बहुचर्चित निठारी कांड के मुख्य आरोपियों में से एक रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले में अपनी बेटी ज्योति को खोने वाले माता-पिता झब्बू लाल और सुनीता ने कोली द्वारा की गई कथित खुदकुशी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने शुक्रवार, 18 सितंबर को हुई इस घटना को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पीड़ित परिवार को आशंका है कि सुरेंद्र कोली के पास इस भयावह कांड से जुड़े कई ऐसे गहरे राज थे, जो उसकी मौत के साथ ही दफन हो गए।
सुरेंद्र कोली की मौत को हत्या बता रहा पीड़ित परिवार
झब्बू लाल और उनकी पत्नी सुनीता का कहना है कि सुरेंद्र कोली की अचानक हुई इस मौत के पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि कोली ने अपनी जिंदगी के 6935 दिन जेल की सलाखों के पीछे बिताए, लेकिन उस दौरान उसने कभी खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं की। जेल से बाहर आने के बाद वह 310 दिन भी जिंदा नहीं रह पाया। परिवार का आरोप है कि अगर उसे अपनी जान ही देनी थी, तो वह जेल में रहते हुए भी फांसी लगा सकता था या जहर खा सकता था। पीड़ित माता-पिता ने आशंका व्यक्त की कि कोली ने फांसी नहीं लगाई है, बल्कि उसकी हत्या की गई है और इस पूरे मामले की तह तक जाकर जांच की जानी चाहिए।
साजिश और पैसों के लेन-देन का संदेह
पीड़ित परिवार ने इस मामले में एक और गंभीर पहलू की ओर इशारा किया है, जो निठारी कांड के दूसरे आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर से जुड़ा है। झब्बू लाल के अनुसार, यह संभव है कि मोनिंदर सिंह पंढेर ने जेल से बाहर आने के बाद कोली को कुछ पैसे देने का वादा किया हो। उनका संदेह है कि यदि वादे के मुताबिक पैसे नहीं दिए गए और कोली ने निठारी कांड के छिपे हुए सच को उजागर करने की धमकी दी होगी, तो ऐसी स्थिति में उसे रास्ते से हटाने के लिए उसकी हत्या की जा सकती है। हालांकि, परिवार ने स्पष्ट किया कि यह उनकी निजी आशंकाएं हैं। पुलिस ने अभी तक इस तरह की किसी भी साजिश की पुष्टि नहीं की है।
हरिद्वार पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
हरिद्वार पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, सुरेंद्र कोली का शव शुक्रवार को भूपतवाला इलाके में स्थित उसकी चाय की दुकान के पास एक फंदे से लटका हुआ पाया गया। पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत के असली कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। इसके साथ ही प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों और व्यक्त की गई आशंकाओं को भी जांच के दायरे में शामिल किया जाएगा।
निठारी कांड और न्याय की लंबी लड़ाई
नोएडा के निठारी गांव में हुए इस दर्दनाक नरसंहार ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। झब्बू लाल की बेटी ज्योति भी उन लापता बच्चों में शामिल थी, जिनके अवशेष बाद में जांच के दौरान बरामद किए गए थे। पीड़ित परिवारों ने इंसाफ के लिए सालों तक अदालतों के चक्कर काटे। लंबे समय तक चली अदालती कार्रवाई के बाद, सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को विभिन्न मामलों में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने साल 2025 में कोली को बरी करने का फैसला सुनाया था।


















