूरी होने के बाद विदाई का बहाना बनाकर युवती को राजस्थान और हरियाणा की ओर ले जाया जाता है।
रास्ते में साथ चलती थी महिला आरोपी, ताकि शक न हो
इस पूरे सफर के दौरान आरोपी चन्द्रकला उर्फ पूनम अपहृत युवती के साथ ही रहती है। इसके पीछे मकसद यह है कि रास्ते में अगर कहीं पुलिस जांच हो या कोई पूछताछ करे, तो ऐसा लगे कि नई-नवेली दुल्हन अपनी शादी के बाद ससुराल जा रही है। इससे युवती को भी यह अहसास दिलाया जाता है कि वह अकेली नहीं है, जिससे वह रास्ते में घबराकर भागने या शोर मचाने की कोशिश न करे।
फर्जी दस्तावेज बनाकर मिटाते थे असली पहचान
पूछताछ और चेकिंग के दौरान भी गिरोह के सदस्य यही जताते थे कि वे लड़की की शादी कराकर विदाई के बाद उसे लेकर जा रहे हैं। सफर के दौरान आरोपी एक-दो दिन तक रेलवे स्टेशन या बस स्टेशन के आसपास के होटलों में रुककर हालात का जायजा भी लेते थे, ताकि रास्ते में कोई दिक्कत आए तो उसे अपने स्तर पर संभाला जा सके। राजस्थान और हरियाणा पहुंचने के बाद युवतियों को उनकी मर्जी के खिलाफ वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल दिया जाता था और हालात ऐसे बना दिए जाते थे कि उनका वापस लौटना लगभग नामुमकिन हो जाए। युवतियों की असली पहचान छिपाने के लिए उनके फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे, ताकि न तो उनके परिवार वाले और न ही पुलिस उन्हें ढूंढ पाए।
एक लड़की के बदले 2 लाख रुपये, केस दर्ज
पूछताछ में आरोपियों ने यह भी खुलासा किया कि एक युवती के बदले राजस्थान के ग्राहकों से 2,00,000 रुपये लिए गए थे, जिसमें से 1 लाख रुपये नकद और 1 लाख रुपये बैंक खाते के जरिए लिए गए। इस रकम में से 40 हजार रुपये नकद आरोपी ऊषा के पास से बरामद किए गए हैं। इस पूरे मामले में थाना कोतवाली अकबरपुर में मुकदमा अपराध संख्या 407/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143(2), 87, 318(4) और अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 की धारा 9 के तहत केस दर्ज किया गया है।











