अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी होने के मामले में पुलिस पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। अयोध्या पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से 6 आरोपी मार्च 2025 में मंदिर ट्रस्ट में नौकरी पर रखे गए थे और नौकरी लगने के केवल 2 से 3 महीने के भीतर ही उन्होंने नोट चुराना शुरू कर दिया था। एक-दूसरे को चोरी करते देख बाकी आरोपियों ने भी यही रास्ता अपना लिया। पूछताछ में यह भी पता चला कि आरोपी शराब पार्टी के लिए जमा होते थे और उसी दौरान चोरी की रकम आपस में बांटी जाती थी।
पहले एक-दो नोट, फिर गड्डियां, फिर मोटी रकम
जांच में सामने आया कि शुरुआत में आरोपी बेहद सतर्क तरीके से चोरी करते थे। पहले वे 500 रुपये के एक या दो नोट चुराकर अपने कपड़ों में छुपा लेते थे और ड्यूटी खत्म होने पर मंदिर परिसर से बाहर निकल जाते थे। धीरे-धीरे उनका हौसला बढ़ता गया और वे 10 नोटों की गड्डी तक चुराने लगे। समय बीतने के साथ यह सिलसिला और आगे बढ़ा और आरोपी मोटी रकम तक उड़ाने लगे। यानी शुरुआती छोटी-मोटी चोरी धीरे-धीरे बड़े पैमाने की डकैती में बदल गई, क्योंकि किसी ने रोक-टोक नहीं की।
करीब 2 से 3 करोड़ की चोरी, 79 लाख से ज्यादा बरामद
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने खुद कबूल किया कि उन्होंने अब तक लगभग 2 से 3 करोड़ रुपये की चोरी को अंजाम दे दिया है। इसमें से अब तक 79 लाख रुपये कुछ हजार की रकम रिकवर की जा चुकी है। यानी जितनी बड़ी रकम इन आरोपियों ने चुराई, उसका एक बड़ा हिस्सा अब भी वापस नहीं मिला है। जांच में यह भी सामने आया कि 8 आरोपियों में से 7 आरोपियों ने चोरी के पैसों से किसी न किसी रूप में संपत्ति बना ली थी।
चोरी के पैसों से बनाई प्रॉपर्टी, पिता के नाम भी खरीदी जमीन
कुछ आरोपियों ने चोरी के पैसे से अयोध्या के बाहर भी संपत्ति खरीदी। एक आरोपी ने तो अपने पिता के नाम पर चोरी के पैसों से जमीन खरीद ली। 4 और 5 जून के आसपास मंदिर ट्रस्ट ने सभी आरोपियों के ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए करीब 79 लाख रुपये नकद और चोरी के आभूषण बरामद करवाए थे। इसके अलावा गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने और भी नकदी बरामद की है।
14 कोसी परिक्रमा मार्ग के जंगलों में होती थी शराब पार्टी
जांच में खुलासा हुआ कि 8 आरोपियों में से कुछ चोरी के पैसों से 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर बने जंगलों में जाकर शराब पार्टी करते थे। इन्हीं पार्टियों के दौरान चोरी की रकम का आपस में बंटवारा किया जाता था। यानी मंदिर परिसर में चोरी करने के बाद आरोपी सुरक्षित और सुनसान जगहों का इस्तेमाल कर रकम का हिसाब-किताब निपटाते थे, ताकि किसी को शक न हो।
काउंटिंग रूम की निगरानी में रही बड़ी चूक
जांच में एक और अहम बात सामने आई है। आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बताया कि काउंटिंग रूम में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के लिए बनाए गए सीसीटीवी कंट्रोल रूम में कई बार कोई मौजूद ही नहीं होता था और कई बार निगरानी ठीक से नहीं हो पाती थी। आरोपियों ने खुद कबूल किया कि काउंटिंग रूम की इसी ढिलाई का वे फायदा उठाते थे। यानी सुरक्षा व्यवस्था में हुई इसी चूक ने आरोपियों को लगातार चोरी करने का मौका दिया, जो कई महीनों तक बेरोकटोक चलता रहा।











