राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद अयोध्या जेल भेज दिया गया है। 13 घंटे तक चली पूछताछ में पुलिस ने अविनाश से लगातार सवाल-जवाब किए, और इसी दौरान जांच में एक बड़ी कड़ी भी हाथ लगी है।
गाड़ी की बरामदगी से खुला नया राज
अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर पुलिस ने एक कार बरामद की है। यह कार उसके प्रतापगढ़ वाले घर से मिली है। आरोप है कि इस गाड़ी का इस्तेमाल चोरी की रकम को इधर से उधर ट्रांसफर करने में किया जाता था। पुलिस को शक है कि यह गाड़ी भी चढ़ावे की चोरी के पैसों से ही खरीदी गई थी। बरामद हुई यह ब्रेजा कार अविनाश के नाम पर नहीं बल्कि उसके भाई अभिषेक के नाम पर रजिस्टर्ड मिली है।
योग केंद्र से जुड़े सुराग
बरामदगी से पहले दिन में पुलिस अविनाश को उस योग केंद्र भी ले गई थी, जहां वह रहता था। गौरतलब है कि 5 जून को इसी योग केंद्र में हुई छापेमारी के दौरान अविनाश के बक्से से 5 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे। इसी सुराग के आधार पर पुलिस लगातार मामले की परतें खोल रही है।
दूसरे आरोपी की कस्टडी की तैयारी
अयोध्या पुलिस की टीम अविनाश को 12 कोसी परिक्रमा मार्ग और कौशलपुरी योग केंद्र भी लेकर गई थी। इसी दौरान यह भी खुलासा हुआ कि गुरुवार को अविनाश के एक रिश्तेदार के नाम पर बरामद हुई ब्रेजा कार असल में सेकेंड हैंड खरीदी गई थी। अब तक की जांच में कुल तीन गाड़ियां सामने आ चुकी हैं। सूत्रों के मुताबिक शनिवार को पूछताछ को आगे बढ़ाते हुए पुलिस टीम गिरफ्तार आरोपियों में से किसी और आरोपी की पुलिस कस्टडी की मांग कर सकती है।
अनुकल्प की गाड़ियां भी रडार पर
इस मामले में गिरफ्तार अनुकल्प की गाड़ियों की जांच भी अयोध्या पुलिस कर रही है। अनुकल्प ने हाल ही में एक सफेद रंग की डिजायर कार बुक की थी और उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर भी डाली थी। सूत्रों के मुताबिक अनुकल्प ने चोरी के पैसों से एक स्कॉर्पियो गाड़ी भी बुक की थी, लेकिन इसे खरीदने से पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सूत्रों का यह भी कहना है कि डिजायर और स्कॉर्पियो, दोनों गाड़ियां चंदा चोरी के पैसों से ही ली गई थीं।
भाई के नाम पर निकली गाड़ी, टीचर से भी हुई पूछताछ
पुलिस ने अविनाश की गाड़ी को चोरी की रकम से खरीदी गई संपत्ति मानते हुए जब्त कर लिया है। अब पुलिस यह भी पता लगा रही है कि चोरी की रकम से और कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदी गई थीं। जिस गाड़ी को जब्त किया गया है, वह अविनाश के नाम पर नहीं बल्कि उसके भाई अभिषेक के नाम पर रजिस्टर्ड है। अभिषेक अयोध्या में प्राइमरी सरकारी टीचर हैं। पुलिस ने योग केंद्र में अभिषेक से भी पूछताछ की थी, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया।













