उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में स्थित लक्ष्मीपुर विकासखंड के बनरसिहा गांव में पुरातत्व विभाग की हालिया खुदाई से प्राचीन इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रकाश में आए हैं। यहां मिले विविध पुरावशेषों के अध्ययन के बाद पुरातत्व विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि प्राचीन काल में इस स्थान पर एक समृद्ध एवं विकसित नगर मौजूद था। लंबे समय से स्थानीय स्तर पर इस क्षेत्र को भगवान बुद्ध के ननिहाल से जोड़ा जाता रहा है, हालांकि पुरातात्विक टीम ने अभी तक इस दावे पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है।
कुषाण वंश के तांबे के सिक्के और 1400 साल पुराने चावल के दाने बरामद
बनरसिहा क्षेत्र में चलाई गई इस पुरातात्विक मुहिम के दौरान लगभग 30 किलोग्राम तांबे के प्राचीन सिक्के बरामद किए गए हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, इन सिक्कों का संबंध कुषाण राजवंश के प्रमुख सम्राटों विम कडफिसेस, कनिष्क तथा हुविष्क के शासनकाल से है। सिक्कों के साथ-साथ खुदाई स्थल से करीब 1400 वर्ष पुराने चावल के दानों के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि उस युग में यहां व्यवस्थित कृषि और स्थायी मानव आबादी निवास करती थी।
उत्खनन स्थल से उत्तरी कृष्ण मार्जित मृद्भांड (एनबीपीडब्ल्यू) के टुकड़ों के अलावा मिट्टी की आकर्षक मूर्तियां, जलपात्र, नक्काशीदार मनके, लोहे के विभिन्न औजार, तांबे के बर्तन और मिट्टी की राजकीय मुहरें भी मिली हैं। ये सभी सामग्रियां दर्शाती हैं कि बनरसिहा के निवासी शिल्पकारी, व्यापार और दैनिक जीवन के आधुनिक संसाधनों का उपयोग करने में निपुण थे।
उत्तर मौर्य काल से गुप्त काल तक का समृद्ध इतिहास
इतिहासकार डॉ. बृजेश पांडेय के विवरण के अनुसार, पुरातत्व विभाग ने बनरसिहा कला इलाके में मौजूद प्राचीन टीलों पर अलग-अलग बिंदुओं को चिह्नित कर चार अलग-अलग चरणों में खुदाई का कार्य पूरा किया। इस वैज्ञानिक उत्खनन में विभिन्न ऐतिहासिक युगों की कलाकृतियां और अवशेष मिले हैं। इनमें उत्तर मौर्य काल से शुरू होकर गुप्त काल तक के लगभग ढाई हजार साल पुराने ऐतिहासिक साक्ष्य शामिल हैं। इतने लंबे समय तक विभिन्न राजवंशों की मौजूदगी यह बताती है कि बनरसिहा प्राचीन व्यापारिक और प्रशासनिक गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र रहा होगा।
भगवान बुद्ध के ननिहाल देवदह के दावों पर पुरातत्वविदों का रुख
जनसामान्य में बनरसिहा को भगवान बुद्ध की माता के मायके यानी ऐतिहासिक देवदह स्थल के रूप में देखा जाता है। इतिहासकार डॉ. बृजेश पांडेय ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय पुरातत्व विभाग को चार चरणों की खुदाई में जो पुरावशेष मिले हैं, उनसे अभी यह साबित नहीं होता कि यह स्थान बुद्ध का ननिहाल अथवा देवदह ही था। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मिले हुए अवशेष बनरसिहा कला के एक सुव्यवस्थित प्राचीन नगर होने की पुष्टि जरूर करते हैं। वर्तमान में इस ऐतिहासिक स्थल को सुरक्षित रखने और आगे के शोध के लिए संरक्षण कार्य तेजी से जारी है।



















